2001 में रिलीज के बाद फिल्म गदर ने इतिहास रचा था. अब बीस दशक के बाद फिल्म गदर का सीक्वल रिलीज को तैयार है. फिल्म के पोस्टर ने फैंस के बीच उत्सुकता जगा दी है. लोग बेसब्री से अपनी इस आइकॉनिक फिल्म का इंतजार कर रहे हैं. फिल्म के डायरेक्टर अनिल शर्मा हमसे इसके सीक्वल की मेकिंग और उसके प्रोसेस पर बातचीत करते हैं.
फिल्म की सीक्वल को लेकर कभी प्रेशर महसूस होता था. इसके जवाब में अनिल कहते हैं, नहीं, मैं बहुत ही सहजता से फिल्म बनाता हूं. मुझे कोई जल्दी नहीं है. मन में कोई कहानी आती है और मुझे लगता है कि लोगों को यह कहानी जाननी चाहिए, तो मैं फिल्म बनाकर उनके सामने पेश कर देता हूं. फिल्म मेकिंग प्रॉसेस के दौरान मेरा नजरिया हमेशा दर्शकों वाला ही रहा है. मैं ऑडियंस की तरह ही फिल्म को पसंद या नापसंद करता हूं. रही बात गदर की, तो ऑडियंस ने उस फिल्म को इतना बड़ा बना दिया, कभी सोचा नहीं था कि इसका सीक्वल बनाऊंगा.
जब पार्ट 2 का दौर आया, तो मुझे लोग कहते थे कि तुम गदर 2 क्यों नहीं बनाते, हुकुमत, तहलका का सीक्वल क्यों नहीं बनाते हो. इस तरह का प्रेशर मुझ पर डाला जाता था. मैं यह भले जानता था कि अगर शकीना और तारा का बेटा बड़ा हो जाता है, तो उसकी कहानी लिखने के रास्ते खुल जाते हैं. मैं ऐसी सीक्वल नहीं बनाना चाहता था कि टाइटिल का इस्तेमाल कर लूं और गदर में कोई भी कहानी ठूंस दूं. आप देखें न, गॉडफादर, अवतार, केजीएफ, बाहुबली जैसी फिल्म उन्हीं किरदारों के साथ बनी है. मैं उन्हीं किरदारों संग उसका पार्ट 2 बनाना चाहता था. फिल्म का सीक्वल 20 साल की बाद लीप पर आगे बढ़ेगी. कहानी में जो बच्चा था जीते(उत्कर्ष शर्मा) वो अब बड़ा हो चुका है.
सभी किरदारों को दोबारा एकसाथ इक्ट्ठा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. इसके जवाब में अनिल कहते हैं, सनी देओल तो लंबे समय से गदर करना चाहते थे. हालांकि कंडीशन उनकी वही थी कि फिल्म का इंपैक्ट बिलकुल पहली गदर की ही तरह हो. मैंने जब सीक्वल की कहानी सुनाई, तो उनकी आंखे भर गई थीं. अमीषा भी रोने लगी थी. उत्कर्ष को भी स्क्रिप्ट बहुत इमोशनल लगी थी. देखो, मैं गदर 2 इसलिए नहीं बनाना चाहता था क्योंकि मुझे बनानी है. मैं चाहता था कि पहली फिल्म के मान में कोई कमी नहीं आए. जब सौ दफा यकीन हो गया कि ये नई कहानी उस लेवल पर पहुंची है, फिर जाकर मैंने इसके लिए हामी भरी है.
फिल्म के ज्यादातर सीक्वल ने निराश किया है. गदर 2 को लेकर थोड़ा डर नहीं लगता. अनिल कहते हैं, जब आप टाइटल को लेकर कहानी बनाते हैं, तो जाहिर सी बात है निराशा हाथ लगेगी. वहीं जब किरदारों को लेकर कहानी को आगे बढ़ाते हैं, तो उसके रिलेटिबिलिटी के चांसेज बढ़ जाते हैं. अब दृश्यम 2, अवतार 2, बाहुबली जैसे कई फिल्में सक्सेसफुल रही हैं. गदर के किरदार लोगों के अपने हो गए हैं, वो जानना चाहते हैं कि शकीना और तारा सिंह की कहानी कैसे आगे बढ़ती है. मैं गदर की टाइटिल को कभी इनकैश करने की कोशिश नहीं की थी. मेरे बीस साल की तपस्या का निचोड़ है.
'गदर इंटरवल के बाद की कर रहा शूटिंग, ऐसा था एहसास'
फिल्म को शूटिंग का जिक्र करते हुए अनिल बताते हैं, फिल्म को शूट करने में लगभग एक साल लग गया था. मेरी प्लानिंग तो पांच-छ महीने की थी लेकिन बीच में ओमिक्रोन की लहर, कोरोना और बारिश की वजह से शूटिंग को टालना पड़ा था. सेट पर जब हम पहुंचे थे, तो लगा बीस साल वापस वक्त में चले गए हैं. बेहद ही इमोशल माहौल हो गया था. शूटिंग में ज्यादातर वही लोग थे, जिन्होंने गदर में भी काम किया है. शकीना और तारा को बीस साल बाद वही गेटअप में देखकर हर कोई इमोशनल हो गया था. पूरा माहौल देखकर बीस साल के गैप का एहसास ही नहीं होता है. ऐसा लगता है कि मैंने गदर इंटरवल के पहले की थी और अब इंटरवल के बाद इसके सीक्वल की शूटिंग कर रहा हूं. वहां पर हर किसी की आंखें नम हो गई थी. सेट के बाहर भी जब तारा-शकीना की महुर्त तस्वीर हमने शेयर की थी, तो वो वायरल हो गई थी. फैंस भी कहने लगे कि वक्त वापस आ गया है. फिल्म में उड़ जा काले कावां सॉन्ग भी हमने रखी थी. गदर तो मेरी फिल्म है ही नहीं, पब्लिक की फिल्म हो चुकी है.
नेहा वर्मा