दृश्यम 3: द कन्क्लूजन में अभिनेता कमलेश सावंत एक बार फिर इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत गायतोंडे के किरदार में दर्शकों का दिल जीत रहे हैं. फ्रेंचाइजी के इस जिद्दी और तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी के तौर पर सावंत ने गायतोंडे को दृश्यम की दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले किरदारों में शामिल कर दिया है. फिल्म में उनकी ताजा परफॉर्मेंस ने एक बार फिर याद दिलाया है कि पर्दे पर पुलिस अधिकारी के किरदार को विश्वसनीय ढंग से निभाने वाले अभिनेताओं में कमलेश सावंत की अपनी अलग जगह है.
साल 2015 में आई पहली दृश्यम ने उन्हें बड़े स्तर पर पहचान दिलाई, लेकिन पुलिस वाले का किरदार कमलेश सावंत के लिए नया नहीं था. अपने करियर में वह कई फिल्मों में पुलिस अधिकारी या कानून-व्यवस्था से जुड़े किरदार निभा चुके हैं. इन भूमिकाओं में उनकी खासियत रही है, बिना जरूरत के ज्यादा शोर किए किरदार में एक दबा हुआ तनाव और वास्तविकता बनाए रखना.
‘दृश्यम 2 में उन्होंने इंस्पेक्टर गायतोंडे की भूमिका दोहराई और अब फ्रेंचाइजी की तीसरी और आखिरी फिल्म दृश्यम 3: द कन्क्लूजन में भी उसी किरदार के साथ लौटे हैं. पहली फिल्म दृश्यम में गायतोंडे एक ऐसे पुलिस अधिकारी के तौर पर सामने आते हैं, जो आईजी मीरा देशमुख के बेटे समीर के गायब होने के बाद इस बात को लेकर आश्वस्त हो जाता है कि विजय सालगांवकर और उसका परिवार कुछ छिपा रहा है. गायतोंडे की लगातार पूछताछ और शक से सालगांवकर परिवार पर दबाव बढ़ता जाता है लेकिन विजय हर बार उससे एक कदम आगे निकल जाता है.
दृश्यम 2 में भी गायतोंडे का शक खत्म नहीं होता. परिवार के तमाम मुश्किलों से निकल जाने के बावजूद वह केस को छोड़ने को तैयार नहीं होता. उसे यकीन रहता है कि विजय ने सबूतों के साथ ऐसा खेल खेला है कि वह कानून की पकड़ से बच गया. यही जिद धीरे-धीरे गायतोंडे की तलाश को और निजी बना देती है.
गायतोंडे उन पुलिस किरदारों से बिल्कुल अलग है, जिन्हें बॉलीवुड अक्सर बड़े-बड़े एक्शन और डायलॉग्स के साथ पेश करता रहा है. अजय देवगन सिंघम सीरीज के स्टार कॉप हैं, लेकिन गायतोंडे का संसार बिल्कुल अलग है. वह न तो हर समस्या का हल मारधाड़ में खोजता है और न ही उसकी ताकत किसी फिल्मी स्टाइल में दिखाई जाती है. उसकी असली ताकत है केस को छोड़ने से इनकार. हर बार मात खाने के बाद भी वह लौटता है, पहले से ज्यादा दृढ़ होकर. उसका एक ही मकसद है, सच तक पहुंचना और विजय सलगांवकर को अपराधी साबित करना.
कमलेश सावंत का पुलिस किरदारों से रिश्ता दृश्यम से काफी पुराना है. साल 2004 में आई उनकी बॉलीवुड डेब्यू फिल्म खाकी में उन्होंने कॉन्स्टेबल की भूमिका निभाई थी. इसके बाद वह मुंबई मेरी जान (2008), राइट या रॉन्ग (2010), फोर्स (2011) और भूतनाथ रिटर्न्स (2014) जैसी फिल्मों में भी पुलिस या कानून-व्यवस्था से जुड़े किरदारों में नजर आए. अलग-अलग फिल्मों में उन्होंने पुलिस की अलग रैंक और अलग मिजाज को पर्दे पर उतारा.
हालांकि कमलेश सावंत के करियर की पहचान सिर्फ पुलिस वाले किरदारों तक सीमित नहीं है. वह मराठी सिनेमा और टेलीविजन का भी जाना-पहचाना नाम हैं. उन्होंने 2007 में फिल्म एक क्रांतिवीर: वासुदेव बलवंत फड़के से मराठी फिल्मों में कदम रखा. इसके बाद वह रिंगा रिंगा (2010), लालबाग परळ (2010) और दगड़ी चॉल (2015) जैसी फिल्मों में दिखाई दिए.
मराठी टेलीविजन में भी कमलेश सावंत का लंबा अनुभव रहा है. खासतौर पर सीरियल लक्ष्य से उन्हें पहचान मिली. इसके अलावा वह थिएटर से भी लंबे समय से जुड़े रहे हैं लेकिन तीन फिल्मों में निभाया गया इंस्पेक्टर गायतोंडे का किरदार उनके करियर की सबसे खास पहचानों में शामिल हो चुका है, ऐसा किरदार, जिसे दर्शक दृश्यम सीरीज के साथ जोड़कर देखते हैं.
कमलेश सावंत का जन्म 12 जून 1974 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था. बचपन से ही उन्हें अनुशासन और फिटनेस का माहौल मिला. उनके पिता तुकाराम सावंत भारतीय रेलवे में क्लर्क और स्पोर्ट्स सेक्रेटरी थे. उन्होंने कमलेश और उनके भाई को बॉडीबिल्डिंग के लिए प्रोत्साहित किया. कड़ी ट्रेनिंग ने कमलेश में अनुशासन और फिटनेस की आदत विकसित की, जो आगे चलकर उनके अभिनय करियर में भी काम आई. उनका एथलेटिक व्यक्तित्व और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस उन पुलिस किरदारों के लिए भी मुफीद साबित हुआ, जिन्हें उन्होंने पर्दे पर निभाया.
उधर, दृश्यम 3 बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन कर रही है. सोमवार यानी रिलीज के चौथे दिन फिल्म ने भारत में 21 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया. इसके साथ ही भारत में फिल्म की कुल नेट कमाई 197.50 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन 237 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
दृश्यम 3 में कहानी एक बार फिर विजय सलगांवकर के इर्द-गिर्द घूमती है. अपने परिवार को बचाने की कोशिश में विजय एक बार फिर अपराध, सबूत और कानून के जाल में उलझ जाता है. तीसरी फिल्म भी फ्रेंचाइजी के पारिवारिक ड्रामा और रहस्य के मूल रंग को बरकरार रखती है, लेकिन इस बार उसके सामने एक नया संघर्ष खड़ा होता है. फिल्म 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क