पहली वाली स्पाइडरमैन तो एक तरह से हर किसी ने देखी है. कभी टीवी पर, कभी यूट्यूब या ओटीटी पर. हिन्दी में, अंग्रेज़ी में. शायद मार्वल की वो ऐसी फिल्म रही होगी जो भारत में सबसे ज्यादा बार टीवी पर चली है, क्यूंकि कार्टून नेटवर्क तक पर उस फिल्म को दिखाया गया है.
ये फिल्म साल 2002 में आई थी. और अगर आपने ये फिल्म देखी है, तो ज़रूर कैफेटेरिया वाले उस फेमस सीन को लेकर चर्चा भी हुई होगी. जिसमें पीटर पार्कर हवा में उड़ी ट्रे और उस पर रखा दूध का कार्टन, सेब और डेजर्ट एक साथ पकड़ लेता है. देखने में ये आपको CGI यानी Computer Generated Imagery जैसा लगता है, लेकिन यह शॉट पूरी तरह असली था. इसमें न ग्रीन स्क्रीन थी और न वीएफएक्स.
आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन इस शॉट के लिए टोबी मैग्वायर ने 156 टेक दिए और इसे पूरा करने में 16 घंटे लगे. उनके हाथ को ट्रे से चिपकाने के लिए चिपचिपा गोंद जैसा सामान लगाया गया, जेलो और सैंडविच को भी उनकी प्लेटों से चिपकाया गया, और कैमरे के ऊपर खड़ा एक क्रू मेंबर सामान नीचे गिरा रहा था ताकि वह सही तरह फ्रेम में आए. रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनी इस सीन को हटाना चाहती थी, लेकिन सैम राइमी ने इसे रखने पर जोर दिया.
एक्स मेन इस किरदार से 2 साल पहले बड़े पर्दे पर आ चुकी थी, लेकिन 2002 में सैम राइमी की स्पाइडर मैन ने मार्वल के इस लोकप्रिय किरदार को बड़े पर्दे पर उतारा. फिल्म का यह यादगार सीन पीटर पार्कर को ताकतें मिलने के तुरंत बाद आता है. स्कूल कैफेटेरिया में मेरी जेन फिसले हुए जूस पर पैर रखकर फिसलती है. पीटर उसे गिरने से बचाता है और साथ ही ट्रे से उड़कर बाहर आए खाने को भी वापस गिरते समय पकड़ लेता है.
फिल्म की डीवीडी कमेंट्री में किर्स्टन डंस्ट ने कहा था कि यह सीजीआई नहीं था, यह सब टोबी ने किया था, और उनके हाथ को ट्रे से चिपकाने के लिए स्टिकी गोंद जैसा सामान इस्तेमाल हुआ था. पहले 155 टेक में टीम कितनी करीब पहुंची, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है. यह भी दर्ज नहीं है कि कोई सफल टेक उस पल की खुशी में खराब हुआ था या नहीं.
बताया गया कि इस बिना डिजिटल इफेक्ट वाले शॉट के पीछे की तरकीब उतनी ही दिलचस्प थी जितनी इसकी चर्चा. 16 घंटे और 156 टेक का मतलब करीब हर 6 मिनट में एक कोशिश था, और यह सब करीब 4 सेकंड के एक दृश्य के लिए हुआ.
दरअसल अलग-अलग चीजों के एक साथ गिरने, एक हाथ से पकड़े जाने और उसी टेक में किर्स्टन डंस्ट की प्रतिक्रिया सही आने से यह काम और मुश्किल हो गया.
जिस शख्स ने इसके असली होने की बात पक्की कही, वह फिल्म के वीएफएक्स प्रमुख जॉन डाइकस्ट्रा थे, जिन्हें ओरिजिनल स्टार वॉर्स के मोशन कंट्रोल कैमरा सिस्टम से भी जोड़ा गया. दिलचस्प यह रहा कि फिल्म के जिस शॉट की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, उसमें उनके इफेक्ट्स की जरूरत ही नहीं पड़ी.
यह भी कहा गया कि फिल्म का वेब स्विंगिंग वाला सीजीआई अब प्लेस्टेशन 2 कटसीन जैसा लगता है, लेकिन बिना डिजिटल इफेक्ट वाला यही शॉट 24 साल बाद भी लोग पोस्ट करते हैं. पूरे मामले का सार यही है कि सोनी जिस सीन को हटाना चाहती थी. सैम राइमी ने उसी को बचाकर रखा और आगे चलकर वही फिल्म के सबसे याद किए जाने वाले पलों में शामिल हो गया.
मोहित ग्रोवर