हैरी पॉटर 2.0: नॉस्टैल्जिया से हटकर, किताब के करीब! भूल जाएंगे धुरंधर की पीक डिटेलिंग

रीमेक के दौर में एक और रीमेक आया है. HBO अब हैरी पॉटर को वेब सीरीज़ के अंदाज़ में ला रहा है. मामला क्लियर है कि पहले जितनी किताबें थीं, उतनी फिल्में थीं. लेकिन अब उतनी वेब सीरीज़ आएंगी. ट्रेलर पर कई तरह के रिएक्शन हैं, लेकिन कमाल ये है कि ट्रेलर में विस्तार है और जिसे पीक डिटेलिंग कहते हैं इस बार वैसा ही मामला नज़र आ रहा है.

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हैरी पॉटर फिर से लौट रहा है. बचपन फिर से लौट रहा है, लेकिन इस बार मामला और भी विस्तार से है. हैरी पॉटर फिर से लौट रहा है. बचपन फिर से लौट रहा है, लेकिन इस बार मामला और भी विस्तार से है.

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:04 AM IST

मैंने हैरी पॉटर की सभी फिल्में देखी हैं. अंग्रेज़ी और हिन्दी दोनों में. लेकिन किताबें नहीं पढ़ीं. कई बार सोचा है कि पढ़ी जाए लेकिन हर बार टलता रहता है. हैरी पॉटर किताब की ललक एक बार फिर बढ़ गई है, उसका कारण है हैरी पॉटर वेब सीरीज़ का आया हुआ नया ट्रेलर.

एक दौर था जब किताबें पढ़े बिना भी हम किसी दुनिया के दीवाने हो सकते थे. हमारे लिए हैरी पॉटर का मतलब जे. के. रोलिंग के पन्नों की स्याही नहीं, बल्कि बड़े पर्दे पर डैनियल रेडक्लिफ का चश्मा, एमा वाटसन की एटीट्यूड भरी स्माइल और बैकग्राउंड में बजता वो आइकॉनिक हेडविग्स थीम म्यूजिक था.

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हममें से अधिकतर मिलेनियल इसी दौर की उपज हैं. हमने हॉगवर्ट्स की जादुई दुनिया को किताबों से कम, सिनेमाघर की बड़ी स्क्रीन और वीसीआर या सीडी प्लेयर पर घिस-घिस कर देखा है. यही वजह है कि जब भी हैरी पॉटर का नाम आता है, तो दिमाग में सबसे पहले 2001 में आई फिल्म की वही पुरानी तस्वीरें तैरने लगती हैं.

लेकिन अब वक्त बदल चुका है. HBO की नई हैरी पॉटर वेब सीरीज़ का ट्रेलर आ चुका है और इसके आते ही इंटरनेट पर एक बहस छिड़ गई है. एक तरफ वो लोग हैं जो नॉस्टेलजिया के चश्मे से इसे देख रहे हैं और हर सीन, हर किरदार का कम्पेरिजन सीधे पुरानी फिल्मों से कर रहे हैं. दूसरी तरफ वो लोग हैं जो चुपचाप मुस्कुरा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने किताबें पढ़ी हैं.

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इंसान का दिमाग पुरानी और सुखद यादों से बहुत मजबूती से चिपकता है. हमारे लिए 'हैरी पॉटर' केवल एक सिनेमाई फ्रेंचाइजी नहीं थी, वो हमारा बचपन था. हॉगवर्ट्स की चिट्ठी का इंतजार करना, प्लास्टिक की छड़ी लेकर विंगार्डियम लेवियोसा बोलना… ये सब हमारी यादों का हिस्सा हैं. क्यूंकि उस दुनिया को हमने बचपन से लेकर अब तक बार-बार जिया है. 

ऐसे में जब वेब सीरीज़ का ट्रेलर आया, तो बहुत से लोगों का सबसे पहला रिएक्शन ये ही था कि अरे, ये वाला डंबलडोर वैसा नहीं दिख रहा! या हेग्रिड की आवाज में वो पुरानी बात नहीं है. ऐसा रिएक्शन आना स्वाभाविक है. क्यूंकि हमने डैनियल रेडक्लिफ, रूपर्ट ग्रिंट और एमा वाटसन को अपनी आंखों के सामने बड़ा होते देखा है. उनकी जगह किसी और को देखना दिल को इतनी आसानी से स्वीकार नहीं होता.

लेकिन यहां ज़रा नॉस्टैल्जिया का चश्मा उतारकर थोड़ा एनालिटिकल होकर देखें, तो सच कुछ और ही नजर आता है.

सीधी सी बात है फिल्मों की अपनी एक सीमा होती है. 500-600 पन्नों की मोटी किताब को ढाई या तीन घंटे के सिनेमा में समेटना किसी भी डायरेक्टर के लिए आसान नहीं है. फिल्मों ने हमें एक शानदार विजुअल एक्सपीरियंस दिया, लेकिन इस चक्कर में किताब के दर्जनों किरदार, छोटी-छोटी साइड स्टोरीज़ और किरदारों का गहराई से इस्टेबलिश होना छूट गया. 

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'पेव्स द पोलटरगाइस्ट' जैसा मजेदार किरदार फिल्मों से पूरी तरह गायब था, रीटा स्कीटर का बीटल (कीड़ा) बनना या स्नेप की पुरानी यादों के कई अहम पन्ने फिल्मों में जगह ही नहीं पा सके. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि फिल्म खराब थी, या फिल्म ने सब बदल दिया. 

अब वेब सीरीज़ आ रही है. उसके पास सबसे बड़ी ताकत है… समय. जहां फिल्म के पास एक किताब खत्म करने के लिए केवल 3 घंटे थे, वहीं इस सीरीज़ के पास एक-एक सीजन में 8 से 9 घंटे का वक्त होगा. और यही वजह है कि यह ट्रेलर किताबों के बहुत ज्यादा करीब नजर आता है.

जिन्होंने जे. के. रोलिंग की किताबें पढ़ी हैं, उनके लिए यह सीरीज़ एक अलग ही खुशी लेकर आई है. किताब पढ़ने वाले फिल्म की शिकायत करते थे, फिल्म देखने वाले अब सीरीज़ की शिकायत कर रहे हैं. यही सर्कल है. अब एग्जाम्पल के लिए फिल्म के एक सीन में एक डरावने कैरेक्टर को देखकर हैरी, हरमाइनी और रॉन डरते हैं, लेकिन सीरीज़ के सेम सीन में इनके साथ एक चौथा कैरेक्टर भी है. 

अब फिल्म वालों को लग रहा है कि ये क्या गड़बड़ है, लेकिन जब आप किताब पढ़ेंगे तो आपको चौथा कैरेक्टर ( जो कि Neville का है) भी मिलेगा. ट्विटर पर एक बढ़िया कमेंट मिला कि फिल्म देखकर बड़े होने वाले जो लोग ये पूछ रहे हैं कि इसमें चौथा कैरेक्टर कैसे आ गया, यही असली रीजन है कि इस तरह की वेब सीरीज़ की ज़रूरत थी.

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इसलिए ट्रेलर देखकर तो इतना समझ आया है कि मामला इस बार विस्तार से है. अब काफी चीज़ें इस बात पर डिपेंड करती हैं कि सीरीज़ बनी कैसी है, मतलब एक्टिंग, डायरेक्शन और बाकी डिटेल्स.

जो लोग सिर्फ फिल्मों के फैन रहे हैं, उन्हें इस सीरीज़ को अपनाने में थोड़ा समय लग सकता है. लेकिन यहां लड़ाई फिल्म को भुलाने या नीचा दिखाने की नहीं है. ज़माना ओटीटी का है, लंबी-लंबी सीरीज़ का है तो अब इसका मज़ा लीजिए. इसमें कोई दिक्कत नहीं है. 

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