मार्वल फिल्मों के किसी दीवाने से बात करेंगे और पूछेंगे कि फेवरेट किरदार कौन है, तो अक्सर लोग आयरनमैन के अलावा जिस किरदार की बात करते हैं, वो कैप्टन अमेरिका है. स्टीव रोजर्स को मार्वल कॉमिक्स के सबसे अहम किरदारों में गिना गया, क्यूंकि वो सुपरहीरो तो हैं लेकिन उनकी नीति वही अमेरिकी फर्स्ट वाली है. सोचिए ये किरदार करीब 70 साल पुराना हो चला है, इसकी शुरुआत तब हुई जब सुपरहीरो कॉमिक्स का दौर तेजी से बढ़ रहा था और टाइमली कॉमिक्स, जो आगे चलकर मार्वल कॉमिक्स बनी, एक नया सुपरहीरो चाहती थी.
कैसे बना था कैप्टन अमेरिका का कैरेक्टर?
कैप्टन अमेरिका बनने का किस्सा भी मशहूर है. मार्वल पर लिखी गई किताब Marvel Comics The Untold Story में जो साइमन ने याद किया कि वह पूरी रात जागकर स्केच बना रहे थे. उनके मुताबिक उन्होंने चेनमेल वाला आर्मर जर्सी, उभरी हुई बांह और छाती की मसल्स, शरीर से चिपकी टाइट्स, ग्लव्स और घुटने के नीचे लहराते और मुड़े हुए बूट बनाए. उन्होंने छाती पर एक स्टार बनाया, बेल्ट से स्टार के नीचे की लाइन तक स्ट्राइप्स दिए, और कॉस्ट्यूम को लाल, सफेद और नीला रंग दिया. उन्होंने एक शील्ड भी जोड़ी. पेज के नीचे पहले 'सुपर अमेरिकन' लिखा गया, लेकिन बाद में नाम बदलकर 'कैप्टन अमेरिका' कर दिया गया. साइमन का कहना था कि बाजार में 'सुपर' शब्द वाले बहुत किरदार थे और 'कैप्टन अमेरिका' नाम ज्यादा बेहतर लगा.
ये भी ध्यान देना जरूरी है कि उस दौर में सुपरमैन, बैटमैन और दूसरे हीरो एलियंस, कॉस्ट्यूम वाले विलेन और बैंक लुटेरों से लड़ रहे थे, लेकिन टाइमली के किरदार द्वितीय विश्व युद्ध के असली दुश्मनों की तरफ बढ़ चुके थे. 1939 के आखिरी हफ्तों में सब मैरीनर ने न्यूयॉर्क तट के पास एक जर्मन यूबोट का सामना किया. इसके बाद मार्वल बॉय 'हिलर' नाम के तानाशाह से लड़ता दिखा.
कहा जाता था कि गुडमैन को डर था कि एडोल्फ मुकदमा कर सकता है. सब मैरीनर नाजी हमलावरों के खिलाफ एक फ्रेंच द्वीप के प्रतिरोध में भी शामिल हुआ. इसी बीच यूरोप में युद्ध तेज हो रहा था, फ्रांस गिर चुका था और दुनिया भर में नाजी राज फैलने का खतरा अमेरिकियों को साफ दिखने लगा था. क्यूंकि अब लड़ाई अमेरिका के दुश्मनों से हो रही थी तो कैप्टन अमेरिका नाम जंच भी रहा था.
20 दिसंबर 1940 को 'कैप्टन अमेरिका #1' न्यूजस्टैंड्स पर आया. इसमें स्टीव रोजर्स एक दुबला-पतला नौजवान था, जिसे सेना में भर्ती नहीं किया गया था, लेकिन एक एक्सपेरिमेंटल 'सुपर सोल्जर' सीरम ने उसे ताकतवर बना दिया. वह सुपरमैन की तरह बुलेटप्रूफ नहीं था, लेकिन उसके पास सितारों और धारियों वाली शील्ड थी, जो उसके देशभक्त कॉस्ट्यूम से मेल खाती थी. असली नाजियों की मौजूदगी को छोड़ दें, तो यह ढांचा एमएलजे मैगजीन्स के 'द शील्ड' से बहुत अलग नहीं था, लेकिन किर्बी की बदलते एंगल और तेज बहाव वाली आर्टवर्क ने इसे अलग पहचान दी.
इसी पहले अंक में स्टीव रोजर्स का हिटलर के चेहरे पर मुक्का मारने वाला दृश्य भी दिखा, जो उस समय बहुत साहसी कदम माना गया. पहले अंक के बाद कुछ हफ्तों तक साइमन और किर्बी को जान से मारने की धमकियां भी मिलीं. इसके बावजूद और विवाद के बीच यह अंक करीब 1 मिलियन प्रतियां बेच गया.
क्या सच में बन सकती है कैप्टन अमेरिका की शील्ड?
मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स में कैप्टन अमेरिका की शील्ड सबसे मशहूर हथियारों में गिनी जाती है. कॉमिक्स और फिल्मों की थ्योरी पढ़ेंगे तो ये वाइब्रैनियम नाम की दुर्लभ धातु से बनी है, जो ऊर्जा और वाइब्रेशन अपने भीतर सोख लेती है. लेकिन अगर साइंस का फंडा यहां लगाया जाए तो ऐसा कोई धातु धरती पर मौजूद नहीं है. वैज्ञानिकों के मुताबिक आज की तकनीक से टाइटेनियम और ग्राफीन के मेल से ऐसी ढाल बनाई जा सकती है जो काफी मजबूत हो, लेकिन फिल्मों की तरह झटके को पूरी तरह गायब नहीं कर सकती.
जहां तक शील्ड का सवाल है, विज्ञान इसकी कुछ हद तक बराबरी कर सकता है, लेकिन पूरी नहीं. ग्राफीन को दुनिया का सबसे मजबूत और हल्का मटेरियल माना जाता है और यह स्टील से 200 गुना ज्यादा मजबूत बताया गया है. अगर टाइटेनियम प्लेट्स पर ग्राफीन की परतें चढ़ाई जाएं तो ढाल बुलेटप्रूफ बन सकती है, लेकिन वाइब्रेशन को पूरी तरह सोख नहीं पाएगी. ऊर्जा संरक्षण के नियम के मुताबिक किसी भारी टक्कर का असर शील्ड पकड़ने वाले इंसान के हाथ तक जरूर पहुंचेगा. इस तरह कैप्टन अमेरिका की कहानी एक रात के स्केच से शुरू होकर युद्धकाल के बड़े प्रतीक तक पहुंचती है, जबकि उसकी मशहूर शील्ड आज भी कॉमिक्स, फिल्मों और विज्ञान की बहस का हिस्सा बनी हुई है.
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मोहित ग्रोवर