अभी कुछ दिन पहले ही भारत में स्पाइडरमैन रिलीज़ हुई. फिल्म भारत में करीब 500 करोड़ रुपये कमा चुकी है. इतना पैसा जितना भारतीय फिल्में कमाने का टारगेट रखती हैं, स्पाइडरमैन ने बताया है कि इंडिया में सुपरहीरो वाली फिल्मों की दीवानगी अभी भी है. स्पाइडरमैन भी एवेंजर्स का हिस्सा है, इसलिए मार्वल की बात करना ज़रूरी हो जाता है. मार्वल की पहचान आयरन मैन से भी बनी. आज जब भी हम मार्वल की 'आयरन मैन' फिल्म का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले एक्टर रॉबर्ट डाउनी जूनियर (RDJ) का चेहरा आता है.
टोनी स्टार्क का उनका स्टाइल, एटीट्यूड और बोलने का तरीका इस किरदार में इतना रच-बस गया है कि किसी और एक्टर की कल्पना करना भी नामुमकिन लगता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर 90 के दशक में चीज़ें थोड़ी अलग हुई होतीं, तो रॉबर्ट डाउनी जूनियर की जगह पर्दे पर टॉम क्रूज़ लोहे का सूट पहने नज़र आते?
बात 1990 के आसपास की है, जब मार्वल अपने किरदारों पर फिल्में बनाने के लिए हॉलीवुड स्टूडियोज़ से बात कर रहा था. उस दौर में 'मिशन इम्पॉसिबल' के स्टार टॉम क्रूज़ दुनिया के सबसे बड़े एक्शन हीरो थे. जब मार्वल ने टॉम क्रूज़ को 'टोनी स्टार्क' का रोल ऑफर किया, तो टॉम क्रूज़ ने इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाई. वे न सिर्फ फिल्म में काम करना चाहते थे, बल्कि इसे प्रोड्यूस भी करना चाहते थे.
लेकिन पेच यहां फंसा कि टॉम क्रूज़ फिल्म की पूरी कहानी और स्क्रिप्ट पर अपना पूरा कंट्रोल चाहते थे. वे चाहते थे कि आयरन मैन का हेलमेट ऐसा बनाया जाए जिससे उनका चेहरा हर समय साफ दिखता रहे. उस समय स्टूडियो और मार्वल उनके इस रवैये और शर्तों से सहमत नहीं हुए. मामला लंबे समय तक अटका रहा और आखिरकार टॉम क्रूज़ ने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ पीछे खींच लिए.
इसके कई सालों बाद 2006 में डायरेक्टर जॉन फेवरो ने रॉबर्ट डाउनी जूनियर को कास्ट करने का जोखिम उठाया, जो उस समय अपने निजी जीवन की समस्याओं से जूझ रहे थे. 2008 में जब 'आयरन मैन' रिलीज़ हुई, तो इसने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. टॉम क्रूज़ का फिल्म छोड़ने का वो फैसला मार्वल और रॉबर्ट डाउनी जूनियर दोनों के लिए एक लाइफ-चेंजिंग मोमेंट साबित हुआ.
मोहित ग्रोवर