मार्वल का फेमस कैरेक्टर है, स्पाइडरमैन. अभी इसकी जो लेटेस्ट फिल्म रिलीज हुई, उसमें टॉम होलैंड स्पाइडरमैन बने. रिपोर्ट्स कहती हैं कि उन्हें इस फिल्म के लिए 1000 करोड़ रुपये मिले, जिसमें उनकी फीस और प्रॉफिट शेयर शामिल है. अब सोचिए जो फिल्म सीरीज़ या कंपनी अपने एक एक्टर को 1000 करोड़ रुपये दे सकती है, वो कितनी अमीर और बड़ी कंपनी होगी. लेकिन अगर थोड़ा रिवाइंड में जाएंगे, तो मालूम पड़ेगा कि मार्वल हमेशा ऐसा नहीं था, बल्कि एक टाइम ऐसा था जब ये कंपनी पूरी तरह से बैंकक्रप्ट हो चुकी थी.
हुआ यूं कि 90's के दौर में एक वक्त ऐसा आया कि लोगों ने कॉमिक्स को लेकर एक सपना बेचना शुरू किया. सपना ये कि आज जो कॉमिक्स हमें कम दाम में मिलती हैं, कल को ये बढ़िया दाम में बिकेंगी. यानी एक तरह से किसी आर्ट कलेक्शन की तरह. मार्वल ने ऐसी डिमांड बाज़ार में देखी, फिर दाम बढ़ाए और बाद में कर्ज में डूब गई.
हालात इतने बिगड़े कि 'स्पाइडर-मैन', 'एक्स-मैन', 'फैंटास्टिक फोर', 'डेयरडेविल' और 'हल्क' जैसे बड़े किरदारों के फिल्मी राइट्स अलग-अलग स्टूडियो को देने पड़े. इसके बाद मार्वल ने उन्हीं किरदारों पर दांव लगाया जिन्हें उस वक्त कोई खरीदना नहीं चाहता था, जैसे 'आयरन मैन', 'कैप्टन अमेरिका' और 'थॉर'.
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कैसे बिगड़े थे मार्वल के हालात?
वैसे अमेरिकी वर्ल्ड में ये शौक 1980 के दशक तक ट्रेंड में आ गया था. गोल्डन एज कॉमिक्स के हजारों डॉलर में बिकने की खबरें चल रही थीं. पब्लिशर अलग-अलग कवर, फॉइल एम्बॉसिंग और चमकदार छपाई वाले संस्करण ला रहे थे, जिन्हें पाठक भी खरीद रहे थे और ऐसे लोग भी जो आगे मुनाफा कमाने के इरादे से कॉपियां जमा कर रहे थे. इसी दौर में कारोबारी रॉन पेरलमैन की नजर मार्वल पर पड़ी.
1989 की शुरुआत में उन्होंने न्यू वर्ल्ड पिक्चर्स से मार्वल एंटरटेनमेंट ग्रुप को $82.5 मिलियन में खरीदा. 2 साल के अंदर मार्वल शेयर बाजार में आ गया और इसके बाद उन्होंने टॉय बिज में हिस्सेदारी, दो ट्रेडिंग कार्ड कंपनियां, पनिनी स्टिकर्स और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी हीरोज वर्ल्ड समेत कई खरीदारी कीं, जिनकी कुल लागत रिपोर्ट के मुताबिक $700 मिलियन रही. मतलब मार्वल ने अचानक से अपने आप को कई तरह की मार्केट में खड़ा कर लिया था.
90 के दशक की शुरुआत में 'स्पाइडर-मैन' और 'एक्स-मेन' की बिक्री बहुत तेज थी. नई कॉमिक 'एक्स-फोर्स' का पहला अंक भी बड़े पैमाने पर बिका. इसके साथ पॉलीबैग में 5 अलग-अलग ट्रेडिंग कार्ड में से 1 कार्ड दिया गया था, इसलिए अगर किसी कलेक्टर को सभी 5 कार्ड चाहिए होते, तो उसे एक ही कॉमिक की कई कॉपियां खरीदनी पड़तीं. उस दौर को याद करते हुए कहा गया कि कुछ प्रशंसक 5 कॉपियां बंद हालत में रखते थे और छठी पढ़ने के लिए खरीदते थे.
फिर वही हुआ जिसकी चेतावनी दी गई थी. 1993 से 1996 के बीच कॉमिक्स और ट्रेडिंग कार्ड से होने वाली कमाई तेजी से गिरने लगी. 1993 में $35.75 पर पहुंचा कंपनी का शेयर 3 साल बाद $2.375 तक आ गया. तब मार्वल के चेयरमैन रहे स्कॉट सासा ने कहा था, 'जब कारोबार पलटा तो ऐसा लगा कि जो कुछ भी गलत हो सकता था, वह सब गलत हो गया.'
जब कंपनी ने फाइल की बैंकक्रप्सी
1995 आते-आते मार्वल पर भारी कर्ज चढ़ चुका था. नुकसान बढ़ने के बीच पेरलमैन ने मार्वल स्टूडियोज की शुरुआत की और योजना बनाई कि टॉय बिज के बाकी शेयर खरीदकर दोनों कंपनियों को मिलाया जाए, ताकि एक मजबूत इकाई बनाई जा सके और वर्षों से कानूनी विवादों में फंसे बड़े किरदारों को बड़े पर्दे पर लाया जा सके.
लेकिन शेयरधारकों ने इसका विरोध किया और कहा कि इससे मार्वल के शेयरों को और नुकसान होगा. इसके जवाब में पेरलमैन ने 1996 में चैप्टर 11 के तहत बैंकक्रप्सी के लिए अर्जी दे दी, जिससे उन्हें शेयरधारकों की मंजूरी के बिना कंपनी को फिर से व्यवस्थित करने की ताकत मिल सके.
इसके बाद करीब 2 साल तक सत्ता संघर्ष चला. शेयरधारक कार्ल आइकान ने पेरलमैन का विरोध करते हुए कहा, 'यह ऐसा है जैसे आपने किसी प्लंबर को कारोबार शुरू करने के लिए पैसा दिया, वह आकर आपका घर तोड़ दे और फिर कहे कि अब वह घर बिना कीमत के चाहता है.'
बोर्ड रूम की लड़ाई शांत होने के बाद मार्वल ने फिर फिल्म कारोबार पर ध्यान लगाया. इजरायल में जन्मे एवी एराड टॉय बिज में सीईओ तक पहुंचे थे और 1993 में मार्वल द्वारा कंपनी में 46 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने के बाद उन्हें 10 प्रतिशत हिस्सा मिला. शुरुआत में वह मार्वल के एक्शन फिगर संभालते थे, लेकिन बाद में उन्होंने स्टैन ली की जगह मार्वल फिल्म्स की कमान संभाली.
स्पाइडरमैन, हल्क को बेचना पड़ा
कर्ज और दबाव के बीच मार्वल ने अपने कई बड़े किरदारों के फिल्मी राइट्स बेच दिए. 'स्पाइडर-मैन' सोनी के पास गया. 'हल्क' के राइट्स यूनिवर्सल पिक्चर्स को दिए गए. 21 सेंचुरी फॉक्स ने 'डेयरडेविल', 'एक्स-मेन' और 'फैंटास्टिक फोर' के राइट्स ले लिए. इसके बाद मार्वल स्टूडियोज के पास अपने सबसे कमाऊ किरदारों के फिल्मी राइट्स नहीं बचे. मार्वल को फिल्मों से बहुत कमाई की उम्मीद नहीं थी, लेकिन उन्हें लगता था कि ये खिलौनों का शानदार प्रचार बनेंगी. सवाल यह नहीं था कि बच्चे बड़े पर्दे पर किसे देखना चाहेंगे, बल्कि यह था कि वे किस एक्शन फिगर के साथ खेलना चाहेंगे. जवाब 'आयरन मैन' था.
2007 में केविन फाइगी को मार्वल का प्रोडक्शन प्रमुख बनाया गया और कंपनी ने इसी रणनीति पर और जोर दिया. 2008 में परमाउंट ने 'आयरन मैन' रिलीज की. यही वह फिल्म थी, जिसके बारे में पहले सवाल उठते थे कि इस पर फिल्म देखने कौन आएगा. बाद में यही फिल्म $318.4 मिलियन घरेलू कमाई और $585.2 मिलियन दुनिया भर की कमाई तक पहुंची.
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फाइगी ने कहा था कि सब कुछ कॉमिक्स से शुरू होता है, पन्ने दीवारों पर लगाए जाते हैं और वही बड़ी फिल्मों को हकीकत में बदलने के लिए राह दिखाते हैं. इस एक फिल्म की कामयाबी ने मार्वल को बर्बादी से बाहर निकाला और 2009 में डिज्नी ने मार्वल को $4 बिलियन में खरीद लिया.
इसके बाद मार्वल ने कई फिल्मों और कई सुपरहीरो वाले जुड़े हुए संसार पर काम तेज किया. बॉक्स ऑफिस मोजो के आंकड़ों के मुताबिक 10 साल और 19 प्रोजेक्ट तक फैले इस फिल्म संसार ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर $6 बिलियन और दुनिया भर में करीब $15 बिलियन कमाए.
मोहित ग्रोवर