द वन के 'छठ गीत' में सुनाई दी शारदा सिन्हा की आवाज, इमोशनल हुए फैंस

'बिहार कोकिला' के नाम से मशहूर शारदा सिन्हा ने छठ पूजा के यादगार गीत दिए हैं. इनमें से एक गीत हाल ही में रिलीज हुई माइथोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म 'द वन' (The Vvaan) में शामिल किया गया है.

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शारदा सिन्हा की सुनाई दी आवाज (Photo: ITG/x/@balajimotionpic) शारदा सिन्हा की सुनाई दी आवाज (Photo: ITG/x/@balajimotionpic)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​और तमन्ना भाटिया की फिल्म 'द वन' (The Vvaan) की कहानी 'देवांचल' नाम के एक काल्पनिक गांव में छठ पूजा के माहौल पर आधारित है. मुख्यधारा का सिनेमा शायद ही पहले कभी छठ पूजा की रस्मों को दिखाता था, जबकि यह पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. अब 'द वन' में छठी मैया का एक खास गाना तो है ही, साथ ही इसमें छठ पूजा के हर जश्न का एक अहम और जरूरी हिस्सा भी दिखाया गया है. इस फिल्म में 'बिहार कोकिला' के नाम से मशहूर शारदा सिन्हा को सम्मान दिया गया है.

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सिन्हा का मशहूर छठ गीत 'पहिले पहिल हम कईनी', 'द वन' के पहले पार्ट में बजता है. ऋषि (सिद्धार्थ) और ममता (तमन्ना) त्योहार मनाने के लिए देवांचल में अपने गांव लौटते हैं. तैयारियां जल्दी शुरू हो जाती हैं और घर की महिलाएं, जिनमें ऋषि की भाभी (श्वेता तिवारी) भी शामिल हैं, ठेकुआ जैसे पारंपरिक पकवान बनाती हैं. इस दौरान बैकग्राउंड में यह गाना बजता है.

छठ गीत पर आ रहे रिएक्शन
'द वन' में शारदा सिन्हा का गाना 'पहिले पहिल हम कईनी' शामिल किए जाने पर लोगों ने जबरदस्त उत्साह है, साथ ही सब इमोशनल भी हुए हैं.  इंस्टाग्राम पर एक यूज़र ने लिखा, 'थिएटर में मां शारदा को सुनना कितना शानदार अनुभव है.' इसके अलावा लोग काफी इमोशनल हो रहे हैं.

शारदा सिन्हा के बारे में
शारदा सिन्हा का 5 नवंबर, 2024 को 72 साल की उम्र में एम्स (AIIMS) नई दिल्ली में निधन हो गया था. उनकी मौत सेप्टिसीमिया के कारण हुए रिफ्रैक्टरी शॉक (refractory shock) से हुई थी. उन्हें पद्म श्री (1991) और पद्म भूषण (2018) से सम्मानित किया गया था, और 2025 में मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया गया.

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फिल्म 'द वन' के बारे में
'द वन' कहानी है ऋषि कुमार (सिद्धार्थ मल्होत्रा) की, जो देवांचल के रहने वाले हैं लेकिन अपनी पत्नी ममता (तमन्ना भाटिया) के साथ मुंबई में रहते हैं. वह एक बिल्डर हैं और ममता एक स्कूल टीचर हैं. वे बच्चा चाहते हैं, लेकिन कोशिशें नाकाम रही हैं. ऋषि को लोन मिलने का इंतजार है ताकि वे IVF करवा सकें. इसी बीच, उन्हें देवांचल में अपनी पारिवारिक जमीन के बारे में एक नोटिस मिलता है. ऋषि उस जमीन को बेचकर IVF का खर्च उठाने का प्लान बनाते हैं. वे छठ पूजा के लिए गांव लौटते हैं.

लेकिन, त्योहार शुरू होने से पहले ही, मनाही वाले 'देव वन' में अजीब घटनाएं होने लगती हैं. जब खतरा उनके दरवाजे तक पहुंचता है, तो ऋषि इन घटनाओं की जांच करने निकलते हैं. नास्तिक होने के नाते, वह परंपराओं पर सवाल उठाते हैं और उन्हें एक पुराने दुखद हादसे के लिए जिम्मेदार मानते हैं, जिसे बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल सुविधाओं से टाला जा सकता था.
 

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