अली फजल की क्राइम बेस्ड वेब सीरीज राख हम सभी ने देखी. उसके खतरनाक विलेन बाबू और रज्जो ने सबकी नींद उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. ये शो एक खतरनाक क्राइम केस रंगा और बिल्ला पर आधारित था, जिसमें मास्टर-माइंड बाबू का रोल आकाश मखीजा ने प्ले किया था. हाल ही में उन्हें इसके लिए खूब सारी तारीफ मिली. इस अचानक मिले फेम के बाद, आकाश की जिंदगी में क्या बदलाव आए? इसके बारे में उन्होंने आजतक डॉट इन से एक्सक्लूसिव बातचीत की.
राख सीरीज ने क्या बदला?
राख में बाबू का किरदार निभाने के बाद आकाश को बहुत पहचान मिली. हालांकि उनके लिए ज्यादा कुछ नहीं बदला. आकाश ने कहा- राख से पहले भी मैं काम तो कर ही रहा था. पिछले 13-14 साल में मैं हमेशा एक वर्किंग एक्टर रहा हूं. मैंने जो भी काम किया, फिर वो चाहे टीवी सीरियल हो, कोई एपिसोडिक शो हो, क्राइम पेट्रोल हो, ग्राम चिकित्सालय हो या फिर ऐड्स.
'मैंने निर्मल पाठक की घर वापसी शो भी किया था और भूल चूक माफ फिल्म में राजकुमार राव के साथ काम किया. बस फर्क इतना है कि जब कोई शो चलता है और उसकी बहुत ज्यादा बात होती है, तो आपके पहले के शोज की भी चर्चा होने लगती है. फिर लोग आपके पुराने काम भी देखते हैं और सोचते हैं कि बताओ, ये एक्टर तो पहले भी यही था और आज भी वही है.
लेकिन जिस चीज से आप फेमस होते हैं या जिस काम के लिए आपको सराहा जाता है, वो आपकी पहचान बन जाती है. फिर लोग आपको कहते हैं—अरे, वो राख वाला एक्टर. हालांकि अब ऐसा होने लगा है कि लोग मुझे कमर्शियल तरीके से भी जानने लगे हैं. इंडस्ट्री में भी काफी ज्यादा तारीफ मिल रहा है और बहुत सारे कॉल्स आ रहे हैं. शो के बाद मुझे लगता है कि एक्टर तो मैं आज भी वही हूं, जो पहले था. बस फर्क इतना है कि अब मेरे पास एक नाम जुड़ चुका है.'
राख के बाद मिल रहे नए मौके
आकाश आगे कहते हैं कि अब राख सीरीज के बाद उनकी जिंदगी में एक नई रेस शुरू हुई है. उन्होंने कहा- मुझे लगता है कि हम अपनी जिंदगी में जिस भी स्टेज पर होते हैं, हमारी रेस बदलती रहती है. पहले एक रेस होती है कि कोई ऑडिशन मिल जाए, कुछ काम मिल जाए. अब इस रेस में आने के बाद लगता है कि और अच्छी स्क्रिप्ट्स आएं. मुझे लगता है कि बड़े से बड़े एक्टर की भी रेस बदलती रहती है. रेस कभी खत्म नहीं होती.
कैसे मिला खतरनाक 'बाबू' का रोल?
राख सीरीज के लिए आकाश मखीजा मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे. उन्हें 800 लोगों के साथ ऑडिशन में उतरना पड़ा था. इतने लोगों में उन्हें बाबू का रोल कैसे मिला? इसपर उन्होंने खुलकर बात की. आकाश ने कहा- मैं ग्राम चिकित्सालय सीजन 1 के सेट पर था, जब मुझे राख के लिए कास्टिंग एजेंसी से कॉल आया था. उन्होंने कहा कि एक शो बन रहा है, जो एक केस पर आधारित है. उन्होंने ‘रंगा-बिल्ला’ का जिक्र किया था, लेकिन साफ कहा था कि हम कहीं से भी रंगा-बिल्ला नहीं दिखा रहे हैं. बस उस घटना से प्रेरित कहानी है और आठ एपिसोड का शो है.
'उन्होंने कहा कि इस किरदार के लिए हम आपका ऑडिशन करना चाहते हैं. मैं मुंबई पहुंचा और मैंने ऑडिशन दिया. उसके बाद दो-तीन महीने तक कोई कॉल नहीं आया. मैंने दिसंबर में ऑडिशन दिया था और फिर फरवरी में कॉल आया कि आप शॉर्टलिस्टेड हैं. जितने भी एक्टर्स शॉर्टलिस्ट हुए हैं, उन सभी को हमने बुलाया है. अब एक वर्कशॉप होगी और उसके बाद फिर ऑडिशन होगा. जो 14 लोग बाबू के किरदार के लिए शॉर्टलिस्ट हुए थे, वो सभी बेहतरीन एक्टर्स थे.'
'बाबू' के लिए ढूंढा गया नया चेहरा
आकाश का कहना था कि उन 14 लोगों में से कोई भी जाना-पहचाना चेहरा नहीं था, जिसने बाबू के रोल के लिए ऑडिशन दिया. इसका कारण उन्होंने ये बताया कि मेकर्स एक नया चेहरा चाहते थे, जिसे पहले ज्यादा नहीं देखा गया. आकाश ने कहा- वो लोग बहुत पर्टिकुलर थे कि हमें ऐसा चेहरा चाहिए, जिसे पहले ज्यादा ना देखा गया हो. हमारे डायरेक्टर प्रोसित (रॉय) सर के दिमाग में भी एक खास तरह का चेहरा था. फिर एक वर्कशॉप हुई और उसमें सारे एक्टर्स थे.
'मैं हालांकि मराठी नहीं हूं. मैं सिंधी हूं और जो किरदार है, बाबू, वो मराठी है. इसलिए भाषा मेरे लिए एक चुनौती थी. मुझे मराठी थोड़ी-बहुत समझ आती है और मैं थोड़ी-बहुत बोल भी लेता हूं, लेकिन फ्लुएंट नहीं हूं. फिर वो वर्कशॉप हुई और उसके बाद तीन लोग फाइनल शॉर्टलिस्ट हुए. उसमें से फिर मुझे कह दिया गया कि आपका नहीं हुआ. कोई और एक्टर था, जो उस टीम में से कास्ट हो चुका था. फिर मुझे नहीं पता कि क्या हुआ. उसके बाद मुझे दोबारा मिलने के लिए बुलाया गया. फिर टीम के साथ करीब तीन घंटे तक मीटिंग हुई और आखिरकार मुझे कास्ट कर लिया गया.'
आकाश ने आगे बताया- मैं शायद इस कास्ट में सबसे आखिर में शामिल हुआ था. मुझे नहीं पता था कि इसमें अली फजल हैं, सोनाली बेंद्रे हैं या राकेश भी हैं. जिस दिन हम बैठकर रीडिंग शुरू करने वाले थे, उसी दिन मुझे पता चला कि ये सारे एक्टर्स शो का हिस्सा हैं. उसी दिन मुझे ये भी पता चला कि शो में क्या-क्या है. उससे पहले मेरे पास पूरी स्क्रिप्ट भी नहीं थी. मेरे पास सिर्फ वो दो ऑडिशन सीन्स थे. इसलिए मेरे लिए तो सब कुछ उसी वक्त सामने खुल रहा था. शुरुआत में मैं थोड़ा डरा-डरा सा पढ़ रहा था. मुझे लग रहा था कि पता नहीं मुझे क्या-क्या करना पड़ेगा.
कैसे बाबू-गोबिंद के रोल में खुद को ढाला?
आकाश मखीजा ने हाल ही में दो बड़े किरदार बाबू और गोबिंद का रोल निभाया था, जिसके लिए उन्होंने अपनी भाषा पर बड़ा काम किया. जितनी आसानी से उन्होंने खुद को उसमें ढाला, वो उनके लिए आसान नहीं था. इसके पीछे उनकी बड़ी मेहनत रही. आकाश ने दोनों किरदार पर अपनी भाषा में पकड़ पर कहा- मेरे लिए भी आसान नहीं है, शायद किसी के लिए भी आसान नहीं है. उस पर मेहनत करनी पड़ती है. आनंदेश्वर द्विवेदी, जो ग्राम चिकित्सालय में फूटानी का किरदार निभा रहे हैं, वो तो खैर बिहार से ही हैं.
'लेकिन मैंने एक शो किया था निर्मल पाठक की घर वापसी. उसमें भी मैंने बिहारी भाषा बोली थी. देखा जाए तो वो मेरी ओटीटी में एंट्री थी. राहुल पांडेय, जिन्होंने वो शो बनाया था और जो ‘ग्राम चिकित्सालय’ सीजन 1 के भी डायरेक्टर रहे हैं, उन्होंने मुझे पहली बार ये मौका दिया था कि एक मुंबई के अर्बन लड़के को बिहारी किरदार दिया जाए. और मेरा नसीब अच्छा है कि मैं राजू श्रीवास्तव का बहुत बड़ा फैन था. उनके गजोधर भैया वाले सारे स्टैंड-अप मैं रटकर स्कूल में करके दिखाता था. तो मेरी बिहारी डाइलेक्ट कहीं ना कहीं वहीं से शुरू हुई थी. फिर मैंने एक फिल्म की थी हाफ गर्लफ्रेंड, जो 2016 में शूट हुई थी. उसमें भी मैं एक बिहारी बॉय का किरदार निभा रहा था.'
आकाश ने आगे कहा- इसके अलावा आज के दौर में जब आप जितनी भी कहानियां देखते हैं, वो लैंग्वेज-बेस्ड ही बनती हैं. तो एक एक्टर के तौर पर अगर आपको इस इंडस्ट्री में सर्वाइव करना है, तो मुझे लगता है कि आपको डाइलेक्ट का ज्ञान होना बहुत जरूरी है. इसलिए मैंने उस पर बहुत मेहनत की और मैं बहुत खुश हूं कि आप बता रहे हैं कि आपको पता ही नहीं चला कि मैं उस जगह का नहीं हूं.
'बस यही कोशिश थी कि अगर आपने कहीं पर भी थोड़ी-सी गलत भाषा का इस्तेमाल कर लिया, तो उस बेल्ट के लोग तुरंत पकड़ लेते हैं कि ये व्यक्ति वहां का नहीं है. इसलिए मैंने उस पर काफी मेहनत की और मैं शुक्रगुजार हूं कि वो अच्छी तरह हो पाया. चाहे वो ‘राख’ में बाबू का मराठी डाइलेक्ट हो या ‘ग्राम चिकित्सालय’ में बिहारी. मैं बहुत खुश हूं कि लोगों को ये रेंज दिखाई दे रही है और जो तारीफ मिल रहा है, उससे एक एक्टर के तौर पर मैं बहुत खुश हूं.'
राख में कोई सीन करते वक्त आई घिन?
राख सीरीज में बाबू और रज्जो के किरदार जो क्राइम करते हैं, उसके बारे में सोचकर शायद किसी को भी घिन आ जाए. लेकिन आकाश मखीजा ने वो सीन्स किस तरह शूट किए? इसपर उन्होंने खुलकर बात की. एक्टर ने बताया- पिछले 14 साल से मैं काम कर रहा हूं, तो मुझे ये अनुभव है कि एक्टिंग एक ऐसी चीज है, जिसमें आपको पता होता है कि आप एक्टिंग कर रहे हैं. आपको पता है कि ये एक्टिंग हो रही है. फिर भी आपको अपने किरदार के लिए उसे रियल फील करना पड़ता है. जैसे मुझे घिन भी आती है, मुझे लगता भी है कि ये गलत है, लेकिन एक एक्टर के तौर पर इतने साल काम करने के बाद मुझे ये समझ है कि ठीक है, ये एक्टिंग है.
'अगर एक कैरेक्टर के तौर पर मैं ये सोचने लग जाऊं कि नहीं, नहीं, ये तो बहुत गलत है, तो मैं उस किरदार को 100 प्रतिशत कैसे दे पाऊंगा? राख में कार के अंदर जो लास्ट एपिसोड वाला सीन था, जिसमें हम चारों अंदर होते हैं—आपने तो वो एक बार स्क्रीन पर देखा है, हमने पता नहीं कितने एंगल्स में वो सीन कितनी बार किया है. कार के अंदर चीखना, चिल्लाना, बार-बार वायलेंस करना, बाल खींचना, मारना—बतौर आकाश, बतौर एक इंसान, आपको बुरा लगता है. आपको लगता है कि यार, ये क्या हो रहा है? लेकिन जब मैं वो परफॉर्म कर रहा था, उस वक्त मैं ये सब नहीं सोच रहा था.'
आकाश ने कहा कि उस सीन के दौरान सेट पर बहुत प्रोफेशनल सेटअप था. एक्शन डायरेक्टर, चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट जैसे लोग सेट पर थे और पूरी टीम बहुत प्रोफेशनल थी. उन्हें पता था कि वो सेफ हैं और ऐसा कुछ नहीं है, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचे. एक एक्टर के तौर पर उन्होंने उस वक्त वही सोचा कि अभी वो एक किरदार प्ले कर रहे हैं. इसलिए उस वक्त वो कहीं पर भी ये नहीं सोच रहे थे कि जो वो कर रहे हैं, वो गलत है या ये क्या हो रहा है. क्योंकि अगर वो सोचने लग गए कि तो फिर वो उस किरदार में पूरा एफर्ट नहीं डाल पाएंगे.
बाबू को मिल रही सराहना पर क्या बोले आकाश?
प्यार तो बतौर एक अच्छे इंसान के तौर पर नहीं मिला. मेरी परफॉर्मेंस को सराहा गया कि ये बहुत अच्छी परफॉर्मेंस थी. मुझे लगता है कि लोग बहुत समझदार हो गए हैं. आजकल पहले के समय जैसा नहीं है कि विलेन कोई है तो उसे रियल लाइफ में भी उसी नजर से देखा जाए. हालांकि अभी भी बहुत लोग मुझे इंस्टाग्राम पर गालियां देते हैं, लेकिन मेरे हिसाब से लोग अब जानते हैं कि ये सिनेमा है. हम बहुत आगे निकल चुके हैं.
आज ओटीटी का दौर है और हम वर्ल्ड सिनेमा फॉलो करते हैं. हमने गेम ऑफ थ्रोन्स, ब्रेकिंग बैड देखा है. सिर्फ यूएस के शोज ही नहीं, आजकल वर्ल्डवाइड सिनेमा चल रहा है. हम स्क्विड गेम जैसे कोरियन शोज भी देखते हैं. तो लोगों को अब समझ है कि ये एक्टर्स हैं और ये सिर्फ अपना किरदार निभा रहे हैं. इसलिए मेरी परफॉर्मेंस को सराहा गया, तो मैं उसके लिए बहुत खुश हूं. बाकी जो हेट मेरी तरफ आ रहा है, उसे भी मैं एक तरह की तारीफ ही मानता हूं. शुरुआत में मुझे थोड़ा लग रहा था कि यार, ये बहुत डार्क है. लेकिन बतौर एक्टर आपको खुशी होती है कि किसी डायरेक्टर या प्रोड्यूसर ने इतना बड़ा किरदार आपके कंधों पर डाला और उन्हें लगा कि आप इसे कर सकते हैं.
किन एक्टर्स के फैन हैं आकाश मखीजा?
आकाश मखीजा ने इसी बातचीत में अपने फेवरेट एक्टर्स का भी खुलासा किया. उन्होंने राजकुमार राव और परेश रावल जैसे कलाकारों का नाम लिया. आकाश ने कहा कि वो परेश रावल संग काम करना चाहते हैं. उन्हें हेरा फेरी में उनका बाबू राव का किरदार बेहद पसंद आया था. वहीं राजकुमार के साथ उन्होंने भूल चूक माफ फिल्म में काम किया, जिनसे उन्होंने सेट पर काफी कुछ सीखा. राजकुमार राव ने एक्टर को शाहिद और ट्रैप्ड जैसी फिल्मों के जरिए प्रेरित किया था.
आकाश ने राजकुमार को लेकर बात कही- राख देखने के बाद उनका कॉल आया था. उन्होंने मेरी बहुत तारीफ की और मैं बहुत खुश हूं कि वो हमारी दुनिया के आज के सबसे बड़े और बेहतरीन एक्टर्स में से एक हैं. मैं सिर्फ इंडिया के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में उन्हें वन ऑफ द बेस्ट एक्टर्स मानता हूं. उन्होंने मुझे काफी इंस्पायर किया है.
राजकुमार राव से क्या मिली सीख?
आकाश ने आगे भूल चूक माफ फिल्म में राजकुमार से मिली सीख का जिक्र किया. उन्होंने बताया- राजकुमार राव के बारे में जो सबसे अच्छी चीज है कि उन्हें सिर्फ अपने कैरेक्टर के बारे में नहीं, बल्कि पूरी स्क्रिप्ट की समझ होती है. कई बार क्या होता है कि एक्टर सिर्फ अपना पार्ट बहुत अच्छे से कर लेता है. लेकिन वो पूरी स्क्रिप्ट अच्छे से पढ़कर आते हैं. अगर आज कोई सीन चल रहा है, तो उन्हें अपने कैरेक्टर का आर्क भी पता है और स्क्रिप्ट की बारीकियां भी पता हैं.
जब आपको सिर्फ अपने कैरेक्टर की नहीं, बल्कि पूरी कहानी की समझ होती है, तो आप एक बहुत समझदार एक्टर होते हैं. तो उनसे मैंने ये सीखा कि सिर्फ अपने किरदार के बारे में पढ़ने के बजाय पूरी स्क्रिप्ट को पढ़ने और समझने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे आप पूरी कहानी में जानकार रहें. इसीलिए कहा जाता है कि एक्टर को फिल्म मेकिंग की भी समझ होनी चाहिए, क्योंकि ये एक विजुअल मीडियम है. डायरेक्टर क्या कहना चाहता है, आपका इमेजिनेशन उसके साथ मैच करना चाहिए. तभी आप वो दे पाएंगे, जो डायरेक्टर आपसे चाहता है.
आकाश मखीजा के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स
अंत में आकाश मखीजा ने अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बात की. उन्होंने ग्राम चिकित्सालय का सीजन 3 अनाउंस किया, जिसकी शूटिंग वो जल्द शुरू करेंगे. उन्हें उम्मीद है कि ग्राम चिकित्सालय 3 इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगी. इसके अलावा वो एक और प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जिसकी शूटिंग सितंबर-अक्टूबर में होनी है. आकाश ने ये प्रोजेक्ट की और जानकारी नहीं दी, क्योंकि इसे ऑफिशियली अनाउंस नहीं किया गया है.
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