मुकेश खन्ना हमेशा से सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे हैं. अब उन्होंने शर्मिला टैगोर के वंदे मातरम बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. आइए जानते हैं कि शर्मिला टैगोर को लेकर उन्होंने क्या कहा.
शर्मिला टैगोर पर भड़के मुकेश खन्ना
The Free Press Journal संग बातचीत में उन्होंने शर्मिला टैगोर के बयान पर कहा- आखिर दूसरे धर्मों को लेकर चिंताएं वंदे मातरम को देखने के नजरिए को क्यों प्रभावित करें. वो अपनी समझ के हिसाब से बोल रही हैं. मुझे नहीं पता उन्होंने ऐसा क्यों कहा. शायद अपना पक्ष समझाते-समझाते उन्होंने ये कह दिया कि दूसरे धर्म के लोग इसे समझ या स्वीकार नहीं करेंगे.
फिर मुकेश ने शर्मिला की पटौदी परिवार में शादी का जिक्र किया और उन्हें "आयशा बेगम" कहते हुए उनके रुख पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "क्या आपको शादी के बाद ही एहसास हुआ कि इस्लाम भी है? जब आप बेगम बनीं, क्या तब आपको एहसास हुआ कि मुसलमान अलग धर्म मानते हैं? आपने शादी के लिए आयशा बेगम बनना स्वीकार किया, लेकिन आज आप आयशा बेगम बनकर बोल रही हैं. मुझे हैरानी है कि पूरी जिंदगी हिंदू धर्म के साथ रहने के बाद अचानक आपको दूसरे धर्मों की चिंता होने लगी."
"आप बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां काली पूजा इतने बड़े पैमाने पर मनाई जाती है. आप बंगाली संस्कृति और बंगाली फिल्मों के बीच बड़ी हुई हैं. फिर अब अचानक आपको क्यों लग रहा है कि दूसरे धर्म के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे?
'एक हैं भगवान'
मुकेश खन्ना ने कहा कि हमारे यहां 33 करोड़ देवी-देवता हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि 33 करोड़ भगवान हैं. एक ही भगवान है, जो निराकार है, बिना रूप का है. एक भक्त उस भगवान को हनुमान, शिव, राम या कृष्ण में देख सकता है. वे भगवान के अवतार हैं. वे हर युग में आते हैं. अगर भगवान मेरे सामने आएंगे, तो शायद शिव के रूप में आएंगे, क्योंकि मैं उसी रूप में मानता हूं, जो कृष्ण को मानता है, उनके लिए वे कृष्ण के रूप में आ सकते हैं.
मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम बहस पर लौटे और दावा किया कि इतिहास में मुस्लिम समुदाय के कुछ तबकों का इस गीत पर विरोध सिर्फ इसके बाद के छंदों में हिंदू देवताओं के जिक्र तक सीमित नहीं था. आपात्ति ये भी थी कि वो सिर्फ खुदा के आगे सिर झुकाते थे और किसी के सामने नहीं झुकेंगे. उन्होंने वंदे मातरम के अलग-अलग संगीत संस्करणों का भी जिक्र किया, जिनमें लता मंगेशकर, हेमंत कुमार और ए.आर. रहमान से जुड़े वर्जन शामिल हैं. उन्होंने रहमान के 'मां तुझे सलाम' का हवाला दिया और कहा कि इस गीत में भी मातृभूमि को सलाम करने का भाव है. मुकेश ने कहा, "वे कहते हैं 'मां तुझे सलाम'. वे उसे मां कह रहे हैं और सलाम कर रहे हैं."
एक्टर का कहना था कि भारत में रहने वाले लोगों को देश और उसके राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए, हालांकि उनका तर्क था कि किसी को शारीरिक रूप से झुकने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क