मुंबई के अंडरवर्ल्ड से UP के 'क्राइम यूनिवर्स' तक, OTT पर क्यों छाया पूर्वांचल का भौकाल?

सिनेमाघरों में इस समय मिर्जापुर द मूवी जमकर तगड़ा कलेक्शन कर रही है. ओटीटी की दुनिया में अपनी छाप छोड़ने के बाद अब ये बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली पहली फिल्म है. लेकिन ये सिनेमाघरों तक पहुंची कैसे?

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यूपी कैसे बना क्राइम यूनिवर्स? (Photo: IMDb) यूपी कैसे बना क्राइम यूनिवर्स? (Photo: IMDb)

शिखर नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:14 PM IST

एक दौर था जब भारतीय सिनेमा में 'क्राइम' का मतलब सिर्फ मुंबई का अंडरवर्ल्ड, मायानगरी की गलियां या फिर विदेशों में फैले किसी माफिया का नेटवर्क हुआ करता था. लेकिन इंटरनेट के आने और OTT प्लेटफॉर्म्स के तेजी से पैर पसारने के बाद क्राइम यूनिवर्स भी बदल गया है. स्क्रीन पर चमक-दमक वाली दुनिया से इतर ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं, जो जमीन से जुड़ी हैं, जिनकी मिट्टी में बारूद की गंध के साथ-साथ सत्ता और सियासत की गूंज भी सुनाई दे रही है.

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इस मोड़ पर उत्तर प्रदेश का सामाजिक-राजनीतिक माहौल फिल्म मेकर्स के लिए कमाई का जरिया बन गया है. आज आलम यह है कि पूर्वांचल के कट्टों से लेकर मुजफ्फरनगर की खाकी तक, UP का यह 'क्राइम यूनिवर्स' दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है. इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि हाल ही में जब OTT से निकलकर 'मिर्जापुर' बड़े पर्दे यानी सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो इसने महज चार दिनों के भीतर ही 130 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड कमाई करके इतिहास रच दिया.

सत्ता, सियासत और पूर्वांचल की वर्चस्व जंग

उत्तर प्रदेश को OTT के नक्शे पर सबसे मजबूती से स्थापित करने का श्रेय 'मिर्जापुर' सीरीज को ही जाता है. पूर्वांचल के बैकड्रॉप पर बनी इस वेब सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे नेपाल सीमा से सटे गोरखपुर और आसपास के इलाकों में अवैध हथियारों और तस्करी का काला कारोबार चलता है. कहानी केवल अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें यह साफ नजर आता है कि सत्ता पाने के लिए बाहुबली और राजनेता एक-दूसरे का कैसे इस्तेमाल करते हैं.

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मिर्जापुर और जौनपुर की गलियों में कालीन भैया के एकाधिकार से लेकर गुड्डू पंडित के खूनी संघर्ष की यह दास्तान इतनी लोकप्रिय हुई कि इसके तीन सफल सीजन आ चुके हैं और अब यह फ्रेंचाइजी थिएटर्स में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है.

भौकाल

पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर को एक समय अपराध का गढ़ माना जाता था. इसी दौर और माहौल को केंद्र में रखकर बनाई गई सीरीज 'भौकाल' वास्तविक घटनाओं पर आधारित है. यह कहानी IPS अधिकारी नवनीत सिकेरा के जीवन और उनके द्वारा मुजफ्फरनगर में किए गए क्राइम-कंट्रोल ऑपरेशन्स पर टिकी है.

एक्टर मोहित रैना ने इसमें नवनीत सिकेरा का मुख्य किरदार निभाया है. सीरीज में बखूबी दिखाया गया है कि कैसे एक जाबांज पुलिस अफसर स्थानीय गैंगस्टर्स और उनके फैलाए खौफ के साम्राज्य को नेस्तनाबूद करता है. इसके अब तक दो सीजन दर्शकों के सामने आ चुके हैं.

रंगबाज

ZEE5 की चर्चित सीरीज 'रंगबाज' 90 के दशक के उस खौफनाक दौर की याद दिलाती है, जब राज्य में ठेकेदारी, रंगदारी और सुपारी किलिंग का बोलबाला था. यह कहानी पूर्वांचल के कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला के जीवन से प्रेरित है, जिसका किरदार साकिब सलीम ने निभाया है. सीरीज इस कड़वे सच को उजागर करती है कि कैसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए नेता अपराधियों को संरक्षण देते हैं और वही अपराधी आगे चलकर मंत्रियों और विधायकों तक की हत्या करने से नहीं हिचकिचाते. 'रंगबाज' के अब तक चार सीजन रिलीज किए जा चुके हैं.

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रक्तांचल

पूर्वांचल में ठेकेदारी और रंगदारी पर कब्जे की जंग को 'रक्तांचल' सीरीज में बेहद करीब से दिखाया गया है. हालांकि मेकर्स ने कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन इसकी कहानी काफी हद तक बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बीच चली दशकों पुरानी गैंगवार से मिलती-जुलती नजर आती है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक पढ़ा-लिखा नौजवान निजी बदले की आग में जरायम की दुनिया में कदम रखता है और फिर देखते ही देखते पूर्वांचल का सबसे बड़ा माफिया बनकर उभरता है. इस सीरीज के अब तक तीन सीजन सामने आ चुके हैं.

पाताल लोक

अमेजन प्राइम की सुपरहिट थ्रिलर 'पाताल लोक' की जड़ें भी आखिर में उत्तर प्रदेश से ही जुड़ती हैं. सीरीज का मुख्य विलेन हथौड़ा त्यागी चित्रकूट का रहने वाला है, जो अपराध की दुनिया में अपनी अलग राह चुनता है. जांच के सिलसिले में जब इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी दिल्ली से निकलकर चित्रकूट के देहाती इलाकों तक पहुंचता है, तो कहानी में UP का सामाजिक ताना-बाना और प्रशासनिक हकीकत साफ झलकती है. इसके दो सीजन आ चुके हैं और इसे क्राइम थ्रिलर के शौकीनों के बीच काफी पसंद किया गया.

असुर

पारंपरिक गैंगवार से हटकर 'असुर' एक ऐसी थ्रिलर सीरीज है, जो वाराणसी की पावन पृष्ठभूमि पर बनाई गई है. इसमें धर्म, पौराणिक मान्यताओं और आधुनिक फॉरेंसिक साइंस का एक अनोखा मेल देखने को मिलता है. कहानी एक ऐसे सिरफिरे सीरियल किलर के इर्द-गिर्द घूमती है जो खुद को असुर मानता है और पुलिस व फॉरेंसिक टीम के साथ चूहे-बिल्ली का खेल खेलता है.

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अरशद वारसी (धनंजय राजपूत) और बरुन सोबती (निखिल नायर) की मुख्य भूमिकाओं वाली इस सीरीज के दो सीजन सुपरहिट रहे हैं, जबकि इसके तीसरे सीजन की शूटिंग फिलहाल जारी है.

इंस्पेक्टर अविनाश

निर्देशक नीरज पाठक की वेब सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश' UP पुलिस के रियल लाइफ एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अविनाश मिश्रा के जीवन से प्रेरित है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे 90 के दशक में राज्य से बड़े-बड़े अपराधियों और गैंग्स का सफाया करने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई थी. 

एक्टर रणदीप हुड्डा ने अविनाश मिश्रा का रोल प्ले किया है, जबकि उनके साथ उर्वशी रौतेला भी नजर आई हैं. सच्ची घटनाओं से जुड़ी इस लोकप्रिय एक्शन-थ्रिलर सीरीज के भी दो सीजन पब्लिश हो चुके हैं.

क्यों UP बना OTT का सबसे बड़ा क्राइम हब?

दरअसल इसके पीछे कोई बड़ा कारण नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई सामाजिक और सिनेमाई कारण भी हैं. इंडियन ऑडियंस मुंबई के विदेशी सेट और ग्लैमराइज्ड अंडरवर्ल्ड से बोर हो चुकी है. ऐसे में जब UP की असल लोकेशंस, देसी बोलियां और मजबूत कहानियां मिलीं, तो लोग इससे जुड़ते चले गए.

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