PDA बचाना, साथ ही करीबियों को भी साधना... राज्यसभा चुनाव में अखिलेश कैसे बनाएंगे बैलेंस?

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद सपा में हलचल तेज हो गई है. दो सीटों पर जीत तय होने के बावजूद अखिलेश यादव 'पीडीए' समीकरण को साधते हुए तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारकर बड़ा सियासी दांव खेल सकते हैं, लेकिन क्या सियासी बैलेंस बनाकर रख पाएंगे?

Advertisement
राज्यसभा में अखिलेश यादव क्या फिर रामगोपाल यादव को भेजेंगे (Photo-ITG) राज्यसभा में अखिलेश यादव क्या फिर रामगोपाल यादव को भेजेंगे (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:38 PM IST

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है, जिसके लिए मंगलवार से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी और 6 अक्टूबर तक चलेगी. 16 अक्टूबर को मतदान होना है. विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर 7 सीटें बीजेपी और 2 सीटें सपा की कन्फर्म मानी जा रही हैं, जबकि 10वीं राज्यसभा सीट के लिए दोनों के बीच जोर-आजमाइश देखने को मिल सकती है.

Advertisement

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से सपा प्रमुख अखिलेश यादव 'पीडीए फॉर्मूले' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को केंद्र में रखकर अपनी सियासत करते नजर आ रहे हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव की जंग फतह करने के लिए भी वह इसी 'पीडीए' के इर्द-गिर्द सियासी ताना-बाना बुन रहे हैं.

अखिलेश यादव जिस तरह से 2027 के लिए पीडीए का दांव चल रहे हैं, क्या उसी तर्ज पर राज्यसभा चुनाव में भी उम्मीदवारों का चयन करेंगे? यह सवाल इसीलिए उठ रहा है क्योंकि 2024 में जब सपा ने राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार उतारे थे, तब अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले पर सवाल खड़े हुए थे. अब एक बार फिर सपा उसी मुकाम पर खड़ी है.

राज्यसभा चुनाव के लिए सपा की बैठक

समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी दफ्तर में बैठक बुलाई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन किया जाएगा. इस दौरान संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा होगी.

Advertisement

राज्यसभा चुनावों को रोचक बनाने के लिए सपा दो सीटों तक खुद को सीमित रखने के बजाय तीसरा उम्मीदवार भी उतार सकती है. सूबे में विधायकों की संख्या के आधार पर सपा दो राज्यसभा सीटें आसानी से जीत लेगी, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे क्रॉस वोटिंग करानी होगी. ऐसे में सपा की बैठक में यह तय होगा कि वह कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी.

अखिलेश यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक तरफ अपने पीडीए को बचाए रखने की है तो दूसरी तरफ अपने करीबियों को राज्यसभा भेजने की है. करीबी में रामगोपाल यादव जहां उनके चाचा है तो दूसरी अलोक रंजन उनके भरोसेमंद माने जाते हैं. 

राज्यसभा चुनाव का गणित क्या है?

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं. यूपी विधानसभा में फिलहाल विधायकों की कुल संख्या 397 है. इस तरह एक प्रत्याशी की जीत के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोटों का गणित बन रहा है. सपा के पास 102 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के दो विधायकों को जोड़ने पर विपक्षी खेमे की संख्या 104 हो जाती है.

सपा को यूपी में दो राज्यसभा सीटें जीतने के बाद करीब 27 वोटों की बचत होगी. ऐसे में सपा को अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. तीसरी सीट जीतने के लिए पार्टी को अपने खेमे से बाहर भी समर्थन जुटाना पड़ेगा, जिसके लिए उसकी नजर बीजेपी के सहयोगी दलों—सुभासपा और आरएलडी के विधायकों पर है.

Advertisement

क्या सपा 'पीडीए' का संतुलन बना पाएगी?

सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में उनका पुनः राज्यसभा जाना तय माना जा रहा है. रामगोपाल यादव ने सार्वजनिक रूप से राज्यसभा जाने की इच्छा भी जाहिर की है. ऐसे में साफ है कि रामगोपाल यादव की एक सीट पक्की मानी जा रही है, लेकिन दूसरा और संभावित तीसरा कैंडिडेट कौन होगा, इसे लेकर सियासी कयास लगाए जा रहे हैं.

2024 में सपा ने तीन प्रत्याशी राज्यसभा के लिए उतारे थे, जिनमें रामजी लाल सुमन, जया बच्चन और आलोक रंजन शामिल थे. सपा के इन प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर ही विरोध शुरू हो गया था. स्वामी प्रसाद मौर्य से लेकर सलीम इकबाल शेरवानी तक ने सपा के पीडीए दावे पर सवाल उठाए थे. स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी छोड़ दी थी, जबकि शेरवानी ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था (हालांकि बाद में वह मान गए थे).

यदि इस बार भी सपा पीडीए समीकरणों के तहत उम्मीदवार नहीं उतारती है तो फिर से सवाल खड़े होंगे. चूंकि 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद करीब है, ऐसे में अखिलेश यादव के लिए अपने फैसले को डिफेंड करना मुश्किल हो जाएगा. सपा की मुस्लिम राजनीति पर असदुद्दीन ओवैसी से लेकर मायावती तक पहले से ही सवाल उठा रहे हैं, इसलिए अखिलेश पर किसी मुस्लिम चेहरे को प्रत्याशी बनाने का दबाव रहेगा. अब देखना होगा कि सपा किस पर दांव खेलती है.

Advertisement

2024 के पिछले राज्यसभा चुनाव में तस्वीर बिल्कुल उलटी थी. उस समय सपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने उसके तीसरे प्रत्याशी आलोक रंजन का गणित बिगाड़ दिया था और बीजेपी के संजय सेठ जीत गए थे. इस बार भी यदि सपा तीसरे प्रत्याशी का दांव चलती है तो यह चुनाव महज सीटों की लड़ाई नहीं रह जाएगा.

राज्यसभा चुनाव: 2027 का सेमीफाइनल

इस राज्यसभा चुनाव को 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद सीधे 2027 का विधानसभा चुनाव होना है. सपा द्वारा तीसरा कैंडिडेट उतारने की स्थिति में प्रत्याशियों का सामाजिक समीकरण बेहद महत्वपूर्ण होगा. रामगोपाल यादव के बाद दूसरा प्रत्याशी मुस्लिम और तीसरा प्रत्याशी अति-पिछड़ा या दलित समाज से हो सकता है.

सपा पिछले कुछ समय से अपने पारम्परिक वोट बैंक के साथ-साथ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के व्यापक सामाजिक गठजोड़ पर जोर देती रही है. ऐसे में राज्यसभा का तीसरा उम्मीदवार इस राजनीतिक संदेश को और धार देने का जरिया बन सकता है. फिलहाल सपा के सामने स्थिति 'एक अनार और सौ बीमार' वाली बनी हुई है कि वह किसे राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए और किसे नहीं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »