उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो रही है. सपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, लेकिन विधायकों की संख्या के आधार पर जीत के लिए काफी मशक्कत करनी होगी. अब सवाल यह है कि सपा किसे उच्च सदन भेजेगी? सपा विधायकों की बैठक के बाद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि कुछ 'सरप्राइज' के लिए तैयार रहिए.
राज्यसभा की जिन 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होने हैं, उनमें से 8 सीटें बीजेपी, एक सीट सपा और एक सीट बसपा के पास थी. मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी आसानी से 7 सीटें जीत लेगी और दो सीटें सपा के खाते में जा सकती हैं. इसके अलावा 10वीं सीट के लिए दोनों के बीच शह-मात का खेल देखने को मिल सकता है.
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 10 सीटों पर राज्यसभा चुनाव सपा के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. बीजेपी जहां अपने प्रत्याशियों के जरिए सियासी समीकरण साधने की जुगत में है, वहीं सपा के सामने भी अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को बनाए रखने की चुनौती खड़ी है. ऐसे में देखना होगा कि अखिलेश यादव ने क्या 'सरप्राइज' देने का प्लान बनाया है.
राज्यसभा चुनाव का समझें गणित
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए प्रथम वरीयता के आधार पर 37 विधायकों का समर्थन चाहिए. यूपी में आगरा की फतेहाबाद सीट से बीजेपी विधायक छोटेलाल वर्मा सहित 3 बीजेपी विधायकों के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी गठबंधन के पास फिलहाल 288 विधायक हैं. इनमें भाजपा के 255, अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक शामिल हैं.
वहीं, सपा और कांग्रेस गठबंधन के पास करीब 103 विधायक हैं, जिनमें सपा के 101 और कांग्रेस के दो विधायक शामिल हैं. इसके अलावा रघुराज प्रताप सिंह की पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो और सपा से बगावत करने वाले 6 विधायक हैं, जिनमें से 4 को सपा निष्कासित कर चुकी है. इन विधायकों में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री मनोज कुमार पांडेय भी शामिल हैं. इसके अलावा बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का भी निधन हो चुका है, जिन्होंने पिछले चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार को वोट दिया था.
यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन फिलहाल 397 विधायक हैं. 10 सीटों पर राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के आधार पर लगभग 37 वोटों की आवश्यकता है. इस आंकड़े के तहत बीजेपी 7 सीटें और सपा 2 सीटें आसानी से जीत लेगी. इसके बाद बीजेपी के पास 29 और सपा के पास अतिरिक्त 29 वोट बचेंगे. ऐसे में 10वीं राज्यसभा सीट जीतने के लिए दोनों ही पार्टियों को क्रॉस वोटिंग या अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी.
सपा के संभावित प्रत्याशी और सरप्राइज का दांव
सपा विधायकों की बैठक में फैसला लिया गया है कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी 3 प्रत्याशी उतारेगी. सपा के प्रत्याशी बुधवार को नामांकन कर सकते हैं. सपा की तरफ से अभी जिन नामों की चर्चा चल रही है, उनमें रामगोपाल यादव, पूर्व आईएएस आलोक रंजन और सलीम इकबाल शेरवानी शामिल हैं. माना जा रहा है कि सपा तीन प्रत्याशियों के जरिए दांव खेलेगी, लेकिन अखिलेश यादव का असली 'सरप्राइज' क्या है, उस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.
अटकलें लगाई जा रही हैं कि अखिलेश यादव अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए बीजेपी के सहयोगी दलों के विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराने का दांव चल सकते हैं. पिछले चुनाव में भी बीजेपी की सहयोगी सुभासपा के तीन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी. यही वजह मानी जा रही है कि सपा एक बार फिर उसी दांव को आजमा सकती है.
समर्थ श्रीवास्तव