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फतेहाबाद विधानसभा चुनाव 2027 (Fatehabad Assembly Election 2027)

फतेहाबाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा जिले का एक सब-डिविजन स्तर का शहर है और यह फतेहाबाद तहसील का मुख्यालय भी है. यह इलाका 1658 में भारतीय इतिहास का हिस्सा बना, जब पास ही लड़ी गई निर्णायक 'सामूगढ़ की लड़ाई' ने औरंगजेब के गद्दी पर बैठने का रास्ता साफ करके मुगल साम्राज्य की दिशा बदल दी. माना जाता है कि उस जीत की याद में ही इस शहर का नाम फतेहाबाद,

यानी 'जीत का शहर' रखा गया था, हालांकि यह बस्ती पहले 'सामूगढ़' नाम से मौजूद थी. फतेहाबाद नगर पंचायत ने शहर का नाम बदलकर 'सिंदूरपुरम' करने का प्रस्ताव रखा है, जिस पर अभी उत्तर प्रदेश सरकार विचार कर रही है. इस कदम के समर्थकों का तर्क है कि नया नाम विदेशी शासन के प्रतीक को हटाकर 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद राष्ट्रीय गौरव से जुड़े नाम को अपनाएगा.

परिसीमन आयोग के 1956 के आदेश से बना फतेहाबाद एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद, इस क्षेत्र में अब पूरी फतेहाबाद तहसील आती है, जिसमें फतेहाबाद नगर पंचायत और लगभग 166 गांव शामिल हैं, जिससे यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र बन गया है.

1957 में पहली बार चुनाव होने के बाद से फतेहाबाद में 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दशकों में इस क्षेत्र पर कांग्रेस का दबदबा रहा और उसने चार चुनाव जीते. इसके बाद बीजेपी पांच जीत के साथ सबसे सफल पार्टी बनकर उभरी है, जबकि अब खत्म हो चुकी जनता दल ने तीन बार और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने दो बार यह सीट जीती है. रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने भी एक-एक बार यह सीट जीती है. आस-पास के कई निर्वाचन क्षेत्रों के विपरीत, फतेहाबाद शायद ही कभी लंबे समय तक किसी एक राजनीतिक पार्टी के प्रति वफादार रहा हो, हालांकि बीजेपी ने पिछले पांच विधानसभा चुनावों में से चार जीतकर इस चलन को बदल दिया है.

फतेहाबाद में चुनावी नतीजों पर अक्सर पार्टियों के बदलने का असर पड़ा है. 2012 के चुनाव में दो बड़े नेताओं के बीच एक अनोखा मुकाबला देखने को मिला, जिन्होंने अपनी पार्टियां बदली थीं. छोटे लाल वर्मा, जो पहले दो बार बीजेपी के विधायक रह चुके थे, ने बीएसपी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और मौजूदा बीजेपी विधायक राजेंद्र सिंह को, जो तब तक समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके थे, 699 वोटों के मामूली अंतर से हराया. इस सीट पर बीजेपी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा. पार्टी सिर्फ 11.13% वोट पाकर तीसरे स्थान पर रही और उसके उम्मीदवार गिर्राज सिंह कुशवाहा की जमानत जब्त हो गई.

2017 में बीजेपी ने जबरदस्त वापसी की और जितेंद्र वर्मा ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र सिंह को 34,364 वोटों से हराया. छोटे लाल वर्मा 2016 में बीजेपी में वापस आ गए थे और 2022 में उन्हें पार्टी का टिकट मिला. यह रणनीति काम आई और उन्होंने समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार रूपाली दीक्षित को 53,235 वोटों से हराकर बीजेपी के लिए यह सीट बरकरार रखी. छोटे लाल वर्मा को 1,08,811 वोट मिले, जबकि दीक्षित को 55,576 वोट मिले.

लोकसभा चुनावों के दौरान भी फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी का उभार साफ दिखा. 2009 में बीएसपी, कांग्रेस से 8,862 वोटों से आगे थी, जबकि बीजेपी काफी पीछे तीसरे स्थान पर रही. 2014 में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले और बीजेपी ने समाजवादी पार्टी पर 37,828 वोटों की बढ़त बना ली. 2019 में कांग्रेस के मुकाबले यह बढ़त बढ़कर 1,08,077 वोट हो गई. हालांकि 2024 में भी बीजेपी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रही, लेकिन जीत का अंतर काफी कम हो गया. विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार राजकुमार चाहर को 1,00,038 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रामनाथ सिकरवार को 72,551 वोट मिले, जिससे बीजेपी को 27,487 वोटों की बढ़त मिली.

पिछले कुछ वर्षों में फतेहाबाद में मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या 2012 में 264,837 से बढ़कर 2017 में 297,525, 2019 में 308,346, 2022 में 322,495 और 2024 में 321,836 हो गई. वोटिंग में लोगों की भागीदारी लगातार ज्यादा रही है. 2012 में वोटिंग 69.53 प्रतिशत, 2017 में 70.52 प्रतिशत और 2022 के विधानसभा चुनाव में 67.15 प्रतिशत रही. 2019 के लोकसभा चुनाव में वोटिंग 67.15 प्रतिशत थी, जो 2024 के संसदीय चुनाव में थोड़ी कम हो गई.

फतेहाबाद हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां चुनावी राजनीति में धार्मिक बातों के मुकाबले जातिगत समीकरण ज्यादा अहमियत रखते हैं. अनुसूचित जातियों की आबादी कुल वोटरों का लगभग 18 से 20 प्रतिशत है, जबकि मुसलमानों की आबादी लगभग 10 से 12 प्रतिशत होने का अनुमान है. ब्राह्मण, राजपूत, कुशवाहा, लोधी और अन्य OBC समुदायों का भी चुनावी नतीजों पर काफी असर रहता है. 2011 की जनगणना के अनुसार, यह निर्वाचन क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां के लगभग 87 प्रतिशत वोटर गांवों में और लगभग 13 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं. हालांकि, फतेहाबाद शहर के लगातार विस्तार से इन आंकड़ों में थोड़ा बदलाव आया हो सकता है.

फतेहाबाद का ऐतिहासिक महत्व 29 मई, 1658 को मुगल उत्तराधिकार युद्ध के दौरान दारा शिकोह और उसके छोटे भाई औरंगजेब की सेनाओं के बीच लड़ी गई सामूगढ़ की लड़ाई से जुड़ा है. औरंगजेब की जीत निर्णायक साबित हुई, जिससे वह अपने पिता शाहजहां को गद्दी से हटाकर मुगल सिंहासन पर बैठने में सफल रहा. इतिहासकारों का मानना ​​है कि 'फतेहाबाद' नाम, जिसका अर्थ है 'जीत का शहर', उसी जीत की याद दिलाता है. मुगल इतिहास से जुड़े होने के बावजूद, यह इलाका मुख्य रूप से खेती-बाड़ी वाला रहा है और यहां तहसील मुख्यालय के अलावा शहरी विकास बहुत कम हुआ है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में बसा फतेहाबाद, खेती के लिए अच्छी जमीन वाले ग्रामीण इलाकों से घिरा हुआ है. यहां गेहूं, सरसों, बाजरा, आलू और ,सब्जियां मुख्य फसलें हैं, जबकि डेयरी फार्मिंग आय का एक अहम अतिरिक्त जरिया है. फतेहाबाद बाजार आस-पास के गांवों के लिए व्यापार का मुख्य केंद्र है. आगरा और फतेहपुर सीकरी के पास होने के कारण पर्यटन भी यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था में अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देता है.

यह निर्वाचन क्षेत्र आगरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, एत्मादपुर और आस-पास के जिलों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन आगरा कैंट है, जबकि आगरा एयरपोर्ट से सीमित कमर्शियल हवाई सेवाएं मिलती हैं. उत्तर प्रदेश में बढ़ते एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने राज्य के पश्चिमी और मध्य हिस्सों तक यात्रा के समय को भी काफी कम कर दिया है.

फतेहाबाद आगरा से लगभग 35 किमी, फतेहपुर सीकरी से लगभग 45 किमी, फिरोजाबाद से लगभग 35 किमी और पड़ोसी राजस्थान के भरतपुर से लगभग 70 किमी दूर है. मथुरा यहां से लगभग 90 किमी, ग्रेटर नोएडा लगभग 180 किमी, नोएडा लगभग 195 किमी और नई दिल्ली लगभग 230 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जरिए लगभग 320 किमी दूर है.

बीजेपी का फतेहाबाद में चुनावी रिकॉर्ड बहुत मजबूत रहा है. पार्टी ने पिछले पांच विधानसभा चुनावों में से चार जीते हैं और पिछले तीन लोकसभा चुनावों में बढ़त बनाई है. 2014 से यहां पार्टी अजेय रही है, जिससे उसे अपने प्रतिद्वंद्वियों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है. साथ ही, 2024 के संसदीय चुनाव में उसकी बढ़त में आई भारी कमी पर पार्टी के भीतर जरूर ध्यान दिया गया होगा. समाजवादी पार्टी इसी बढ़त को आगे बढ़ाने की उम्मीद के साथ 2027 के चुनाव में उतर रही है, जबकि दलित और मुस्लिम वोटों के बंटवारे को प्रभावित करके बीएसपी का प्रदर्शन भी अहम साबित हो सकता है. इसके बावजूद, बीजेपी इस दौड़ में पसंदीदा के तौर पर शुरुआत कर रही है, हालांकि विपक्ष ने वापसी के ऐसे संकेत दिए हैं जिनसे यह साफ है कि फतेहाबाद को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

(अजय झा)

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फतेहाबाद विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Chhotey Lal Verma

BJP
वोट1,08,811
विजेता पार्टी का वोट %50.5 %
जीत अंतर %24.7 %

फतेहाबाद विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Roopali Dixit

    SP

    55,576
  • Shailendra Singh

    BSP

    40,958
  • Rajesh Singh Kushwah

    JANADIP

    3,585
  • Nota

    NOTA

    2,472
  • Mahinder Singh Verma

    IND

    1,331
  • Hotam Singh Nishad

    INC

    683
  • Bhuri

    IND

    611
  • Pramod Kumari Kushwah

    IND

    307
  • Pt. Dinesh Chand Sharma

    SamAP

    301
  • Vijay Singh Dhangar

    RSOSP

    267
  • Narendra Singh

    BVD

    257
  • Purushottam Das Fauzi Bhai

    AAAP

    250
  • Ajay Kumar

    LGP

    217
WINNER

Jitendra Verma

BJP
वोट1,01,960
विजेता पार्टी का वोट %48.6 %
जीत अंतर %16.4 %

फतेहाबाद विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Rajendra Singh

    SP

    67,596
  • Umesh Sharma Saithiya

    BSP

    35,050
  • Nota

    NOTA

    1,470
  • Shokheeram

    NINSHAD

    1,358
  • Rajendra Singh

    IND

    905
  • Ramesh Chandra

    BSRD

    776
  • Radheshyam Kushwah

    SSAD

    678
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फतेहाबाद विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में फतेहाबाद में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के फतेहाबाद विधानसभा चुनाव सीट पर Chhotey Lal Verma को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

फतेहाबाद विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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