सपा के 3 बागी विधायकों की जॉइनिंग से बीजेपी में 'ठाकुर बनाम ब्राह्मण' की छिड़ेगी रार!

सपा के तीन बागी विधायक- राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी की बीजेपी में एंट्री से 2027 के चुनाव से पहले अवध और बुंदेलखंड का सियासी पारा चढ़ गया है. बागियों को साधने के चक्कर में बीजेपी के सामने अपनी पारंपरिक सीटों पर 'ठाकुर बनाम ब्राह्मण' के अंदरूनी असंतोष को संभालने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

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अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, विनोद चतुर्वेदी (Photo-ITG) अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, विनोद चतुर्वेदी (Photo-ITG)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से समीकरण साधे जाने लगे हैं. समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक राकेश प्रताप सिंह 14 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामेंगे. उनके साथ सपा के दो और बागी विधायक बाहुबली अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भी बीजेपी की सदस्यता लेंगे. हालांकि, सपा के इन बागी 'ठाकुर विधायकों' की एंट्री से बीजेपी का पारंपरिक 'ठाकुर-ब्राह्मण' समीकरण बिगड़ने की आशंका भी गहराई है.

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राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक हैं, जबकि अभय सिंह अयोध्या की गोसाईंगंज सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसके अलावा विनोद चतुर्वेदी जालौन की कालपी सीट से विधायक हैं. इन नेताओं की जॉइनिंग के ऐलान के साथ ही यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या बीजेपी इन्हें इनकी मौजूदा सीटों से ही 2027 के चुनाव में उतारेगी? क्या पार्टी ने इनसे दोबारा टिकट देने का वादा किया है?

अगर गौरीगंज से राकेश प्रताप सिंह और गोसाईंगंज से अभय सिंह को बीजेपी का टिकट मिलता है, तो 2022 में बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ चुके दो बड़े ब्राह्मण चेहरों का क्या होगा? गौरीगंज से पूर्व प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी और गोसाईंगंज से पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ 'खब्बू तिवारी' बीजेपी के कद्दावर नेता माने जाते हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या ये दोनों नेता पार्टी में बने रहेंगे या फिर राजनीतिक पाला बदलकर दो-दो हाथ करेंगे?

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गौरीगंज: राकेश प्रताप सिंह बनाम चंद्र प्रकाश मटियारी

बीजेपी में शामिल होने जा रहे गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर तीन बार से विधायक हैं. वे 2012 से लगातार इस सीट से जीतते आ रहे हैं. फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा से बगावत कर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी.

अब राकेश प्रताप सिंह आधिकारिक तौर पर बीजेपी का दामन थामने जा रहे हैं, जिसकी सदस्यता वे अमेठी में लेंगे. गौरीगंज में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी उन्हें पार्टी में शामिल कराएंगे. लेकिन सवाल यही है कि क्या बीजेपी 2027 में उन्हें गौरीगंज से टिकट देगी?

अगर बीजेपी राकेश प्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाती है, तो 2022 में बीजेपी प्रत्याशी रहे चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी का रुख क्या होगा. मटियारी जिले के बड़े ब्राह्मण नेता हैं और अमेठी में उनका अपना जनाधार है. बीएसपी सरकार में मंत्री रह चुके मटियारी को स्मृति ईरानी ही बीजेपी में लेकर आई थीं और उन्हें स्मृति की कोर टीम का अहम चेहरा माना जाता है.

राकेश प्रताप सिंह के आगमन पर पूर्व प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मटियारी ने स्पष्ट कहा, "पार्टी में शामिल होने मात्र से टिकट नहीं मिल जाता. उम्मीदवारी का दावा कोई भी कर सकता है और हम भी कर रहे हैं. हम तो 2047 के मिशन को लेकर चल रहे हैं. पिछली बार बीजेपी से चुनाव लड़े थे और इस बार भी तैयारी पूरी है. टिकट का फैसला पार्टी और संगठन करता है. अगर पार्टी भरोसा जताती है तो सीट जीतकर बीजेपी की झोली में डालेंगे." मटियारी के इस बयान ने उनके कड़े तेवर साफ कर दिए हैं.

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गोसाईंगंज: अभय सिंह बनाम खब्बू तिवारी

अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह 2012 में पहली बार सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे. 2017 के चुनाव में उन्हें बीजेपी के दिग्गज नेता इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ 'खब्बू तिवारी' ने मात दी थी. 2022 में अभय सिंह दूसरी बार सपा के टिकट पर जीते, लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने पाला बदल लिया. अब वे 14 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं.

अयोध्या की राजनीति में अभय सिंह और खब्बू तिवारी की सियासी अदावत जगजाहिर है. दोनों ही अपने-अपने इलाके में बाहुबली नेता के रूप में जाने जाते हैं. अभय सिंह की गिनती कभी मुख्तार अंसारी के करीबियों में होती थी, लेकिन बाद में वे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' के खेमे में आ गए. खब्बू तिवारी और अभय सिंह के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता के चलते क्षेत्र में 'ब्राह्मण बनाम ठाकुर' की राजनीति हमेशा गर्म रहती है. अभय सिंह जहां ठाकुर समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं खब्बू तिवारी क्षेत्र में ब्राह्मण राजनीति का बड़ा चेहरा हैं.

कालपी: विनोद चतुर्वेदी बनाम छोटे सिंह

सपा के बागी विधायक विनोद चतुर्वेदी भी बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. विनोद चतुर्वेदी का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था. वे लंबे समय तक जालौन जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और प्रदेश संगठन में भी अहम भूमिका निभाई. 2007 में वे पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे.

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2021 में कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुए विनोद चतुर्वेदी ने 2022 के चुनाव में कालपी सीट से जीत हासिल की. उन्होंनेनिषाद पार्टी (बीजेपी गठबंधन) के प्रत्याशी छोटे सिंह को 2,816 वोटों के मामूली अंतर से हराया था. बुंदेलखंड में पुराने कांग्रेसी रहे चतुर्वेदी ने 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत कर बीजेपी का समर्थन किया था.

कालपी सीट पर विनोद चतुर्वेदी की सियासी लड़ाई हमेशा ठाकुर नेताओं से ही रही है. 2022 में निषाद पार्टी के छोटे सिंह से मुकाबला हुआ, तो इससे पहले 2017 में बीजेपी के नरेंद्र पाल सिंह यहां से विधायक रहे थे. कालपी में पारंपरिक रूप से ठाकुर नेताओं का दबदबा रहा है, लेकिन विनोद चतुर्वेदी के मैदान में रहने से यहां की सियासत अक्सर 'ब्राह्मण बनाम ठाकुर' के ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती है.

ठाकुर बनाम ब्राह्मण से बिगड़ेगा सियासी गेम?

इन तीनों बागी विधायकों के बीजेपी में आने से पार्टी का अंदरूनी सियासी गणित बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है. गोसाईंगंज और गौरीगंज में सपा के इन बागी ठाकुर चेहरों का सीधा मुकाबला बीजेपी के ही स्थानीय ब्राह्मण नेताओं से रहा है.

अयोध्या और अवध क्षेत्र में खब्बू तिवारी का अच्छा-खासा असर माना जाता है. ऐसे में अगर बीजेपी अभय सिंह को गोसाईंगंज से टिकट देती है, तो खब्बू तिवारी की नाराजगी झेलना आसान नहीं होगा. ठीक यही स्थिति गौरीगंज में भी है, जहां मटियारी का टिकट कटने से पार्टी के भीतर असंतोष पनप सकता है.

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अगर टिकट कटने की सूरत में खब्बू तिवारी या मटियारी जैसे नेताओं ने पाला बदलकर समाजवादी पार्टी का रुख कर लिया, तो बीजेपी को केवल दो सीटों का ही नुकसान नहीं होगा, बल्कि पूरे अवध क्षेत्र में पार्टी का नरेटिव प्रभावित हो सकता है. इससे सपा के उस आरोप को बल मिलेगा कि बीजेपी में 'ब्राह्मणों की अनदेखी कर ठाकुरों को तरजीह' दी जा रही है. दूसरी ओर, कालपी में विनोद चतुर्वेदी के आने से बीजेपी के कैडर ठाकुर वोट बैंक को साधे रखना भी एक चुनौती होगा.

बीजेपी के लिए संतुलन बनाने की चुनौती

बीजेपी के सामने पहले से ही ब्राह्मण मतदाताओं को साधे रखने की चुनौती रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पार्टी इन नए नेताओं को किसी दूसरी सीट से लड़ाएगी या फिर पुराने ब्राह्मण चेहरों को अन्य जगहों पर समायोजित करेगी?

अमेठी के समीकरण को देखें तो जिले की 5 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 2 पर ठाकुर और 2 सुरक्षित सीटों पर दलित प्रत्याशी उतारती रही है, जबकि गौरीगंज सीट पर ब्राह्मण चेहरे को मौका मिलता रहा है. अगर गौरीगंज में मटियारी का टिकट कटता है तो पूरे जिले का सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है.

कमोबेश यही हाल अयोध्या का है, जहां पूर्व विधायक पवन पांडेय सपा से पहले ही मजबूती से दावेदारी ठोक रहे हैं. ऐसे में अगर बीजेपी खब्बू तिवारी को दरकिनार करती है, तो जिले के ब्राह्मण मतदाताओं को साधना मुश्किल हो सकता है. सपा के बागियों को साथ लाकर कुनबा बढ़ा रही बीजेपी के लिए सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि वे क्षेत्र में ब्राह्मण और ठाकुर वोटों के बीच संतुलन कैसे कायम रखती है.

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