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गौरीगंज विधानसभा चुनाव 2027 (Gauriganj Assembly Election 2027)

गौरीगंज उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले का एक कस्बा, नगर पालिका परिषद और प्रशासनिक मुख्यालय है, जिसकी ऐतिहासिक जड़ें काफी पुरानी हैं. पहले यह सुल्तानपुर जिले की एक तहसील थी. 1 जुलाई 2010 को सुल्तानपुर जिले की अमेठी, गौरीगंज और मुसाफिरखाना तहसीलों तथा रायबरेली जिले की सलोन और तिलोई तहसीलों को मिलाकर नया जिला बनाया गया. नए जिले का नाम शुरू में छत्रपति

शाहूजी महाराज नगर रखा गया था, जिसे बाद में बदलकर अमेठी कर दिया गया. गौरीगंज जिले के प्रमुख प्रशासनिक और शहरी केंद्र के रूप में काम करता है और गौरीगंज तथा अमेठी कस्बों के आसपास के बड़ी संख्या में गांवों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है.

1967 के विधानसभा चुनाव से पहले स्थापित गौरीगंज एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और अमेठी लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसकी वर्तमान सीमाओं में गौरीगंज तहसील के शाहगढ़, इटौजा पश्चिम और गौरीगंज कानूनगो सर्किल के साथ इसी तहसील के जामो कानूनगो सर्किल के 15 राजस्व गांव शामिल हैं. इसके अलावा मुसाफिरखाना तहसील का पूरा मुसाफिरखाना कानूनगो सर्किल और मुसाफिरखाना नगर पंचायत भी इस विधानसभा क्षेत्र में आती है. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है और इसमें शहरी हिस्सा काफी छोटा है.

गौरीगंज में अपने गठन के बाद से अब तक 16 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें 2003 का उपचुनाव भी शामिल है. गौरीगंज के मतदाताओं ने राज्य की लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को मौका दिया है और कई बार किसी दल को लगातार कई चुनावों तक समर्थन देने के बाद राजनीतिक रुख बदला है. कुल मिलाकर कांग्रेस ने यह सीट छह बार जीती है, जबकि भाजपा और समाजवादी पार्टी ने तीन-तीन चुनावों में जीत हासिल की है. बहुजन समाज पार्टी ने दो बार जीत दर्ज की है. 1967 में पहला चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीता था, जबकि 1977 में जनता पार्टी को जीत मिली थी. भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ने लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की है. भाजपा ने 1991 से 1996 के बीच हुए तीनों चुनाव जीते थे, जबकि समाजवादी पार्टी ने 2012 के बाद लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की है.

2003 का उपचुनाव इस चुनावी इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है. कांग्रेस विधायक नूर मोहम्मद के निधन के बाद यह उपचुनाव कराया गया था. बहुजन समाज पार्टी के जंग बहादुर ने कांग्रेस उम्मीदवार फतेह बहादुर को 7,500 वोटों से हराकर सीट जीती थी. 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने चंद्र प्रकाश के जरिए सीट बरकरार रखी. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद नईम को 5,988 वोटों से हराया था. 2002 का चुनाव कांग्रेस के नूर मोहम्मद ने बेहद कम अंतर से जीता था. उन्होंने भाजपा उम्मीदवार तेज भान सिंह को केवल 267 वोटों से हराया था.

राकेश प्रताप सिंह ने 2012 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में यह सीट जीती थी. उन्होंने कांग्रेस के मोहम्मद नईम को 503 वोटों के मामूली अंतर से हराया था. 2017 में उन्होंने फिर समाजवादी पार्टी के लिए सीट बरकरार रखी और एक बार फिर मोहम्मद नईम को हराया. इस बार जीत का अंतर बढ़कर 26,419 वोट हो गया था. 2022 में राकेश प्रताप सिंह ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की. उन्हें 79,040 वोट मिले, जबकि भाजपा के चंद्रप्रकाश मिश्रा मटियारी को 72,077 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 6,963 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया. जून 2025 में समाजवादी पार्टी ने राकेश प्रताप सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया. पार्टी ने उन पर और दो अन्य विधायकों पर पार्टी के निर्देशों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया था. यह मामला 2024 के राज्यसभा चुनाव से भी जुड़ा था. उनकी विधानसभा सदस्यता बनी रही और बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में अनअटैच्ड सदस्य के रूप में नामित किया गया. इसका मतलब है कि 2012 से गौरीगंज में समाजवादी पार्टी ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की है, लेकिन उसके मौजूदा तीन बार के विधायक अब औपचारिक रूप से पार्टी से जुड़े नहीं हैं.

गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों के दौरान मतदान के रुझान विधानसभा चुनावों से अलग दिखाई देते हैं. यहां लंबे समय तक कांग्रेस का प्रभाव रहा है और भाजपा ने कई बार उसे कड़ी चुनौती दी है. 2009 में कांग्रेस ने बसपा पर 79,525 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में भाजपा ने बसपा की जगह कांग्रेस के सामने मुख्य चुनौती पेश की और कांग्रेस की बढ़त घटकर 22,364 वोट रह गई. 2019 में तस्वीर और बदल गई. भाजपा ने इस क्षेत्र में कांग्रेस पर 19,973 वोटों की बढ़त बनाई और अमेठी लोकसभा सीट भी जीत ली. इसी चुनाव में कांग्रेस के तीन बार के सांसद राहुल गांधी को भाजपा की स्मृति ईरानी ने हराया था. 2024 में कांग्रेस ने फिर बढ़त हासिल की. अमेठी से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल को 108,426 वोट मिले, जबकि स्मृति ईरानी को 75,048 वोट मिले. इस तरह गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को 33,378 वोटों की बढ़त मिली.

गौरीगंज में पिछले वर्षों में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 309,472 थी, जो 2017 में बढ़कर 335,745 हो गई. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या 342,089 थी. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या 350,586 और 2024 में 355,401 हो गई. 2026 में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 306,077 मतदाता थे. यह संख्या 2024 के 355,401 मतदाताओं की तुलना में 49,324 कम थी. इसमें 13.88 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई. एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची के आकार में उल्लेखनीय कमी आई है. ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव इस क्षेत्र का ऐसा पहला चुनाव होगा जो काफी छोटे मतदाता आधार पर लड़ा जाएगा.

मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और यह सामान्य रूप से मध्यम स्तर पर रहा है. 2012 में मतदान प्रतिशत 58.76 था और 2017 में 59.92 प्रतिशत रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 55.42 प्रतिशत हो गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 57.98 हो गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में यह फिर घटकर 55.28 प्रतिशत रह गया.

गौरीगंज एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी पर्याप्त संख्या में है और इसका अनुमान करीब 13.50 प्रतिशत लगाया जाता है. अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 26.52 प्रतिशत है. प्रमुख समुदायों में पासी और अन्य अनुसूचित जातियां, ब्राह्मण, ठाकुर, यादव, लोधी और अन्य पिछड़ा वर्ग समूह शामिल हैं. गौरीगंज कस्बे और इसके आसपास व्यापारिक समुदाय की भी अच्छी संख्या है. यह क्षेत्र लगभग पूरी तरह ग्रामीण है. करीब 98.32 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि 1.68 प्रतिशत आबादी शहरी हिस्सों में रहती है. ये आंकड़े 2011 की जनगणना पर आधारित हैं और गौरीगंज के जिला मुख्यालय बनने तथा शहरी और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार के बाद हुए बदलावों को इसमें शामिल नहीं किया गया है.

गौरीगंज का इतिहास इसके बाजार के विकास और महत्वपूर्ण सड़क तथा रेलवे मार्ग पर स्थित होने से जुड़ा है. कस्बे का नाम हिंदू देवी गौरी के नाम पर रखा गया है. 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत के ऐतिहासिक विवरणों में गौरीगंज को एक विकसित होते बाजार कस्बे के रूप में बताया गया है. यहां के बाजार की स्थापना अमेठी के राजा माधो सिंह ने कराई थी. यह बस्ती कटरा-लालगंज और माधोपुर नाम के दो गांवों के आसपास विकसित हुई. 20वीं सदी की शुरुआत तक यहां अनाज मंडी, पुलिस स्टेशन, डाकघर, पशु बाड़ा और एक उच्च प्राथमिक विद्यालय मौजूद था. अवध और रोहिलखंड रेलवे के आने से इसकी व्यावसायिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिला. रेलवे ने कस्बे को आसपास के बाजारों और प्रशासनिक केंद्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

मुख्य रूप से ग्रामीण इस विधानसभा क्षेत्र में कृषि प्रमुख आर्थिक गतिविधि है. धान, गेहूं और दलहन यहां की महत्वपूर्ण फसलों में शामिल हैं. गौरीगंज कस्बा आसपास के गांवों के लिए स्थानीय व्यापार और सेवा केंद्र के रूप में काम करता है. अमेठी जिले के व्यापक क्षेत्र में हाल के वर्षों में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का भी विस्तार हुआ है, खासकर जगदीशपुर के आसपास. बेहतर सड़क और रेल संपर्क ने क्षेत्र को आसपास के बाजारों से जोड़ने में मदद की है. अमेठी में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर भी जिले में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है.

गौरीगंज सड़क और रेल दोनों माध्यमों से जुड़ा हुआ है. गौरीगंज रेलवे स्टेशन लखनऊ-रायबरेली-वाराणसी रेल मार्ग पर स्थित है. यहां से लखनऊ, रायबरेली, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और वाराणसी की ओर सीधी रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध है.

यह कस्बा रायबरेली से करीब 50 किलोमीटर, सुल्तानपुर से करीब 40 किलोमीटर और प्रतापगढ़ से करीब 45 किलोमीटर दूर है. अमेठी कस्बा करीब 13 किलोमीटर और जायस करीब 18 किलोमीटर दूर है. लखनऊ की दूरी सड़क मार्ग से करीब 115 से 120 किलोमीटर है. अयोध्या करीब 90 किलोमीटर, प्रयागराज करीब 100 किलोमीटर और वाराणसी करीब 170 किलोमीटर दूर है. सड़क और रेल नेटवर्क की वजह से गौरीगंज की पहुंच अवध क्षेत्र और पूर्वी उत्तर प्रदेश दोनों तक है.

गौरीगंज का चुनावी इतिहास विधानसभा और लोकसभा राजनीति के बीच एक अलग तस्वीर पेश करता है. संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस लगातार प्रतिस्पर्धी रही है और 2024 में उसने फिर बढ़त हासिल की. वहीं 2012 के बाद से विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी का प्रभाव रहा है. 2019 की लोकसभा बढ़त इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसी के साथ भाजपा ने अमेठी लोकसभा सीट जीती थी और राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ा था. 2024 में कांग्रेस ने यह स्थिति बदल दी. विधानसभा स्तर पर भाजपा ने 1991 से 1996 के बीच लगातार तीन जीत के बाद से गौरीगंज सीट नहीं जीती है. कांग्रेस ने आखिरी बार यह सीट 2002 में जीती थी.

राकेश प्रताप सिंह के समाजवादी पार्टी से निष्कासन और बाद में अनअटैच्ड विधायक बनने के बाद गौरीगंज की राजनीतिक स्थिति में एक और आयाम जुड़ गया है. समाजवादी पार्टी के सामने अब यह सवाल है कि अपने तीन लगातार विधानसभा चुनावों में बने संगठनात्मक आधार को वह अपने मौजूदा तीन बार के विधायक के बिना किस तरह बनाए रखती है. दूसरी ओर भाजपा ने यह दिखाया है कि वह लोकसभा चुनावों के समर्थन को विधानसभा चुनावों में भी चुनौती में बदल सकती है. 2022 में भाजपा समाजवादी पार्टी से केवल 6,963 वोट पीछे रही थी. कांग्रेस भी 2024 के लोकसभा प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में प्रासंगिक बनी हुई है, हालांकि गौरीगंज में उसकी आखिरी विधानसभा जीत 2002 में हुई थी. 2027 का चुनाव उम्मीदवारों के चयन, राजनीतिक दलों के बीच संभावित गठजोड़, राकेश प्रताप सिंह की स्थिति और एसआईआर के बाद हुए चुनावी बदलावों से प्रभावित होगा. राकेश प्रताप सिंह के भाजपा के करीब जाने और औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने तथा भाजपा द्वारा उन्हें 2027 के चुनाव में टिकट दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. यदि ऐसा होता है, तो इससे भाजपा को निश्चित बढ़त मिलेगी.

(अजय झा)

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गौरीगंज विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Rakesh Pratap Singh

SP
वोट79,040
विजेता पार्टी का वोट %39 %
जीत अंतर %3.5 %

गौरीगंज विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Chandra Prakash Mishra Matiyari

    BJP

    72,077
  • Fateh Bahadur

    INC

    28,964
  • Ramlakhan

    BSP

    9,872
  • Chaudhary Nafees Ahamad

    JDL

    7,056
  • Nota

    NOTA

    1,920
  • Shiv Prasad

    AAAP

    1,673
  • Hari Baksh

    IND

    998
  • Sarita

    IND

    713
  • Mohd. Hasan Lahri

    LD

    543
WINNER

Rakesh Pratap Singh

SP
वोट77,915
विजेता पार्टी का वोट %38.8 %
जीत अंतर %13.2 %

गौरीगंज विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Mohammad Nayeem

    INC

    51,496
  • Vijay Kishor

    BSP

    33,848
  • Uma Shankar Pandey

    BJP

    23,642
  • Ravindra Kumar

    RLD

    1,876
  • Ram Achal

    IND

    1,750
  • Mo. Hassan Lahri

    SARSAMP

    1,547
  • Nota

    NOTA

    1,155
  • Mo. Masoom

    IND

    1,017
  • Shriram Baurasi

    IND

    975
  • Harishchandra

    MWSP

    901
  • Dinesh Shukla

    AVIRP

    800
  • Vinod Kumar Maurya

    BMUP

    624
  • Kans Raj

    KTKD

    593
  • Jagpat Lal

    IND

    557
  • Dr. Bajrang Bahadur Singh

    LD

    541
  • Sharad Kumar Pandey

    IND

    538
  • Hari Baksa

    IND

    529
  • Ram Bhawan

    MANPA

    424
  • Mahadev Prasad

    VP

    320
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गौरीगंज विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में गौरीगंज में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के गौरीगंज विधानसभा चुनाव सीट पर Rakesh Pratap Singh को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

गौरीगंज विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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