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कालपी विधानसभा चुनाव 2027 (Kalpi Assembly Election 2027)

कालपी उत्तर प्रदेश के जालौन जिले का एक ऐतिहासिक नगर और नगर पालिका परिषद है, जो यमुना नदी के दाहिने किनारे पर कानपुर से लगभग 78 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. यह कालपी तहसील का मुख्यालय है और लंबे समय से नदी किनारे व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय प्रशासन के केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण रहा है. प्राचीन काल तक पहुंचने वाली परंपराओं के साथ कालपी

पर बाद में कई मध्यकालीन शक्तियों का शासन रहा और 1857 के विद्रोह में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा. इसके ऐतिहासिक स्वरूप की झलक आज भी यहां के स्मारकों और पुराने बसे इलाकों में दिखाई देती है. यह नगर आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लिए स्थानीय प्रशासनिक और बाजार केंद्र बना हुआ है.

कालपी के नाम पर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जो 1957 के चुनावों से अस्तित्व में है. यह जालौन लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा खंडों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसमें पूरी कालपी तहसील शामिल है, जिसमें कालपी नगर पालिका परिषद भी आती है, साथ ही कुठौंद और कदौरा विकासखंडों के माध्यम से प्रशासित ग्रामीण क्षेत्र भी इसमें शामिल हैं. इस वजह से इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है.

कालपी में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. 1957 में यह दो विधायक वाला क्षेत्र था, जब एक निर्दलीय और एक प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार निर्वाचित हुए थे. एकल विधायक सीट बनने के बाद हुए 16 चुनावों में कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और भाजपा ने इस सीट पर चार-चार बार जीत दर्ज की है. भाजपा की संख्या में उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की 1967 और 1974 की दो जीत भी शामिल हैं. जनता पार्टी, जनता पार्टी (सेक्युलर), जनता दल और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार यह सीट जीती है.

1991, 1993 और 1996 में लगातार तीन बार बसपा की जीत को छोड़ दें तो कालपी मुख्य रूप से बदलते राजनीतिक रुझान वाला क्षेत्र रहा है. हाल के वर्षों में भी यह पैटर्न जारी रहा है और पिछले तीन विधानसभा चुनावों में तीन अलग-अलग दलों ने यहां जीत दर्ज की है.

2012 में कांग्रेस उम्मीदवार उमा कांति ने बसपा के संजय सिंह को 6,650 वोटों से हराया था. 2017 में भाजपा ने चौथे स्थान पर रहने के बाद वापसी करते हुए यह सीट जीती. उस चुनाव में नरेंद्र पाल सिंह ने बसपा उम्मीदवार छोटे सिंह को 51,484 वोटों से हराया. 2022 में सीटों के बंटवारे की व्यवस्था के तहत भाजपा ने कालपी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ा, क्योंकि यह सीट उसके क्षेत्रीय सहयोगी निषाद पार्टी के हिस्से में गई थी. समाजवादी पार्टी ने यह चुनाव मामूली अंतर से जीता. विनोद चतुर्वेदी को 69,782 वोट मिले, जबकि निषाद पार्टी के उम्मीदवार छोटे सिंह को 66,966 वोट मिले. इस तरह जीत का अंतर 2,816 वोट रहा.

लोकसभा चुनावों के दौरान मतदान के रुझान भी बदलती राजनीतिक पसंद की ओर संकेत करते हैं. 2009 में कालपी विधानसभा खंड में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर सिर्फ आठ वोटों की बढ़त बनाई थी. इसके बाद 2014 में भाजपा तीसरे स्थान से आगे बढ़ी और बसपा पर 54,618 वोटों की बढ़त बनाई. 2019 में भी भाजपा ने अपनी बढ़त कायम रखी, हालांकि उसका अंतर घटकर 16,522 वोट रह गया. 2024 में समाजवादी पार्टी आगे निकल गई. उसके जालौन लोकसभा उम्मीदवार नारायण दास अहिरवार को कालपी खंड में 107,057 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार भानु प्रताप सिंह वर्मा को 88,887 वोट मिले. इस तरह कालपी खंड में समाजवादी पार्टी को 18,170 वोटों की बढ़त मिली.

कालपी में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 354,615 से बढ़कर 2017 में 377,554 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 383,738 हो गई. 2022 में यह संख्या 395,717 और 2024 में 400,606 रही. 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 362,495 मतदाता दर्ज हुए. यह 2024 के आंकड़े से 38,111 कम है, यानी 9.56 प्रतिशत की कमी हुई है.

कालपी में विधानसभा चुनावों के दौरान मतदान प्रतिशत आमतौर पर अधिक रहा है, लेकिन लोकसभा चुनावों में इसमें गिरावट देखने को मिली है. 2012 में मतदान प्रतिशत 62.76 रहा और 2017 में यह 60.77 प्रतिशत था. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत 57.86 रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 60.05 हो गया, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 55.25 प्रतिशत रह गया.

कालपी एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत कम है. अनुमान के अनुसार इसकी आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी करीब 9.40 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी करीब 26.75 प्रतिशत है. सामाजिक संरचना में ठाकुर, ब्राह्मण, पाल, कुशवाहा, लोधी और यादव जैसी ओबीसी समुदायों की मौजूदगी है. इसके अलावा जाटव और अन्य अनुसूचित जाति समूह भी महत्वपूर्ण हैं. चुनावी विश्लेषणों में इस्तेमाल किए जाने वाले अनुमानों के अनुसार ठाकुर करीब 10.82 प्रतिशत, पाल 8.43 प्रतिशत, ब्राह्मण 7.73 प्रतिशत, जाटव 16.85 प्रतिशत और मुस्लिम करीब 8.58 प्रतिशत हैं. कालपी में निषाद समुदाय की भी महत्वपूर्ण मौजूदगी है. यह नदी किनारे रहने वाला समुदाय पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने और नाव चलाने से जुड़ा रहा है, खासकर यमुना के किनारे बसे गांवों में.

कालपी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है. अनुमान के अनुसार इसकी करीब 87.46 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है और 12.54 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, जिसमें कालपी नगर भी शामिल है. कृषि, पशुपालन और स्थानीय व्यापार यहां की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं. कालपी अपने हस्तनिर्मित कागज उद्योग के लिए भी जाना जाता है. इसका ऐतिहासिक संबंध स्वदेशी आंदोलन से रहा है और इसमें कपास के चिथड़ों, जूट, केले के रेशे और कृषि अपशिष्ट को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इस शिल्प को उत्तर प्रदेश के लिए भौगोलिक संकेतक प्राप्त है.

कालपी इस क्षेत्र के सबसे पुराने नगरों में से एक है और पारंपरिक रूप से इसे कल्पप्रिय नगरी के नाम से जाना जाता है. प्राचीन विवरण इसे राजा वासुदेव से जोड़ते हैं, हालांकि इन परंपराओं में इतिहास और किंवदंती दोनों का मिश्रण है. यमुना के किनारे इसकी स्थिति ने इसे व्यापार और सैन्य नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण बनाया. कालपी पर दिल्ली सल्तनत, क्षेत्रीय हिंदू शासकों और बुंदेलों का शासन रहा, जिसके बाद 1803 में यह ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया. बाद में यह बुंदेलखंड एजेंसी का हिस्सा बना और 1818 से 1824 तक इसके मुख्यालय के रूप में कार्य किया.

1857-58 के विद्रोह के इतिहास में कालपी को महत्वपूर्ण स्थान मिला. मई 1858 में ह्यू रोज के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना ने नगर के पास झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और अन्य विद्रोही नेताओं से जुड़ी भारतीय सेनाओं को पराजित किया. इसके बाद ब्रिटिशों ने पुराने किलेबंदी ढांचे को नष्ट कर दिया. कालपी में बचे ऐतिहासिक स्मारकों में चौरासी गुंबद और लंका मीनार शामिल हैं.

कालपी सड़क और रेल दोनों माध्यमों से जुड़ा हुआ है. कालपी का अपना रेलवे स्टेशन झांसी-कानपुर रेल मार्ग पर है, जबकि उरई रेलवे स्टेशन करीब 33 किलोमीटर और कानपुर सेंट्रल लगभग 70 किलोमीटर रेल दूरी पर है. सड़क मार्ग से कानपुर करीब 80 किलोमीटर और उरई करीब 35 किलोमीटर दूर है. मध्य प्रदेश का ग्वालियर करीब 250 किलोमीटर, लखनऊ करीब 160 किलोमीटर और झांसी करीब 140 किलोमीटर दूर है. प्रयागराज करीब 220 किलोमीटर, वाराणसी करीब 350 किलोमीटर और अयोध्या करीब 350 से 370 किलोमीटर सड़क दूरी पर है.

कालपी में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है. 2009 के बाद हुए सात प्रमुख चुनावों में दोनों दलों में से प्रत्येक ने तीन चुनावों में जीत या बढ़त दर्ज की है. हालांकि, संतुलन समाजवादी पार्टी की ओर थोड़ा झुका है, क्योंकि उसने 2022 का विधानसभा चुनाव जीता और 2024 के लोकसभा चुनाव में कालपी खंड में भाजपा पर बढ़त बनाई. दोनों में से किसी भी चुनाव में अंतर इतना बड़ा नहीं था कि यह कहा जा सके कि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की इस विधानसभा क्षेत्र में पकड़ समाप्त हो गई है.

बसपा भी एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है. 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे 64,683 वोट मिले थे, जो निषाद पार्टी से केवल 5,099 कम थे. यह संख्या 2024 के पिछले विधानसभा स्तर के समर्थन में समाजवादी पार्टी को मिले वोटों से भी अधिक थी. राजनीतिक निष्ठाओं के बदलते इतिहास के कारण कालपी में किसी एक चुनाव को निर्णायक संकेत के रूप में देखना कठिन है. 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण ने मतदाता संख्या के आकार में भी बदलाव किया है, हालांकि इसका राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा.

भाजपा के पास आत्मविश्वास बनाए रखने के कारण हैं, खासकर यदि वह 2027 में खुद इस सीट पर चुनाव लड़ती है. वहीं समाजवादी पार्टी के पास मौजूदा विधायक के रूप में लाभ और कालपी खंड में 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त का मनोवैज्ञानिक लाभ है. बसपा की लगातार मौजूदगी दोनों दलों के लिए चुनावी गणित को और जटिल बनाती है. तीन दलों के अंतिम चुनावी गणित को प्रभावित करने में सक्षम होने के कारण 2027 में कालपी में एक और करीबी मुकाबले की स्थिति बनी हुई है.

(अजय झा)

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कालपी विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Vinod Chaturvedi

SP
वोट69,782
विजेता पार्टी का वोट %29.5 %
जीत अंतर %1.2 %

कालपी विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Chhote Singh

    NINSHAD

    66,966
  • Shyam Pal Urf Chunna Pal

    BSP

    64,683
  • Umakanti

    INC

    15,195
  • Ainul Hasan Mansoori

    IND

    8,146
  • Jishan

    JANADIP

    2,470
  • Nota

    NOTA

    1,706
  • Shyam Kishor

    IND

    1,696
  • Sundar

    IND

    1,414
  • Anjana Devi

    IND

    1,114
  • Veerendra Singh Parihar

    RSTJNMN

    1,091
  • Arun Kumar

    DESP

    1,091
  • Rajiv Kumar

    CPI(ML)(L)

    570
  • Rohit Tripathi

    RAPI

    499
  • Rais Ahmad

    RVLP

    318
WINNER

Ku. Narendra Pal Singh

BJP
वोट1,05,988
विजेता पार्टी का वोट %46.2 %
जीत अंतर %22.4 %

कालपी विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Chhote Singh

    BSP

    54,504
  • Umakanti

    INC

    53,160
  • Balgovind

    IND

    6,468
  • Nota

    NOTA

    2,356
  • Rahul Sharma

    RLD

    1,883
  • Raja Rudravan Singh

    SARSAMP

    1,265
  • Nitesh Kumar

    JAPL

    1,073
  • Jasram Singh

    IND

    1,022
  • Shiv Veer Singh

    CPI(ML)(L)

    809
  • Anjani

    SWAJANPA

    803
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कालपी विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

कालपी विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में कालपी में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के कालपी विधानसभा चुनाव सीट पर Vinod Chaturvedi को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

कालपी विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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