लाल से नीली हुई सपा की ड्रेस... अखिलेश की इस रणनीति के पीछे आखिर दांव क्या है

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले दलित वोटरों और जेन-जी को साधने के लिए अखिलेश यादव ने बड़ा दांव चला है. सपा प्रमुख ने अपनी 'पीडीए' रणनीति को धार देते न केवल खुद नीला गमछा धारण किया, बल्कि सपा छात्र सभा का नया ड्रेस कोड भी नीला तय कर दिया है.

Advertisement
नीला गमछा पहने सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Photo-X) नीला गमछा पहने सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Photo-X)

समर्थ श्रीवास्तव / कुबूल अहमद

  • लखनऊ/नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:48 AM IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश बढ़ने के साथ ही सपा के तेवर और कलेवर दोनों में बदलाव दिख रहा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव महानगर और जिला अध्यक्षों की बैठक में लाल रंग की जगह नीले रंग का गमछा गले में डाले नजर आए. अब सपा ने छात्र सभा के नेताओं के लिए नया ड्रेस कोड तय किया है, जो नीले रंग का होगा.

Advertisement

अखिलेश यादव ने सपा छात्र सभा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए नीली शर्ट और नीली पैंट या फिर नीली टी-शर्ट और नीली जींस पहनने के दिशा-निर्देश तय किए हैं. अखिलेश के इस कदम की राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है.

सपा नेता आमतौर पर सफेद कुर्ता-पायजामा, लाल टोपी और लाल गमछा पहने नजर आते हैं. पारंपरिक रूप से सपा नेताओं की यही पहचान मानी जाती है, जबकि नीला रंग आमतौर पर बसपा का प्रतीक माना जाता है. यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव द्वारा सपा छात्र सभा का ड्रेस कोड बदले जाने के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं.

सपा छात्र सभा का ड्रेस कोड बदला

दलित वोटरों और जेन-जी (Gen-Z) को साधने में जुटी सपा ने पार्टी की छात्र सभा के ड्रेस कोड में बदलाव किया है. पार्टी ने छात्र सभा के पदाधिकारियों के लिए नीली जींस और नीली टी-शर्ट को नया ड्रेस कोड बनाया है. मंगलवार को लखनऊ में आयोजित छात्र सभा के सम्मेलन में पदाधिकारी और कार्यकर्ता इसी नई ड्रेस में नजर आएंगे.

Advertisement

अखिलेश यादव के इस बदलाव को सिर्फ संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि दलित युवाओं के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है, नई ड्रेस के जरिए समाजवादी पार्टी सीधे कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और युवा राजनीति में सक्रिय दलित-पिछड़े युवाओं को यह संकेत देना चाहती है कि उनकी पहचान और प्रतीकों को सम्मान दिया जा रहा है.

समाजवादी पार्टी पर चढ़ता नीला रंग

उत्तर प्रदेश की सियासत में रंगों का अपना अलग महत्व रहा है. बसपा का नारा हुआ करता था, 'नीला झंडा, हाथी निशान, यही है बसपा की पहचान.' नीला रंग दलित राजनीति और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा का प्रतीक माना जाता है, जबकि समाजवादी पार्टी की पहचान परंपरागत रूप से लाल और हरे रंग से जुड़ी रही है.

2019 के लोकसभा चुनाव से सपा पर बसपा का रंग चढ़ना शुरू हुआ. इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी लोहिया और जेपी की विचारधारा को मानती रही है, लेकिन लोहिया के साथ डॉ. आंबेडकर और कांशीराम के विचारों को भी अखिलेश यादव अपनाने की बात करते हैं.

लखनऊ में पार्टी मुख्यालय में 31 अगस्त को सपा जिला और महानगर अध्यक्षों की बैठक में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव गले में नीला गमछा डाले नजर आए, जबकि उससे पहले तक वे लाल रंग की लाइनिंग वाला गमछा पहनते थे। अब छात्र सभा के लिए नीले रंग का ड्रेस कोड तय किया गया है.

Advertisement

नीले रंग के बहाने सपा क्या संदेश दे रही?

अखिलेश यादव पिछले कुछ वर्षों से अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़कर दलित वोट बैंक में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के फॉर्मूले का अखिलेश को फायदा भी मिला था, जिसे 2027 में भी अपनाए रखने का प्लान है. ऐसे में अखिलेश यादव बसपा पर सीधे हमले करने से बचते रहे हैं. वे बार-बार पीडीए फॉर्मूले पर जोर दे रहे हैं.

सपा अपने आधार वोटरों (पिछड़ा और अल्पसंख्यक) के साथ अब तक बसपा के आधार वोटर माने जाने वाले (दलित) मतदाताओं को जोड़ना चाहती है और इसके लिए हर तरह की जुगत लगा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा ने छात्र सभा के ड्रेस कोड के जरिए सीधे युवा दलित वर्ग को संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अब सिर्फ पिछड़े वर्गों की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सामाजिक न्याय की व्यापक राजनीति का दावा कर रही है.

आंबेडकरवादियों को साधने का प्लान

2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए, संविधान और आरक्षण के मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर अखिलेश कुछ हद तक दलित और पिछड़ा वर्ग के वोटरों को एक साथ अपनी ओर खींचने में कामयाब हुए थे. अब उनकी कोशिश इस समर्थन को 2027 के विधानसभा चुनाव तक कायम रखने और बढ़ाने की है. खुद नीले गमछे में नजर आकर और सपा छात्र सभा के ड्रेस कोड में नीले रंग को शामिल करके वे यही प्रयास करते दिख रहे हैं.

Advertisement

नीला रंग केवल एक दल विशेष का नहीं, बल्कि अंबेडकरवादी आंदोलन और संविधान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है. सपा इसे अपनाकर खुद को संविधान का सबसे बड़ा रक्षक प्रस्तुत कर रही है. इसके साथ ही पार्टी की पुरानी छवि को बदलते हुए एक ऐसे व्यापक मंच का रूप देने का प्रयास है, जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग खुद को सहज महसूस कर सकें. अखिलेश यादव का यह कदम केवल 'ड्रेस कोड' का बदलाव नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की भावी राजनीति में एक बड़े सामाजिक और वैचारिक पुनर्गठन का संकेत है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »