मथुरा में आयोजित ‘पंचायत आजतक’ के मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पिछली सरकारों पर शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को लेकर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 से पहले प्रदेश में नकल और नौकरियों में सेंध लगाने का माहौल था. उस दौर में योग्यता से ज्यादा पर्ची को महत्व दिया जाता था, जबकि विवेक से ज्यादा फतवे और भारत की विरासत से ज्यादा एक परिवार की चाटुकारिता को प्राथमिकता दी जाती थी.
मुख्यमंत्री योगी ने पिछली सरकार के कार्यकाल पर हमला बोलते हुए कहा कि उस समय नकल करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार और हर नौकरी में सेंध लगाना जैसी स्थिति थी. उन्होंने उस दौर को अंधेर नगरी, चौपट राजा बताते हुए कहा कि चारों ओर अराजकता थी. उत्तर प्रदेश अब उस दौर से निकल चुका है. पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में पॉलिसी पैरालिसिस नहीं है और निवेश से जुड़े फैसले तेजी से लिए जा रहे हैं.
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में स्कूलों की स्थिति बेहद खराब थी. कहीं विद्यालय भवन जर्जर थे तो कहीं शिक्षक नहीं थे. शिक्षक थे तो जरूरी सुविधाएं नहीं थीं. उस समय बालक-बालिकाओं की स्कूल छोड़ने की दर 19 से 20 फीसदी तक थी. हमने प्रदेश का दौरा कर बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की स्थिति देखी. कई बच्चे नंगे पैर और फटे कपड़ों में स्कूल आने को मजबूर थे. स्कूलों में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय तथा पेयजल की सुविधा तक नहीं थी.
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उन्होंने बताया कि 2017 में सरकार ने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ अभियान शुरू किया. इसके तहत बेसिक शिक्षा परिषद के 1.46 लाख विद्यालयों में से 1.36 लाख विद्यालयों में कक्षाओं, शौचालय, पेयजल, डिजिटल प्रयोगशाला, स्मार्ट क्लास और फर्नीचर जैसी सुविधाओं को दुरुस्त किया गया.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार 1.60 करोड़ बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध करा रही है. स्कूल छोड़ने की दर 19-20 फीसदी से घटकर तीन फीसदी से नीचे आ गई है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के स्कूल बंद किए जाने के आरोपों पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि स्कूल बंद नहीं किए गए, बल्कि उन्हें अपग्रेड किया गया है.
योगी ने कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले ये विद्यालय कक्षा छह से आठ तक चलते थे. सरकार ने इन्हें 12वीं तक करने का फैसला किया, ताकि गरीब परिवारों की बेटियों को आगे की पढ़ाई का अवसर मिल सके. उन्होंने कहा कि पहले 446 विकासखंडों में यह व्यवस्था थी, जबकि अब प्रदेश के सभी 825 विकासखंडों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय उपलब्ध कराने की कार्रवाई शुरू की गई है.
उन्होंने पीएम श्री विद्यालय और सीएम कंपोजिट विद्यालयों का भी जिक्र किया. योगी ने कहा कि सीएम कंपोजिट विद्यालयों में पहली से 12वीं तक की पढ़ाई एक ही परिसर में कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है.
'बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खान में फर्क नहीं पता था'
मुख्यमंत्री योगी ने सपा सरकार के एक तत्कालीन शिक्षा मंत्री का किस्सा सुनाते हुए कहा कि गोरखपुर में क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर पार्क के उद्घाटन के दौरान मंत्री ने कथित तौर पर उन्हें शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान समझ लिया था. जब उन्हें बताया गया कि यह उस्ताद बिस्मिल्ला खान नहीं, बल्कि क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल हैं, मंत्री ने जवाब दिया- तुम भाजपाई हो, इसलिए पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का नाम ले रहे हो.
इसी घटना का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि जिस व्यक्ति को क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खान के नाम में अंतर न पता हो, वह उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा को कहां ले गया होगा, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है.
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