उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पूरी तरह से सक्रिय हो गई हैं. बसपा के खिसके हुए जनाधार को वापस लाने के लिए मायावती ने पहले अपने भतीजे आकाश आनंद को चुनाव प्रचार में उतारा और अब सर्वसमाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का प्रमुख ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले सतीश चंद्र मिश्रा को फ्रंटफुट पर लाने का प्लान तैयार किया है.
यूपी में चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही मायावती ने सतीश चंद्र मिश्रा के लिए एक नया रोल तय किया है. इसे ब्राह्मण मतदाताओं को एक बार फिर बसपा के पाले में लाने की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
मायावती इन दिनों बसपा के संभावित उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं. विधानसभा स्तर पर आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलनों में प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी की जा रही है. बसपा की इस आक्रामक रणनीति और सर्वसमाज को साधने के तहत ही सतीश चंद्र मिश्रा को आगे बढ़ाने का दांव चला गया है.
बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी देते हुए कहा कि बहुजन समाज पार्टी के लंबे समय से राष्ट्रीय महासचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता और बसपा शासनकाल में यूपी के महाधिवक्ता रहे सतीश चंद्र मिश्रा को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं.
मायावती ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के कई बार अध्यक्ष, बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री और कई बार राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। उन्हें पार्टी द्वारा लीगल और मीडिया के साथ-साथ अब चुनाव आयोग (Election Commission) से संबंधित कार्यों का भी महत्वपूर्ण प्रभार सौंपा गया है, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी भूमिका कई मायनों में अहम रहेगी,
2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाले अपने प्रसिद्ध 'सोशल इंजीनियरिंग' मॉडल को मायावती एक बार फिर दोहराने की तैयारी में हैं. पार्टी ने सर्वसमाज, विशेष रूप से ब्राह्मण समाज को साधने के लिए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर टिकट देना शुरू कर दिया है. अब सतीश चंद्र मिश्रा को चुनावी प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी सौंपकर बसपा ने ब्राह्मण समाज के बीच एक बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है.
मायावती ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर बसपा के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूती लाई जा रही है. इसके साथ ही पार्टी उम्मीदवारों के चयन और विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों में उनके नामों की घोषणा करने की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने दावा किया कि बसपा की इस सक्रियता से विरोधी दलों में काफी बेचैनी है और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी सहित अन्य विपक्षी दलों की रणनीति में बदलाव होना स्वाभाविक है.
बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि 2007 की तर्ज पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य से पार्टी सर्वसमाज में से, खासकर ब्राह्मण समाज के नेताओं को प्राथमिकता के साथ उम्मीदवार बना रही है. जब से पार्टी ने ब्राह्मण समाज को टिकट देने की प्रक्रिया शुरू की है, तब से विरोधी दलों में इसको लेकर चर्चाएं और चिंताएं दोनों साफ दिखाई दे रही हैं. ऐसे में उन्होंने 'बहुजन समाज' के लोगों से विरोधी पार्टियों के हथकंडों से लगातार सजग और सतर्क रहने की अपील की है.
आशीष श्रीवास्तव / कुमार अभिषेक