उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में बसा बुलंदशहर ऐतिहासिक विरासत, गंगा-यमुना के बीच अपनी भौगोलिक स्थिति, खुर्जा की मशहूर सिरेमिक पॉटरी, धार्मिक स्थलों और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है. दिल्ली से नजदीकी इसे रणनीतिक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है. जिले का इतिहास प्राचीन बस्तियों और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है, वहीं नरौरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र और खुर्जा का सिरेमिक उद्योग इसकी आधुनिक पहचान के अहम हिस्से हैं.
कहां है बुलंदशहर और कैसे बना जिले की पहचान
बुलंदशहर उत्तर प्रदेश के मेरठ मंडल में स्थित है. यह दिल्ली से लगभग 64 किलोमीटर से कम दूरी पर है. जिले के पूर्व में गंगा नदी और पश्चिम में यमुना नदी इसकी भौगोलिक पहचान का हिस्सा हैं. इसके आसपास गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, अलीगढ़ जैसे बड़े पड़ोसी जिले स्थित हैं. जिला प्रशासन के इतिहास संबंधी विवरण में बुलंदशहर के प्राचीन नाम बरन का उल्लेख मिलता है. आधिकारिक वेबसाइट पर प्रचलित ऐतिहासिक विवरण के मुताबिक, राजा अहिबरन ने यहां एक स्तंभ या दुर्गनुमा संरचना की नींव रखी थी. ऊंचाई पर स्थित होने के कारण इस स्थान का नाम बुलंदशहर पड़ा. जिले के भटौरा वीरपुर और गालिबपुर जैसे स्थानों से प्राचीन अवशेष मिलने का भी उल्लेख सरकारी इतिहास पेज पर किया गया है.
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भी रहा योगदान
बुलंदशहर का इतिहास सिर्फ प्राचीन बस्तियों तक सीमित नहीं है. जिला प्रशासन के अनुसार, 1857 में अंग्रेजी शासन के खिलाफ उठे विद्रोह का असर इस क्षेत्र में भी दिखाई दिया था. सरकारी विवरण में 10 मई 1857 को अलीगढ़ से पंडित नारायण शर्मा के जरिए बुलंदशहर तक स्वतंत्रता संघर्ष का संदेश पहुंचने का उल्लेख है. इसमें दादरी और सिकंदराबाद क्षेत्र के गुर्जरों द्वारा अंग्रेजी शासन से जुड़े प्रतिष्ठानों और इमारतों को निशाना बनाए जाने की बात भी दर्ज है. यह इतिहास बुलंदशहर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में शामिल करता है, जहां 1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ था.
खुर्जा की पॉटरी ने दिलाई देश-दुनिया में पहचान
बुलंदशहर की पहचान की बात हो और खुर्जा की पॉटरी का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है. खुर्जा को सिरेमिक उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है. यहां मिट्टी और सिरेमिक से बर्तन, क्रॉकरी, सजावटी सामान और दूसरे उत्पाद बनाए जाते हैं. भारत सरकार के सीएसआईआर-केंद्रीय काँच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्थान (CGCRI) के अनुसार, संस्थान का खुर्जा केंद्र अगस्त 1981 में स्थापित किया गया था. इसका उद्देश्य सिरेमिक उद्योग, खासकर लघु और ग्रामीण क्षेत्र की इकाइयों के विकास में मदद करना है. संस्थान की वेबसाइट खुर्जा में पारंपरिक पॉटरी निर्माण और सिरेमिक उद्योग के आधुनिकीकरण में इसके योगदान का भी उल्लेख करती है. उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन पोर्टल पर भी खुर्जा पॉटरी को जिले की प्रमुख हस्तशिल्प पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया है.
नरौरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी है जिले में
बुलंदशहर का औद्योगिक और वैज्ञानिक महत्व नरौरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की वजह से भी है. भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, नरौरा परमाणु ऊर्जा केंद्र बुलंदशहर जिले में स्थित है. यहां दो रिएक्टर हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 220 मेगावाट है. दोनों इकाइयों की वाणिज्यिक शुरुआत क्रमशः 1991 और 1992 में हुई थी. यह संयंत्र जिले को केवल कृषि और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि देश के ऊर्जा उत्पादन से भी जोड़ता है.
गंगा किनारे बसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल
बुलंदशहर में धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े कई स्थल हैं. आहार जो गंगा किनारे स्थित अवंतिका देवी मंदिर और शिव मंदिर के लिए जाना जाता है. अनूपशहर गंगा तट पर बसा धार्मिक महत्व का कस्बा है, जहां स्नान और धार्मिक आयोजन होते रहते हैं. कर्णवास में कल्याणी देवी मंदिर स्थित है. इसे महाभारत के कर्ण से जुड़ी परंपरा के संदर्भ में देखा जाता है. बेलोन में बेलोन देवी मंदिर है. राजघाट भी गंगा तट पर स्थित धार्मिक स्थल है, जहां हनुमान मंदिर है. नरौरा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के अलावा गंगा पर बने बैराज और आसपास के क्षेत्र के कारण भी महत्वपूर्ण है.
जिले की अर्थव्यवस्था: खेती से लेकर उद्योग तक
बुलंदशहर की अर्थव्यवस्था में कृषि, छोटे उद्योग और विनिर्माण की अहम भूमिका है. जिले में गेहूं, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा, कपास और गन्ने जैसी फसलों की खेती प्रमुख है. खुर्जा में सिरेमिक और क्रॉकरी उद्योगों के अलावा जहांगीराबाद में बुनाई और कपड़े से जुड़े काम तथा सिकंदराबाद में औद्योगिक गतिविधियां प्रमुख हैं. सिकंदराबाद के औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की औद्योगिक इकाइयां मौजूद हैं. यहां कपड़ा, पेंट, दवा, सीमेंट, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े भी बहुत काम होते हैं. बुलंदशहर का क्षेत्रफल 4,353 वर्ग किलोमीटर है. जिले में सात तहसीलें, 16 विकासखंड और 1,246 राजस्व गांव दर्ज हैं. यहां 951 ग्राम पंचायतें भी हैं. जनसंख्या के मामले में 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी 34,99,171 थी.
बुलंदशहर का चुनावी गणित: सात विधानसभा सीटें
बुलंदशहर जिले में सात विधानसभा क्षेत्र हैं. 2022 के चुनाव में सभी सातों सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीती थी. सिकंदराबाद में लक्ष्मी राज सिंह, बुलंदशहर में प्रदीप कुमार चौधरी, स्याना में देवेंद्र सिंह लोधी, अनूपशहर में संजय कुमार शर्मा, डिबाई में चंद्रपाल सिंह, शिकारपुर में अनिल शर्मा और खुर्जा में मीनाक्षी सिंह सिंह जीत कर विधानसभा पहुंचीं थीं. वहीं बुलंदशहर लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. भोला सिंह विजयी रहे.
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