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सिकंदराबाद विधानसभा चुनाव 2027 (Sikandrabad Assembly Election 2027)

सिकंदराबाद, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले का एक सब-डिविजन स्तर का शहर है. इसका अपना म्युनिसिपल बोर्ड है और यह ग्रेटर नोएडा से सटा हुआ, दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का हिस्सा है. इसका इतिहास मुगल काल से भी पहले का है. यहां बसने और व्यापार के कई दौर चले, जिन्होंने इस शहर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दिल्ली से जोड़ने वाले सड़क और नदी

मार्गों से जोड़ा.

1957 के चुनावों से पहले बना सिकंदराबाद एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है. यह गौतम बुद्ध नगर लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें सिकंदराबाद तहसील और आसपास के कई इलाके शामिल हैं, जिनमें अगौटा और गुलाओठी क्षेत्रों की कुछ पोलिंग और प्रशासनिक इकाइयां भी हैं. इन सबके कारण, NCR के पास होने के बावजूद, इस सीट का स्वरूप काफी हद तक ग्रामीण है.

सिकंदराबाद में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआती दशकों में कांग्रेस पार्टी का दबदबा था और उसने पांच बार यह सीट जीती. वहीं, हाल के वर्षों में BJP ने चार जीत के साथ सिकंदराबाद को अपना गढ़ बना लिया है. 2012 से BJP यहां लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीती है और अजेय रही है. निर्दलीय, जनता दल और BSP ने दो-दो बार जीत हासिल की है, जबकि जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार यह सीट जीती है.

2012 में BJP ने BSP से यह सीट छीन ली, जब उसकी उम्मीदवार बिमला सिंह सोलंकी ने BSP के सलीम अख्तर को बहुत कम अंतर (123 वोट) से हराया. सोलंकी ने 2017 में BSP के मोहम्मद इमरान को 28,623 वोटों के बड़े अंतर से हराकर BJP के लिए यह सीट बरकरार रखी. 2022 में BJP ने लक्ष्मी राज सिंह के रूप में एक नया चेहरा उतारा, जिन्होंने समाजवादी पार्टी के राहुल यादव को 29,343 वोटों से हराया. लक्ष्मी राज सिंह को 1,25,644 वोट मिले, जबकि राहुल यादव को 96,301 वोट मिले.

सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग का ट्रेंड लोकसभा चुनाव जैसा ही रहा है, जहां BJP काफी पीछे (तीसरे स्थान पर) रहने के बाद अब मजबूत स्थिति में आ गई है. 2009 में यहां समाजवादी पार्टी, BSP से 2,628 वोटों से आगे थी, जबकि BJP तीसरे स्थान पर रही थी. 2014 में BJP ने समाजवादी पार्टी पर 27,408 वोटों की बढ़त बनाई और 2019 में BSP पर 10,578 वोटों से आगे रही. वहीं, 2024 में BJP ने समाजवादी पार्टी पर 28,171 वोटों की बढ़त हासिल की. इस हिस्से में BJP के डॉ. महेश शर्मा को 105,966 वोट मिले और समाजवादी पार्टी के डॉ. महेंद्र सिंह नागर को 77,795 वोट मिले.

पिछले दशक में सिकंदराबाद के वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी, हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में इसमें थोड़ी कमी आई. रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या 2012 में 338,407, 2017 में 375,293, 2019 में 382,466 और 2022 में 399,747 थी, जबकि 2024 में यह संख्या 399,091 रही. वोटिंग का प्रतिशत काफी अच्छा रहा है- 2012 में 60.68%, 2017 में 67.14%, 2019 में 65.61%, 2022 में 68.50% और 2024 में 60.95%.

सिकंदराबाद हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी काफी है. यहां सैनी समुदाय के साथ-साथ गुर्जर, जाट और अनुसूचित जाति के वोटर भी अहम भूमिका निभाते हैं. अनुमानों के मुताबिक, अनुसूचित जाति के वोटर कुल वोटरों का लगभग 21.17% हैं. यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण है, और यहां शहरी वोटरों की तुलना में ग्रामीण वोटरों की संख्या ज्यादा है.

आने वाले सालों में सिकंदराबाद का ग्रामीण स्वरूप बदलने की संभावना है, क्योंकि प्रस्तावित 'न्यू नोएडा' टाउनशिप के लिए चुने गए 80 गांवों में से लगभग 60 गांव सिकंदराबाद तहसील के अंतर्गत आते हैं. इस विकास कार्य से जमीन के इस्तेमाल में बड़े बदलाव आएंगे, नया निवेश होगा, नई सड़कें और सर्विस कॉरिडोर बनेंगे, और स्थानीय किसानों के लिए मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े अहम मुद्दे सामने आएंगे. 1498 में सिकंदर लोदी द्वारा बसाया गया सिकंदराबाद, बाद में अकबर के शासनकाल में एक 'महल' (प्रशासनिक इकाई) का मुख्यालय बना और नजीब-उद-दौला की जागीर का केंद्र भी रहा, जिससे इस इलाके के राजनीतिक और सैन्य इतिहास में इसे एक खास जगह मिली. 1736 में, अवध के वायसराय सआदत खान ने सिकंदराबाद में मौजूद सेना पर हमला किया और उसे हरा दिया. 1764 में यहां फिर से सैन्य हलचल हुई, जब भरतपुर की जाट सेना ने सूरजमल की मौत और महाराजा सवाई जवाहर की हार के बाद यमुना पार पीछे हटने से पहले यहां डेरा डाला था. बाद में अलीगढ़ की लड़ाई के बाद पेरॉन की ब्रिगेड ने इस पर कब्जा कर लिया. 1857 के विद्रोह के दौरान, 27 सितंबर 1857 को कर्नल एडवर्ड ग्रेटहेड के वहां पहुंचने से पहले, सिकंदराबाद के साथ आस-पास के गुर्जर, राजपूत और मुस्लिम समुदाय भी जुड़ गए थे. शहर में कई खास इमारतें भी थीं, जिनमें शहर के बाहर तहसील और पुलिस स्टेशन वाली एक किलेनुमा इमारत, एक चैरिटेबल डिस्पेंसरी, एक एंग्लो-वर्नाक्यूलर स्कूल और चर्च ऑफ इंग्लैंड मिशन की एक शाखा शामिल थी. साथ ही, यहां की मस्जिदों और मंदिरों ने शहर की स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को और समृद्ध किया.

ऐतिहासिक रूप से, सिकंदराबाद यमुना क्षेत्र को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भीतरी इलाकों से जोड़ने वाले रास्तों पर एक बाजार और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ. यमुना के पास होने के कारण यहां की खेती और मौसमी बाढ़ के पैटर्न पर भी असर पड़ा है. यहां की जमीन इस इलाके के आम जलोढ़ मैदान जैसी है, जहां की उपजाऊ मिट्टी ने हाल के दौर में हुए व्यवसायीकरण से पहले खेती-बाड़ी पर आधारित जीवन-यापन में मदद की थी. आर्थिक नजरिए से देखें तो इस इलाके में खेती के साथ-साथ छोटे उद्योग, व्यापार और सेवाएं भी हैं जो आस-पास के ग्रामीण इलाकों और मौसमी बाजारों की जरूरतें पूरी करती हैं. NCR के पास होने की वजह से यहां लॉजिस्टिक्स और जमीन के विकास में भी दिलचस्पी बढ़ी है.

सड़क संपर्क में स्टेट हाईवे और जिले की सड़कें शामिल हैं जो सिकंदराबाद को बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से जोड़ती हैं. यह शहर अहम क्षेत्रीय रेल रूट पर भी बसा है, जहां यात्री और माल ढुलाई के लिए स्टेशन मौजूद हैं. नोएडा-ग्रेटर नोएडा कॉरिडोर से बेहतर मेट्रो/रैपिड ट्रांजिट कनेक्टिविटी के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई है, हालांकि इसे लागू करने की समय-सीमा अभी तय नहीं हुई है.

दूरी के हिसाब से देखें तो जिला मुख्यालय बुलंदशहर सिकंदराबाद से लगभग 17 किमी दूर है, ग्रेटर नोएडा लगभग 20 किमी, नोएडा लगभग 35 किमी, गाजियाबाद लगभग 45 किमी, मेरठ लगभग 65 किमी, खुर्जा लगभग 30 किमी, अलीगढ़ लगभग 70 किमी, आगरा लगभग 125 किमी, दिल्ली लगभग 50 किमी, हरियाणा का हिसार लगभग 180 किमी और राज्य की राजधानी लखनऊ सड़क मार्ग से लगभग 350 किमी दूर है.

2012 से सिकंदराबाद में BJP का दबदबा रहा है. पार्टी ने तीन बार विधानसभा सीट जीती है और पिछले तीन लोकसभा चुनावों में भी सबसे आगे रही है. इस रिकॉर्ड के साथ-साथ हाल के आर्थिक बदलाव और 'न्यू नोएडा टाउनशिप प्रोजेक्ट' से स्थानीय निवासियों और किसानों को बड़े फायदे की उम्मीद ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सिकंदराबाद में पार्टी की स्थिति को और मजबूत किया है. अगर बिखरा हुआ विपक्ष BJP से यह सीट छीनना चाहता है, तो उसे एकजुट होकर एक मजबूत स्थानीय मुद्दा पेश करना होगा.

(अजय झा)

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सिकंदराबाद विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Lakshmi Raj

BJP
वोट1,25,644
विजेता पार्टी का वोट %46 %
जीत अंतर %10.7 %

सिकंदराबाद विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Rahul Yadav

    SP

    96,301
  • Manveer Singh

    BSP

    42,634
  • Saleem Akhtar Khan

    INC

    2,281
  • Dilshad Ahmad

    AIMIM

    1,732
  • Raju Thakur

    RSTJLKPS

    1,341
  • Nota

    NOTA

    1,195
  • Ajay Kumar

    LD

    685
  • Bablu

    IND

    528
  • Darshan Sharma

    AAAP

    472
  • Amit Singh Tomar

    SHS

    203
  • Ajay Kumar Sharma

    LOKJANP

    117
WINNER

Bimla Singh Solanki

BJP
वोट1,04,956
विजेता पार्टी का वोट %41.7 %
जीत अंतर %11.4 %

सिकंदराबाद विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Mohammad Imran

    BSP

    76,333
  • Rahul Yadav

    SP

    48,910
  • Asha Yadav

    RLD

    17,714
  • Bhanu Pratap Singh

    RJSNP

    1,224
  • Satish

    SWAJANPA

    1,059
  • Nota

    NOTA

    1,038
  • Sonvati Urf Somvati

    VP

    716
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सिकंदराबाद विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में सिकंदराबाद में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के सिकंदराबाद विधानसभा चुनाव सीट पर Lakshmi Raj को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

सिकंदराबाद विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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