बठिंडा: जिसका इब्न बतूता भी था दीवाना, वहां कौन मारेगा चुनावी बाज़ी?

बठिंडा पंजाब के सबसे पुराने इलाकों में से एक है. मालवा क्षेत्र में आने वाले इस जिले को पंजाब का पावर हाउस कहा जाता है. ना सिर्फ इतिहास, बल्कि राजनीति के लिहाज से भी ये सच में पावर हाउस है. बस देखना ये है कि पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में आखिर कौन यहां की पावर अपने हाथ में रखता है.

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बठिंडा इतिहास और राजनीति दोनों के हिसाब से जरूरी है. बठिंडा इतिहास और राजनीति दोनों के हिसाब से जरूरी है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:48 AM IST

पंजाब के दक्षिणी हिस्से में मालवा के बीच स्थित बठिंडा जिला अपनी ऐतिहासिक धरोहर, रणनीतिक अहमियत, कृषि, उद्योग और राजनीतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है. पंजाब के पुराने और तेजी से विकसित होते शहरों में शामिल बठिंडा शिक्षा और व्यापार का भी केंद्र है. बिजली संयंत्रों और झीलों के कारण इसे पंजाब का 'पावर हाउस' और 'झीलों का शहर' कहा जाता है.

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पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिहाज से भी बठिंडा की अहमियत बनी हुई है. जिले में बठिंडा अर्बन, बठिंडा ग्रामीण, रामपुरा फूल, भुच्चो मंडी और तलवंडी साबो जैसी प्रमुख विधानसभा सीटें हैं. रोजगार, पानी की निकासी और कृषि संकट यहां के मुख्य मुद्दों में शामिल हैं.

सदियों पुराना है बठिंडा का इतिहास

बठिंडा का इतिहास सदियों पुराना है और इसका संबंध प्राचीन राजाओं और मुस्लिम इतिहासकारों के लेखों से जुड़ा है. ऐतिहासिक दस्तावेजों और इतिहासकार रावरती के मुताबिक प्राचीन काल में बठिंडा को 'तबरहिंद' के नाम से जाना जाता था. यात्री इब्न बतूता ने भी अपने यात्रा वृत्तांतों में इस क्षेत्र का उल्लेख 'बत्रिंद' के रूप में किया है.

बठिंडा की धरती ने इतिहास के कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं. यहां का ऐतिहासिक किला मुबारक इसका गवाह है. सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी यहां आए थे, जबकि रजिया सुल्तान को यहां बंदी जीवन का सामना करना पड़ा था. यह जिला स्वतंत्रता सेनानियों, संतों और जुझारू लोगों की भूमि रहा है. प्रशासनिक रूप से यह नवगठित फरीदकोट राजस्व आयुक्त मंडल के तहत आता है.

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बठिंडा की प्रशासनिक और भौगोलिक बनावट

बठिंडा जिला पंजाब के दक्षिण में स्थित है और इसका मुख्यालय बठिंडा है. जिले में बठिंडा, रामपुरा फूल और तलवंडी साबो समेत कुल 3 तहसीलें और 8 विकास खंड हैं.

दक्षिण में इसकी सीमा हरियाणा के सिरसा और फतेहाबाद जिलों से मिलती है. पूर्व में संगरूर और मानसा, उत्तर-पूर्व में मोगा और उत्तर-पश्चिम में फरीदकोट और श्री मुक्तसर साहिब जिले इसकी सीमा से लगते हैं.

2011 की जनगणना में क्या रहे आंकड़े?

भारत की 2011 की जनगणना के मुताबिक बठिंडा जिले की कुल आबादी 13,88,859 थी. जिले का जनसंख्या घनत्व 414 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था. लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 865 महिलाओं का था, जबकि साक्षरता दर 69.6% दर्ज की गई थी.

जिले में मुख्य रूप से सिख और हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं. यहां की मुख्य भाषा पंजाबी है, जो मालवा के खास लहजे में बोली जाती है.

2022 के चुनाव में सीटों पर रहा कड़ा मुकाबला

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिहाज से बठिंडा जिले की राजनीतिक जमीन पर लगातार हलचल रहती है. जिले की महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर सभी राजनीतिक दलों की नजर रहती है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी यहां की सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला था.

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बठिंडा अर्बन जिले की प्रमुख सीटों में शामिल है. 2022 के चुनाव में यहां राजनीतिक दिग्गजों और प्रमुख दलों के बीच मुकाबला हुआ था. मनप्रीत सिंह बादल कांग्रेस पार्टी के प्रमुख उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे.

बठिंडा ग्रामीण अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है. 2022 के चुनाव में यहां आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अमित रतन कोटफट्टा ने जीत दर्ज की थी और अपनी राजनीतिक मौजूदगी दिखाई थी.

रामपुरा फूल मालवा क्षेत्र की अहम सीट है. यहां स्थानीय मुद्दों और किसान आंदोलन का असर राजनीति पर साफ दिखाई देता है. भुच्चो मंडी भी अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है. 2022 में यहां आम आदमी पार्टी के जगसीर सिंह ने जीत हासिल की थी.

तलवंडी साबो सिखों के प्रमुख तख्तों में शामिल तख्त श्री दमदमा साहिब के कारण धार्मिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. 2027 के चुनाव के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने तैयारी शुरू कर दी है. रोजगार, पानी की निकासी और कृषि संकट यहां मुख्य मुद्दे बने हुए हैं.

बिजली और उद्योग का बड़ा केंद्र

बठिंडा को पंजाब का पावर हाउस कहा जाता है, क्योंकि यहां गुरु नानक देव ताप बिजली संयंत्र और तलवंडी साबो बिजली संयंत्र स्थित हैं. बठिंडा रिफाइनरी, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड, इस क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजना है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देती है.

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जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर टिकी है. गेहूं और धान के अलावा यहां बड़े पैमाने पर कपास की खेती होती है. खेतों की सिंचाई भाखड़ा नहर प्रणाली से की जाती है.

खान-पान और रहन-सहन

बठिंडा के पारंपरिक पंजाबी खान-पान में मक्की की रोटी, सरसों का साग, दाल मखनी और चूरन वाले परांठे शामिल हैं. ठंड के दिनों में यहां की खास मक्की की राबड़ी और गाजर का पाक भी पसंद किया जाता है. मेहमाननवाजी को यहां के लोगों के स्वभाव का हिस्सा माना जाता है.

घूमने और देखने की प्रमुख जगहें

शहर के बीच स्थित प्राचीन किला मुबारक अपनी बनावट के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है. तलवंडी साबो का तख्त श्री दमदमा साहिब सिख धर्म के पाँच तख्तों में से एक है. यहां देश-विदेश से श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं. इसे 'गुरु की काशी' भी कहा जाता है.

बठिंडा को झीलों का शहर भी कहा जाता है. यहां रोज गार्डन, थर्मल लेक और जोहर गार्डन घूमने की प्रमुख जगहों में शामिल हैं.

कुल मिलाकर बठिंडा जिला इतिहास, उद्योग और कृषि आधारित संस्कृति को एक साथ समेटे हुए है. पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के संदर्भ में इसकी विधानसभा सीटों पर सभी दलों की नजर है, जबकि रोजगार, पानी की निकासी और कृषि संकट चुनावी मुद्दों के केंद्र में बने हुए हैं.

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