देवा शरीफ से चुनावी इतिहास तक, जानिए बाराबंकी जिले की पूरी पहचान

 Barabanki District Profile: उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में स्थित बाराबंकी जिला देवा शरीफ, लोधेश्वर महादेव मंदिर, किंतूर के पारिजात वृक्ष और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के लिए जाना जाता है. यह जिला रफी अहमद किदवई और मोहसिना किदवई जैसी प्रमुख राजनीतिक हस्तियों से भी जुड़ा है. आइए जानते हैं बाराबंकी जिले का इतिहास, राजनीतिक विरासत और छहों विधानसभा क्षेत्रों की पूरी जानकारी.

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बाराबंकी  जिले में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं (Photo ai generated) बाराबंकी जिले में कुल 6 विधानसभा सीटें आती हैं (Photo ai generated)

aajtak.in

  • बाराबंकी,
  • 07 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:47 AM IST

बाराबंकी की पहचान सिर्फ उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र के एक जिले के रूप में नहीं है. यह जिला सूफी परंपरा, धार्मिक आस्था, स्वतंत्रता संग्राम और देश की राजनीति में योगदान देने वाली हस्तियों के लिए भी जाना जाता है. देवा शरीफ में हाजी वारिस अली शाह की दरगाह, रामनगर का लोधेश्वर महादेव मंदिर और किंतूर गांव का पारिजात वृक्ष इसकी अलग-अलग सांस्कृतिक पहचान को सामने लाते हैं. वहीं, रफी अहमद किदवई जैसे स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता का नाम बाराबंकी के इतिहास को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ता है. 

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कहां स्थित है बाराबंकी जिला

बाराबंकी उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में स्थित है. जिले का मुख्यालय बाराबंकी शहर है और यहां हिंदी के साथ अवधी भाषा का भी व्यापक इस्तेमाल होता है. जिला प्रशासन की वेबसाइट के मुताबिक, बाराबंकी का कुल क्षेत्रफल 3,891.5 वर्ग किलोमीटर है. जिले की पहचान कृषि प्रधान क्षेत्र, ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी है. 

बाराबंकी नाम कैसे पड़ा

बाराबंकी के नाम की उत्पत्ति को लेकर स्थानीय इतिहास में कई मान्यताएं मिलती हैं. जिला प्रशासन की वेबसाइट पर दर्ज एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवान बाराह से जुड़ी कथा के कारण इस स्थान का नाम पहले ‘बान्हन्या’ पड़ा, जो समय के साथ बदलकर बाराबंकी हो गया. प्रशासनिक इतिहास के मुताबिक, जिले का मुख्यालय पहले दरियाबाद में था. वर्ष 1859 में इसे नवाबगंज स्थानांतरित किया गया, जिसे आज बाराबंकी के नाम से जाना जाता है. 

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देवा शरीफ: सांप्रदायिक सद्भाव की पहचान

बाराबंकी जिले के देवा कस्बे में स्थित देवा शरीफ की दरगाह सूफी संत हाजी वारिस अली शाह से जुड़ी है. जिला प्रशासन के अनुसार, हाजी वारिस अली शाह ने ईश्वर की एकता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया. उनकी शिक्षाओं में धर्मों के बीच एकता और मानवता को महत्व दिया गया. देवा शरीफ की पहचान ऐसी धार्मिक परंपरा से जुड़ी है, जहां विभिन्न समुदायों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं. यहां आयोजित होने वाला देवा मेला भी जिले की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है. 

लोधेश्वर महादेव मंदिर: आस्था का प्रमुख केंद्र

रामनगर क्षेत्र के महादेवा में स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर बाराबंकी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है. यहां विशेष रूप से सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है. मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताएं और धार्मिक परंपराएं इसे बाराबंकी के प्रमुख आस्था केंद्रों में स्थान देती हैं.  बाराबंकी के किंतूर गांव में स्थित पारिजात वृक्ष जिले के चर्चित प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों में शामिल है. इस वृक्ष से कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं. इसकी विशिष्टता और इससे जुड़ी स्थानीय परंपराओं के कारण यह स्थान लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना रहता है. बाराबंकी की पहचान में पारिजात वृक्ष का उल्लेख जिले की प्राकृतिक विरासत और धार्मिक संस्कृति, दोनों को सामने लाता है. 

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स्वतंत्रता संग्राम में बाराबंकी की भूमिका

बाराबंकी का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम के प्रसंगों से भी जुड़ा है. जिला प्रशासन के इतिहास पेज के अनुसार, 1857 के विद्रोह के दौरान इस क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष हुआ. राजा बलभद्र सिंह छेहलारी और राजा गुरु बख्श सिंह जैसे नाम स्थानीय स्वतंत्रता संघर्ष के संदर्भ में दर्ज हैं. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन और इसके बाद खिलाफत, नमक सत्याग्रह तथा भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी जिले में राजनीतिक गतिविधियां हुईं. स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया और कई स्वतंत्रता सेनानियों को जेल जाना पड़ा. 


बाराबंकी की राजनीति और प्रमुख राजनीतिक हस्तियां

बाराबंकी ने राष्ट्रीय राजनीति को कई महत्वपूर्ण नाम दिए हैं. इनमें रफी अहमद किदवई का विशेष स्थान है. उनका जन्म जिले के मसौली क्षेत्र में हुआ था. वे स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत के शुरुआती दौर के प्रमुख राजनेताओं में शामिल थे. आजादी के बाद उन्होंने केंद्र सरकार में संचार मंत्री के रूप में भी काम किया. भारत सरकार के प्रकाशन में उनके स्वतंत्रता आंदोलन और किसानों के कल्याण से जुड़े योगदान का उल्लेख मिलता है. मोहसिना किदवई भी बाराबंकी से जुड़ी प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में रही हैं. जिला न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित जिले के इतिहास में उनका नाम राजनीतिक और सामाजिक जीवन की प्रमुख हस्तियों के रूप में दर्ज है. वर्तमान संसदीय राजनीति में बाराबंकी लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2024 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के तनुज पुनिया निर्वाचित हुए. 

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बाराबंकी जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं. ये हैं: बाराबंकी, दरियाबाद, हैदरगढ़, कुर्सी, रामनगर, जैदपुर. इनमें से पांच विधानसभा क्षेत्र बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं, जबकि दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र से जुड़ा है. जिले की भौगोलिक सीमा में रुदौली विधानसभा क्षेत्र के कुछ बूथ भी शामिल हैं. 

2022 के चुनव में बाराबंकी जिले की किस विधानसभा सीट पर कौन जीता: 

बाराबंकी: बाराबंकी में सपा के धर्मराज सिंह यादव ने बीजेपी की राजकुमारी मौर्या को शिकस्त दी थी. यहां कांग्रेस से रूही अरशद, बसपा से डॉ. विवेक सिंह वर्मा और आप से प्रदीप सिंह वर्मा भी चुनाव लड़ रहे थे. 

दरियाबाद: दरियाबाद से सपा सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप चुनाव हार गए थे, उन्हें 95817 वोटों मिले थे. भाजपा प्रत्याशी सतीश शर्मा ने बाजी जीत ली है, उन्हें 128219 वोट हासिल हुए हैं. यहां से कांग्रेस की चित्रा वर्मा, निर्दलीय रितेश कुमार सिंह, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से मुबश्शिर अहमद भी चुनाव लड़ रहे थे. 

हैदरगढ़: हैदरगढ़ में बीजेपी के दिनेश रावत ने 117133 वोट हासिल करके सपा के राम मगन को हरा दिया था. इस सीट से बसपा से श्री चंद्रा, आईएनडी से संजय गौतम और कांग्रेस से निर्मला चौधरी चुनाव लड़ी थीं. 

कुर्सी: कुर्सी से बीजेपी के सकेंद्र प्रताप को 118720 वोट मिले थे उन्होंने सपा के राकेश कुमार को महज 217 वोटों से हरा दिया. 

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रामनगर: रामनगर सीट पर सपा गठबंधन से फरीद महफूज किदवई ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा से शरद अवस्थी को 261 वोटों से हरा दिया था. बसपा से राम किशोर शुक्ला और कांग्रेस से ज्ञानेश शुक्ला मैदान में भी थे. 

जैदपुर: जैदपुर विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी गौरव रावत ने 2982 वोटों से बीजेपी के अंबरीश रावत को हरा दिया था. यहां कांग्रेस से तनुज पूनिया, बसपा से ऊषा सिंह, बीजेपी से अंबरीश रावत, आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) से अरविंद सिंह रावत, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से आकाश कुमार दिवान और आप से भागीरथ चुनाव लड़ रहे थे. 

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