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नवाबगंज विधानसभा चुनाव 2027 (Nawabganj Assembly Election 2027)

नवाबगंज उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में तहसील मुख्यालय और उपखंड स्तर का एक कस्बा है. इसे मूल रूप से बिजौरिया के नाम से जाना जाता था. 18वीं सदी के आखिरी दौर में अवध के नवाब आसफ-उद-दौला ने यहां एक बाजार स्थापित कराया, जिसके बाद इसका नाम नवाबगंज पड़ा. यह कस्बा बरेली को पीलीभीत से जोड़ने वाली सड़क पर स्थित है और लंबे समय से स्थानीय प्रशासनिक और

व्यापारिक केंद्र के रूप में काम करता रहा है.

1951 के परिसीमन आदेश के तहत नवाबगंज विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ. यह एक सामान्य, यानी अनारक्षित विधानसभा सीट है और बरेली लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2008 के परिसीमन के बाद इसकी सीमाओं को दोबारा निर्धारित किया गया और पूरे नवाबगंज तहसील क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया. इसके बाद इस सीट का ग्रामीण स्वरूप और अधिक स्पष्ट हो गया.

नवाबगंज में अब तक राज्य में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में मतदान हुआ है. 1952 में पहले चुनाव से लेकर 1985 तक यहां राजनीतिक स्थिति में कई बदलाव देखने को मिले. इसके बाद सीट पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला प्रमुख हो गया. बीजेपी ने पांच बार और समाजवादी पार्टी ने चार बार जीत दर्ज की. कुल मिलाकर बीजेपी ने सीट पर सात बार जीत हासिल की है, जिसमें उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ की दो जीत भी शामिल हैं. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने चार-चार बार यह सीट जीती है. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार भी एक-एक बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं.

उम्मीदवारों की बात करें तो छे़त्राम गंगवार और भगवत सरन गंगवार ने नवाबगंज का प्रतिनिधित्व पांच-पांच बार किया है. छे़त्राम गंगवार ने 1969 से 1985 के बीच लगातार पांच चुनाव जीते. उन्होंने तीन बार कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर और एक-एक बार जनसंघ तथा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता. वहीं भगवत सरन गंगवार ने अपने पहले दो चुनाव बीजेपी के टिकट पर जीते और बाद में समाजवादी पार्टी के सदस्य के रूप में तीन बार जीत दर्ज की.

पार्टियों के लिहाज से समाजवादी पार्टी ने 1996 से 2012 के बीच लगातार चार चुनाव जीते. वहीं बीजेपी ने 1989 से 1993 के बीच लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की.

2012 में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार ने समाजवादी पार्टी के लिए लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार उषा गंगवार को 17,719 वोटों से हराया. लगातार तीन जीत के बाद बीजेपी की स्थिति कमजोर हो गई थी. इसका असर 2012 के चुनाव में भी दिखाई दिया, जब पार्टी चौथे स्थान पर रही और अपनी जमानत तक नहीं बचा सकी. 24 साल बाद बीजेपी ने 2017 में केस़र सिंह को उम्मीदवार बनाकर नवाबगंज सीट पर फिर जीत हासिल की. उन्होंने समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक भगवत सरन गंगवार को 39,142 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2022 में बीजेपी ने उम्मीदवार बदला और एम.पी. आर्य के साथ सीट बरकरार रखी. एमपी आर्य को 1,11,113 वोट मिले, जबकि भगवत सरन गंगवार को 1,01,876 वोट मिले. इस तरह बीजेपी ने 9,237 वोटों से जीत दर्ज की.

विधानसभा चुनावों में बीजेपी के उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन के विपरीत, लोकसभा चुनावों के दौरान नवाबगंज विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय तक उसका प्रभाव रहा. हालांकि 2024 में समाजवादी पार्टी ने मामूली अंतर से बीजेपी को पीछे छोड़ दिया. 2009 में बीजेपी ने बीएसपी पर 3,448 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में यह बढ़त बढ़कर 42,728 वोट हो गई. 2019 में भी बीजेपी की बढ़त लगभग बरकरार रही और वह 41,840 वोटों से आगे रही. उस चुनाव में समाजवादी पार्टी दूसरे स्थान पर रही. 2024 में समाजवादी पार्टी पहली बार इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे आगे रही, हालांकि अंतर बेहद कम था. उसके उम्मीदवार प्रवीण सिंह ऐरन को 1,07,183 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार छत्रपाल सिंह गंगवार को 1,06,279 वोट मिले. इस तरह समाजवादी पार्टी को केवल 904 वोटों की बढ़त मिली.

नवाबगंज में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2,57,842 थी, जो 2017 में बढ़कर 3,15,060 हो गई. 2019 में यह संख्या 3,19,995, 2022 में 3,39,503 और 2024 में 3,44,105 पहुंच गई. यहां मतदान प्रतिशत भी काफी अधिक रहा है. 2012 में मतदान 73.07 प्रतिशत रहा. 2017 में यह घटकर 68.60 प्रतिशत हुआ. 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान 66.34 प्रतिशत रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह फिर बढ़कर 68.08 प्रतिशत हो गया और 2024 के लोकसभा चुनाव में 63.37 प्रतिशत रहा. इस तरह नवाबगंज उन कुछ विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है जहां मतदान प्रतिशत लंबे समय तक राज्य के औसत से अधिक रहा है.

नवाबगंज हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी काफी महत्वपूर्ण है. मुस्लिम मतदाता कुल मतदाताओं का 31.80 प्रतिशत हैं और चुनावी गणित में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. अनुसूचित जाति के मतदाताओं की हिस्सेदारी 14.06 प्रतिशत है. गैर-मुस्लिम आबादी में कुर्मी समुदाय प्रभावशाली समूहों में शामिल है. इसके बाद गंगवार, मौर्य, कश्यप और अन्य ओबीसी समूह आते हैं. ऊंची जातियों के मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है. यह विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां 86.57 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 13.43 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है.

नवाबगंज की शुरुआत बिजौरिया गांव के रूप में हुई थी. 18वीं सदी के आखिरी दौर में अवध के नवाब आसफ-उद-दौला के शासन के दौरान यहां एक बाजार स्थापित किया गया. इसके बाद यह स्थान नवाबगंज कहलाने लगा, जिसका अर्थ नवाब का बाजार माना जाता है. बरेली-पीलीभीत सड़क पर स्थित होने के कारण यह बाजार तेजी से विकसित हुआ. 1815 में अंग्रेजों ने इसे नई तहसील और परगना का मुख्यालय बनाया, जिसे पुराने करोर परगना से अलग करके बनाया गया था. 20वीं सदी की शुरुआत तक यह नियमित साप्ताहिक बाजारों और दशहरे के मेले वाला एक छोटा कस्बा बन चुका था. इसके बाद से यह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतें पूरी करने वाला एक सामान्य तहसीली कस्बा बना हुआ है.

नवाबगंज की अर्थव्यवस्था आज भी इसके कृषि आधारित ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी हुई है. तराई-रोहिलखंड क्षेत्र के उपजाऊ मैदानों में गन्ना, धान, गेहूं और अन्य खाद्यान्नों की खेती होती है. पशुपालन और छोटे स्तर का ग्रामीण व्यापार भी किसानों की आय में योगदान देते हैं. ऐतिहासिक रूप से कस्बे के बाजार आसपास के गांवों से आने वाले कृषि उत्पादों के संग्रह और वितरण केंद्र के रूप में काम करते रहे हैं. गन्ना यहां विशेष रूप से महत्वपूर्ण फसल है. चीनी प्रसंस्करण और इससे जुड़ी गतिविधियां मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में औद्योगिक गतिविधियों को जोड़ती हैं. पुराने बाजार कस्बे की पहचान आज भी साप्ताहिक बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों में दिखाई देती है, जो आसपास के बड़े ग्रामीण क्षेत्र की जरूरतें पूरी करती हैं.

नवाबगंज की सड़क कनेक्टिविटी अच्छी है. यह महत्वपूर्ण बरेली-पीलीभीत मार्ग पर स्थित है और बरेली शहर से आसानी से जुड़ा हुआ है. सड़क नेटवर्क के जरिए पीलीभीत और तराई क्षेत्र तक पहुंच बनाई जा सकती है. वहीं बरेली के जरिए यह क्षेत्र रोहिलखंड और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी तथा मध्य हिस्सों के प्रमुख शहरों से जुड़ता है. नवाबगंज में बरेली-पीलीभीत रेलवे मार्ग के जरिए रेल संपर्क भी है. ऐतिहासिक रूप से इस रेल मार्ग ने कृषि उत्पादों और यात्रियों की आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसकी भौगोलिक स्थिति उत्तराखंड की तलहटी के भी अपेक्षाकृत करीब है, जिससे बरेली और उत्तराखंड के कई पहाड़ी शहरों तक सड़क मार्ग से पहुंच बनाई जा सकती है.

नवाबगंज बरेली से करीब 30 किलोमीटर, पीलीभीत से लगभग 35 किलोमीटर और शाहजहांपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर है. उत्तराखंड का हल्द्वानी यहां से लगभग 100 किलोमीटर दूर है, जबकि नैनीताल की दूरी करीब 140 किलोमीटर है. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क क्षेत्र लगभग 175 से 180 किलोमीटर दूर है. यह क्षेत्र नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से भी ज्यादा दूर नहीं है. नेपाल का महेंद्रनगर, जिसे अब आधिकारिक तौर पर भीमदत्त कहा जाता है, लगभग 90 किलोमीटर दूर है. पीलीभीत टाइगर रिजर्व करीब 85 से 90 किलोमीटर और दुधवा नेशनल पार्क लगभग 120 किलोमीटर दूर है. इस तरह नवाबगंज तराई क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण वन और वन्यजीव स्थलों तक पहुंच के लिहाज से सुविधाजनक स्थिति में है. नई दिल्ली यहां से करीब 270 किलोमीटर और लखनऊ लगभग 300 किलोमीटर दूर है. बरेली का व्यापक सड़क और रेल नेटवर्क दोनों शहरों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख केंद्रों तक पहुंच उपलब्ध कराता है.

नवाबगंज में पिछले सात प्रमुख चुनावों के आधार पर बीजेपी को मामूली बढ़त हासिल है. इनमें बीजेपी ने पांच चुनावों में जीत या बढ़त हासिल की है, जबकि समाजवादी पार्टी और बीएसपी ने एक-एक बार बढ़त बनाई है. हालांकि बीजेपी की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नहीं कही जा सकती. 2022 के विधानसभा चुनाव में उसकी जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा था और 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इसी विधानसभा क्षेत्र में बढ़त हासिल की थी. 2020-21 के लंबे किसान आंदोलन से पैदा हुआ चुनावी असंतोष, जिसका असर 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में देखने को मिला, अब कितना कम हुआ है, यह बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण सवाल होगा. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ऐसे मुद्दों और सामाजिक समीकरणों पर जोर देगी, जिनके जरिए बीजेपी के वोट आधार में सेंध लगाई जा सके और लोकसभा चुनाव में मिली मामूली बढ़त को बड़े अंतर में बदला जा सके. दोनों दलों के बीच पहले से ही करीबी मुकाबले और बीएसपी की मौजूदगी के कारण नवाबगंज में 2027 का चुनाव एक दिलचस्प मुकाबला हो सकता है.

(अजय झा)

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नवाबगंज विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Dr. M. P. Arya

BJP
वोट1,11,113
विजेता पार्टी का वोट %48.2 %
जीत अंतर %4 %

नवाबगंज विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Bhagwat Saran Gangwar

    SP

    1,01,876
  • Yusuf Khan

    BSP

    11,083
  • Usha Devi Gangwar

    INC

    2,039
  • Nota

    NOTA

    1,451
  • Meenakshi Gangwar

    IND

    723
  • Sunita Gangwar

    AAAP

    621
  • Ratan Lal

    BSRD

    385
  • Lekhraj Gangwar

    IND

    319
  • Mohd. Saleem

    BMUP

    282
  • Komil Parshad

    IND

    238
  • Rashid Ali

    ASPKR

    225
  • Umesh Kumar

    IND

    148
WINNER

Kesar Singh

BJP
वोट93,711
विजेता पार्टी का वोट %43.5 %
जीत अंतर %18.2 %

नवाबगंज विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Bhagwat Saran Gangwar

    SP

    54,569
  • Shaila Tahir

    IEMC

    36,761
  • Virendera Singh Gangwar

    BSP

    18,948
  • Nota

    NOTA

    1,860
  • Mohd. Aslam

    RLD

    1,783
  • Rashmi Gangwar

    IND

    1,264
  • Ratan Lal

    BSRD

    1,260
  • Master Chhotey Lal Gangwar

    PECP

    1,227
  • Mohd. Tahir

    IND

    1,071
  • Prahlad Ram

    SKLP

    1,041
  • Tasabbar Husain

    IND

    986
  • Naim Ahmad

    IND

    858
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नवाबगंज विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

नवाबगंज विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में नवाबगंज में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के नवाबगंज विधानसभा चुनाव सीट पर Dr. M. P. Arya को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

नवाबगंज विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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