उत्तर प्रदेश के सियासी रणक्षेत्र में असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं. ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने एक नई और बड़ी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. AIMIM ने सूबे के उलेमाओं और मदरसों में अपनी पैठ गहरी करने के लिए खास 'मास्टर प्लान' तैयार किया है, जिसकी कमान मुफ्ती ओसामा नदवी को सौंपी है.
असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी विधिक प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट मुफ्ती मोहम्मद ओसामा नदवी को नियुक्त किया है. यूपी AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने कहा कि उत्तर प्रदेश में संगठन को सशक्त बनाने और विधिक गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने के लिए मुफ्ती ओसामा नदवी को विधिक प्रकोष्ठ की कमान सौंपी गई है.
पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर के रहने वाले मोहम्मद ओसामा नदवी वकालत के साथ-साथ मुफ्ती भी हैं. उन्होंने लखनऊ के प्रतिष्ठित इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम नदवतुल उलमा से पढ़ाई-लिखाई की है. इसके चलते सूबे के तमाम मदरसों में उनकी ठीक-ठाक पकड़ मानी जाती है और देश भर के उलेमाओं से उनके सीधे संबंध हैं. इसी को देखते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी चुनाव से ठीक पहले मुफ्ती ओसामा नदवी को प्रदेश संगठन में अहम रोल देकर बड़ा सियासी दांव चला है.
क्या है ओवैसी का नया 'यूपी प्लान'?
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं को साधने और पार्टी के जनाधार को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए ओवैसी ने सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है. AIMIM ने यूपी की मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान बनाया है, जिसके लिए असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम बहुल इलाकों में एक के बाद एक रैलियाँ करके सियासी माहौल बनाना शुरू कर दिया है.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्ला के साथ भी मुफ्ती ओसामा नदवी के बहुत करीबी संबंध है. खालिद सैफुल्ला के शिष्य ओसामा रहे हैं, इसके लिहाज से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में भी दखल रखे हैं. यूपी सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहे जुफर अहमद फारूकी के साथ ओसामा नदवी के रिश्ते काफी बेहतर हैं. वक्फ के मामले में वो बारीकी से नजर रखते हैं.
आजमगढ़ से लेकर रामपुर तक और सहारनपुर से मेरठ तक असदुद्दीन ओवैसी के निशाने पर मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) रही है. रामपुर में उन्होंने सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान के प्रति खुलकर सहानुभूति जताई और अखिलेश यादव की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए. ओवैसी का पूरा फोकस सूबे के मुस्लिम वोट बैंक पर है, जो सपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है. इसी वोट बैंक को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए वे पूरी कोशिश कर रहे हैं, जिसके लिए मुफ्ती ओसामा नदवी को अहमियत देकर दांव खेला गया है.
उलेमा और मदरसों में पैठ जमाने का प्लान
असदुद्दीन ओवैसी ने मुफ्ती ओसामा नदवी को संगठन में सिर्फ यूं ही जगह नहीं दी है, बल्कि उनके जरिए मदरसों और उलेमाओं के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है. मुफ्ती ओसामा नदवी की यूपी के मदरसों में अच्छी पैठ मानी जाती है, क्योंकि वे खुद लखनऊ के नदवे से पढ़े हैं. इसके अलावा मुजफ्फरनगर के खतौली में स्थित 'जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया' मदरसा है, जिसकी कमान इन दिनों मुफ्ती ओसामा नदवी के पिता हाफिज इदरीस संभाल रहे हैं.
देवबंद से लेकर नदवे सहित यूपी के तमाम मदरसों में ओसामा नदवी की अच्छी जान-पहचान है. AIMIM का मानना है कि उलेमा और मदरसा शिक्षक समाज में बड़ा प्रभाव रखते हैं. ऐसे में उनके जरिए आम लोगों तक पार्टी की बात पहुँचाना काफी आसान और असरदार होगा. अब इस पूरे अभियान और नेटवर्क को तैयार करने का जिम्मा मुफ्ती ओसामा नदवी के हाथ में होगा. उत्तर प्रदेश भर के उलेमाओं, खानकाहों और मदरसों के जिम्मेदारों को पार्टी के विजन से जोड़ने का काम ओसामा नदवी करेंगे.
कलीम सिद्दीकी से अतीक अहमद तक कानूनी पैरवी
धर्मांतरण केस में आरोपी इस्लामिक स्कॉलर मौलाना कलीम सिद्दीकी और उमर गौतम का मुकदमा लड़ने का काम भी मुफ्ती ओसामा नदवी ही कर रहे हैं. यही नहीं, लखनऊ की जेल में बंद कलीम सिद्दीकी से हर शुक्रवार को जाकर मुलाकात करने का काम भी ओसामा नदवी करते हैं. ओवैसी ने इस मजबूत जुड़ाव को देखते हुए नदवी पर दांव खेला है.
ओसामा नदवी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में वकालत की प्रैक्टिस करते हैं, जिसके चलते उनका यूपी के वकीलों के साथ एक बड़ा नेटवर्क भी है. इसे पार्टी से जोड़ने के लिए ही उन्हें AIMIM विधिक प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावा बाहुबली अतीक अहमद के मुकदमों के वकील भी ओसामा नदवी थे और अब उनके बेटे का केस भी वही लड़ रहे हैं. इन सारे समीकरणों को देखते हुए ही यूपी चुनाव से ठीक पहले ओसामा को AIMIM संगठन में यह अहम पद दिया गया है.
ईस्ट और वेस्ट यूपी का संतुलन बनाने का प्लान
असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी में क्षेत्रीय संतुलन बनाने के लिए भी ओसामा नदवी को प्रदेश विधिक प्रकोष्ठ का अध्यक्ष नियुक्त किया है. यूपी में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान शौकत अली संभाल रहे हैं, जो पूर्वांचल के आजमगढ़ से आते हैं. वहीं यूपी में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या पश्चिमी यूपी में है, जो बेहद अहम मानी जाती है. पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के बीच संतुलन बनाने के लिए मुफ्ती ओसामा पर भरोसा जताया गया है, जो मुजफ्फरनगर के खतौली के रहने वाले हैं.
शौकत अली और मुफ्ती ओसामा की जोड़ी लंबे समय से साथ काम कर रही है. ओसामा शुरुआत में AIMIM मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष रहे हैं और अब उन्हें प्रदेश संगठन का जिम्मा सौंपा गया है. इसके अलावा इसे ओवैसी द्वारा अशराफ और पसमांदा मुस्लिमों के बीच सियासी केमिस्ट्री बनाने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है. शौकत अली अशराफ मुस्लिम समुदाय से आते हैं, जबकि मुफ्ती ओसामा पसमांदा मुस्लिम हैं.
ओवैसी की रणनीति के पीछे के सियासी मायने
यूपी की सियासत में पारंपरिक रूप से मुस्लिम वोट बैंक पर सपा, बसपा और कांग्रेस का दबदबा माना जाता रहा है. ओवैसी की यह नई कवायद इस समीकरण को चुनौती देने की कोशिश है. AIMIM लगातार यह मुद्दा उठाती रही है कि पारंपरिक सेक्युलर पार्टियाँ मुसलमानों का सिर्फ वोट लेती हैं, लेकिन उन्हें स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व नहीं देतीं.
हाल के दिनों में यूपी के मदरसों के सर्वे और नियमों को लेकर राज्य में जो बयानबाजी और बदलाव हुए हैं, उस माहौल में उलेमाओं के बीच पहुँच बनाकर AIMIM खुद को उनके अधिकारों का सबसे बड़ा पैरोकार साबित करना चाहती है. मदरसों और धार्मिक संस्थानों से जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल पार्टी अपने कैडर को मजबूत करने और चुनावी जमीन तैयार करने में करेगी, जिसके लिए मुफ्ती ओसामा नदवी को कमान सौंपी गई है.
ओवैसी के इस कदम से राज्य के मुख्य विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी के खेमे में हलचल तेज हो सकती है. अगर AIMIM उलेमाओं और मदरसों के जरिए मुस्लिम समुदाय के एक बड़े हिस्से को अपने पक्ष में करने में कामयाब होती है, तो इसका सीधा असर वोटों के ध्रुवीकरण और आगामी चुनावों के नतीजों पर पड़ना तय है. अब देखना यह होगा कि मुफ्ती ओसामा नदवी यूपी में ओवैसी की उम्मीदों पर कितना खरे उतरते हैं.
कुबूल अहमद