आमतौर पर किसी भी विश्वविद्यालय के कैलेंडर में दीक्षांत समारोह सबसे कम विवादित आयोजनों में से एक माना जाता है. छात्र अच्छे कपड़े पहनते हैं, अपनी डिग्रियां लेते हैं, तस्वीरें खिंचवाते हैं और ज़िंदगी के अगले अध्याय की ओर बढ़ जाते हैं. लेकिन इस साल देश की कुछ प्रमुख यूनिवर्सिटीज में मुख्य अतिथि के चुनाव ने इस समारोह को ही टकराव का केंद्र बना दिया है.
इसका सबसे ताजा और चौंकाने वाला उदाहरण बेंगलुरु का नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) है, जिसने 12 सितंबर 2026 को होने वाले अपने 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को रद्द कर दिया है. यह फैसला छात्रों और पूर्व छात्रों (Alumni) द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की प्रस्तावित मौजूदगी का कड़ा विरोध करने के बाद आया है.
यूनिवर्सिटी ने कहा कि अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण वो इस समारोह का आयोजन करने में असमर्थ है. अब पास-आउट होने वाले छात्रों को आवश्यक स्वीकृतियों के बाद अनुपस्थिति (In absentia) में ही डिग्रियां दी जाएंगी. वैसे चीफ गेस्ट के तौर पर CJI की मौजूदगी पर विवाद की वजह से प्रभावित होने वाला NLSIU पहला कैंपस नहीं है. आइए जानते हैं ऐसे ही 4 मामलों के बारे में...
NLSIU ने रद्द किया दीक्षांत समारोह
इससे पहले NLSIU ने 12 सितंबर को होने वाला अपना दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया था. इसकी वजह 700 से अधिक छात्रों और पूर्व छात्रों ने CJI सूर्यकांत और BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की मौजूदगी का विरोध किया था. इसके बाद यहां भी कहा गया कि स्नातक (Graduating) बैच अब समारोह में भाग लेने के बजाय अनुपस्थिति में अपनी डिग्रियां प्राप्त करेगा. NLSIU का यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि यूनिवर्सिटी ने सिर्फ मुख्य अतिथि नहीं बदला, बल्कि पूरा का पूरा दीक्षांत समारोह ही रद्द कर दिया.
TISS ने पहले टाला, फिर मुख्य अतिथि बदला
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने मूल रूप से 2 अगस्त को होने वाले अपने 86वें दीक्षांत समारोह को स्थगित कर दिया था. संस्थान ने "अप्रत्यक्ष परिस्थितियों" का हवाला दिया था. हालांकि, खबरों के मुताबिक CJI सूर्यकांत की उपस्थिति को लेकर छात्रों के संभावित विरोध की आशंकाएं थीं.
इसलिए यहां समारोह की तारीख बदलकर 22 अगस्त कर दी गई और CJI की जगह टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. सी.एस. प्रमेश को मुख्य अतिथि बनाया गया. NLSIU के विपरीत, TISS ने आखिरकार समारोह आयोजित किया, लेकिन तारीख और मुख्य अतिथि दोनों में बदलाव करने के बाद.
NALSAR के छात्रों ने CJI के न्योते का किया विरोध
हाल ही में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के सैकड़ों छात्रों ने CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने की खबरों पर आपत्ति जताई. छात्रों ने दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणियों और कार्यवाही को संभालने के तरीकों को लेकर चिंताएं जताईं.
यह विवाद तब और बढ़ गया जब BCI ने थोड़े समय के लिए राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 के स्नातकों का नामांकन न करने का निर्देश जारी कर दिया. हालांकि, बाद में इस आदेश को वापस ले लिया गया. बाद में CJI ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निमंत्रण कभी स्वीकार ही नहीं किया था. यह विवाद सिर्फ एक समारोह के मेहमान तक सीमित न रहकर छात्र विरोध, पेशेवर नियमों और संस्थागत स्वायत्तता पर बड़े सवाल खड़े करने वाला बन गया.
ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने बदला रुख
ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने भी अपने दीक्षांत समारोह के इंतजामों में बदलाव किया. यूनिवर्सिटी का रुख यह था कि CJI सूर्यकांत ने कभी समारोह की अध्यक्षता करने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था. CJI की जगह जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने समारोह की अध्यक्षता की. यह घटनाक्रम भी NALSAR और TISS विवादों के साथ ही सामने आया था.
कैंपस में विवाद का केंद्र क्यों बन रहे हैं दीक्षांत समारोह?
इन चारों मामलों की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं. NALSAR के मामले में CJI ने कहा कि उन्होंने कभी निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था. TISS ने मेहमान बदलने से पहले अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला दिया. वहीं, NLSIU तो एक कदम आगे निकल गया और पूरा समारोह ही रद्द कर दिया. लेकिन कुल मिलाकर, ये सभी घटनाएं कैंपस की राजनीति में आ रहे एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती हैं.
छात्रों के लिए दीक्षांत समारोह का मेहमान अब सिर्फ एक औपचारिक चुनाव नहीं रह गया है. भविष्य के वकीलों, शिक्षाविदों और लोक सेवकों को तैयार करने वाले संस्थानों में छात्र उस मेहमान को अपनी यूनिवर्सिटी के मूल्यों और सिद्धांतों का प्रतीक मानते हैं.
यही वजह है कि दीक्षांत समारोह का मंच अब सिर्फ डिग्री लेने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसी जगह भी बनता जा रहा है जहां छात्र यह तय करते हैं कि वे संस्थान के फैसलों का जश्न मनाना चाहते हैं, उन पर सवाल उठाना चाहते हैं या फिर विरोध दर्ज कराना चाहते हैं. और NLSIU में, इसी असहमति का नतीजा बेहद असाधारण रहा जहां इस बार कोई दीक्षांत समारोह आयोजित ही नहीं होगा.
आजतक एजुकेशन डेस्क