30 साल बाद क्यों चर्चा में है धर्मेंद्र प्रधान की ये तस्वीर, पेपर लीक आंदोलन में कभी टूटी थीं उनकी हड्ड‍ियां!

इस पुरानी घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया है. एक सराहना करने वाला वर्ग है जो उनके छात्र जीवन के संघर्ष, निडरता और नेतृत्व की तारीफ कर रहे हैं. वहीं दूसरा सवाल उठाने वाला वर्ग ये पूछ रहा है कि जो नेता कभी खुद पेपर लीक के खिलाफ लाठियां खाता था, आज वही शिक्षा मंत्री के पद पर रहते हुए लगातार हो रहे पेपर लीक को रोकने में नाकाम क्यों साबित हो रहा है?

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Dharmendra Pradhan Old Pic (Image: TNIE) Dharmendra Pradhan Old Pic (Image: TNIE)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:11 AM IST

देशभर में नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली को लेकर घमासान मचा हुआ है. जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है. इसी बीच, सोशल मीडिया पर करीब तीन दशक पुराना एक ऐसा मामला फिर से वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है. मामला 1997 का है, जब धर्मेंद्र प्रधान खुद एक छात्र नेता के रूप में पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे और पुलिस की लाठियां तक खाई थीं.

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1997 में क्या हुआ था?
घटनाक्रम  के अनुसार साल 1997 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बहुमत साबित करने की कोशिश में थी, उसी दौरान ओडिशा में प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आया था. उस समय प्रधान ABVP के युवा चेहरा थे. असल में धर्मेंद्र प्रधान तब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव थे. उन्होंने ओडिशा की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और लगभग 1,500 छात्रों के साथ मिलकर राज्य सचिवालय का घेराव किया.

पुलिस की लाठीचार्ज और फ्रैक्चर 
बताया जाता है कि उस उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें कई फ्रैक्चर आए थे. हालांकि, उन्होंने पीछे हटने के बजाय अपना आंदोलन जारी रखा.

सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?
इस पुरानी घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया है. एक सराहना करने वाला वर्ग है जो उनके छात्र जीवन के संघर्ष, निडरता और नेतृत्व की तारीफ कर रहे हैं. वहीं दूसरा सवाल उठाने वाला वर्ग ये पूछ रहा है कि जो नेता कभी खुद पेपर लीक के खिलाफ लाठियां खाता था, आज वही शिक्षा मंत्री के पद पर रहते हुए लगातार हो रहे पेपर लीक को रोकने में नाकाम क्यों साबित हो रहा है?

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छात्र राजनीति से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान ने 18 साल की उम्र में उत्कल विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी. धीरे धीरे उनका संगठन में कद बढ़ा. 1994 से 1997 के बीच वे दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव रहे. इस आंदोलन के बाद राज्य की राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ा. उन्होंने भाजपा का जनाधार मजबूत किया और उनकी ओडिशा में भाजपा का कैडर मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है.

नीट विवाद और इस्तीफे की मांग
2021 में रमेश पोखरियाल 'निशंक' के बाद शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने वाले धर्मेंद्र प्रधान के लिए पिछला कुछ समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है. देश में पिछले आठ सालों में 90 से ज्यादा पेपर लीक की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं. फिलहाल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र, अभिभावक और विपक्षी नेता नीट धांधली को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं और सीधे धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जवाबदेही तय करते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि तीन दशक पहले पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले धर्मेंद्र प्रधान इस बड़े परीक्षा संकट से कैसे निपटते हैं.

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