परीक्षा घोटाले की जांच और छात्र आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया. TDPL से जुड़ी तमाम परीक्षाएं रद्द होने से हजारों लोगों की नौकरियां चली गईं. एक तरफ धांधली रोकने का दावा, दूसरी तरफ नौकरी गंवा चुके अभ्यर्थियों का दर्द. रांची की सड़कों पर अब दोनों पक्ष नजर आ रहे हैं.
यही वजह है कि झारखंड में परीक्षा घोटाले की सियासत अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट बैठक के बाद TDPL एजेंसी द्वारा 2014 से अब तक आयोजित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. इस फैसले से करीब 3000 लोगों की नौकरियां एक झटके में चली गई हैं.
कौन-कौन सी परीक्षाएं रद्द?
TDPL ने 2014 से अब तक कुल 15 परीक्षाएं आयोजित की थीं. ये थीं 10 JPSC और 5 JSSC. इनमें सबसे चर्चित JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है, जिससे अकेले करीब 1975 अभ्यर्थियों की नौकरी गई. इसके अलावा 14वीं सिविल सेवा परीक्षा (103 पद), सिविल सेवा बैकलॉग 2023 (7 पद) और 2025 (45 पद), फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (170 पद), सहायक वन संरक्षक (78 पद), APP रेगुलर (134 पद), APP बैकलॉग (26 पद) और सिविल जज जूनियर (38 पद) जैसी परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं.
नौकरी गंवा चुके अब सड़क पर
जिन अभ्यर्थियों ने इन परीक्षाओं के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की थी, वे अब मंत्रालय के बाहर आंदोलन कर रहे हैं. उनका साफ कहना है कि सभी गलत नहीं हैं. जिन्होंने गलती की, उन्हें हटाया जाना चाहिए था. लेकिन सबको एक झटके में निकालना गलत है.
बता दें कि रांची में पिछले कई दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन ने सरकार को यह बड़ा फैसला लेने पर मजबूर किया. लेकिन अब सिक्के का दूसरा पहलू भी सामने आ गया है. एक तरफ पेपर लीक और धांधली के आरोपों का अंत, दूसरी तरफ हजारों परिवारों की रोजी-रोटी छिनने का दर्द.सरकार ने सुधार समिति गठित करने और 2014 से हुई गड़बड़ियों की जांच का ऐलान किया है. लेकिन नौकरी गंवा चुके अभ्यर्थी पूछ रहे हैं कि क्या न्याय सबके लिए बराबर है?
सत्यजीत कुमार