एक झटके में 2250 सरकारी नौकरियां छिन गईं... प्रोजेक्ट भवन का दरवाजा बंद, CGL पास अभ्यर्थी सड़क पर

झारखंड में एक रात के फैसले ने 2250 परिवारों की दुनिया बदल दी. सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद SO, ASO समेत विभिन्न पदों पर काम कर रहे अभ्यर्थी अचानक बेरोजगार हो गए. बीती रात कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद ये लोग मंत्रालय के बाहर पहुंच गए. भारी बारिश में भीगते-भीगते मानव श्रृंखला बनाकर विरोध कर रहे हैं. आंखों में आंसू और चेहरे पर निराशा लिए कह रहे हैं, ‘कल तक नौकरी थी, आज सब छिन गया.’

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जिंदगी लुट गई एक फैसले में... भारी बारिश में भी मंत्रालय के बाहर डटे 2250 बेरोजगार जिंदगी लुट गई एक फैसले में... भारी बारिश में भी मंत्रालय के बाहर डटे 2250 बेरोजगार

सत्यजीत कुमार

  • रांची ,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:36 AM IST

झारखंड में सरकार द्वारा JSSC CGL exam रद्द किए जाने से SO, ASO समेत अलग अलग पदों पे कार्यरत 2250 उम्मीदवारों की नौकरी एक झटके में चली गई है.

बीती रात ये फैसला हेमन्त सोरेन ने अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ बैठक के बाद लिया था . उसी वक्त से सीजीएल exam qualify कर चुके और नौकरी कर रहे उम्मीदवारी ने पहले मानव श्रृंखला बनाकर विरोध किया और देर रात तक मंत्रालय के बाहर ही भारी बारिश में भी डटे रहे.

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एक झटके में इनकी जिंदगी लुट गई

रौशन कुमार के आंखों से आंसू रुक नहीं रहा है .कहते है कल तक नौकरी थी और अब वो बेरोजगार है.रेलवे की नौकरी छोड़कर आए थे .कोर्ट ने तो गलत तरीके से नौकरी पाने वालों को निकालने के लिए कहा था . सभी को एक झटके में निकालना कैसे सही है.

हेलमेट लगाए ये शख़्स का भाई मंत्रालय में सेक्शन ऑफिसर था .रात से घर नहीं पहुंचा है . हालत इतनी खराब है कि उसे ढाढ़स देने के लिए आए बड़े भाई भी छोटे भाई के हालत को देखकर रो पड़े.

संजीत कुमार भी ASO है . 2017में ग्रेजुएशन करने के बाद रेलवे में पहले नौकरी की.लेकिन झारखंड के किसी सरकारी नौकरी में उन्हें आने की लालच ने उनकी रेलवे और अब सीजीएल की नौकरी छीन ली. घर में ये अकेले कमाने वाले है .घर कैसे चलेगा अब इन्हें बिल्कुल इसका पता नहीं.

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कल तक इसी प्रोजेक्ट भवन में कर्मचारी थे आज बेरोजगार

बता दें कि अभी भी प्रोजेक्ट भवन के बाहर बड़ी संख्या में CGL पास अभ्यर्थी खड़े हैं. कल तक इसी प्रोजेक्ट भवन में काम कर रहे कर्मचारी आज अचानक बाहर हैं.अभ्यर्थियों में सरकार के फैसले को लेकर भारी आक्रोश है. उनका कहना है कि उन्होंने केंद्र सहित अन्य विभाग की नौकरी तक छोड़कर अपने राज्य में काम करने का फैसला लिया था.

अभ्यर्थियों का आरोप है कि बिना उनका पक्ष सुने ही नौकरी रद्द करने का फरमान जारी कर दिया गया. अभ्यर्थियों ने कहा कि कल तक हम सचिवालय कर्मी थे, आज सड़क पर खड़े हैं. सरकार का यह फरमान तुगलकी है.

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