आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है. इस मामले में निलंबित किए गए प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में आईआईटी कानपुर फैकल्टी फोरम उतर आया है. फोरम ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस पूरी घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए. फोरम का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और सारे तथ्य सामने नहीं आ जाते, तब तक किसी को भी बिना वजह जिम्मेदार या दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए.
छात्र के मौत पर जताया शोक
IIT कानपुर फैकल्टी फोरम ने अपने बयान में छात्र की मौत पर शोक जताते हुए कहा कि IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अनुसार, प्रो. डूला घटना के समय कोर्स इंस्ट्रक्टर और परीक्षा में इनविजिलेटर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे. फोरम ने कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं और इस मामले में FIR भी दर्ज हुई है. फोरम ने एक उचित जांच समिति गठित कर मामले के तथ्यों की निष्पक्ष और तरीके से जांच कराने की मांग की है. बयान में कहा गया कि जांच फेयर, ट्रांसपेरेंट और टाइम-बाउंड होनी चाहिए तथा उचित प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को किसी भी रूप में जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए.
अफवाहों से हो सकता है नुकसान
फोरम ने यह भी कहा कि मीडिया ट्रायल और सोशल मीडिया पर अटकलों से संबंधित सभी पक्षों को नुकसान पहुंच सकता है. उसने छात्रों, शिक्षकों, प्रशासन, मीडिया और आम लोगों से मामले की जांच पूरी होने तक संयम और संवेदनशीलता बरतने की अपील की. यह मामला 18 सितंबर को IIT Bombay के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद सामने आया. रिपोर्टों के अनुसार, प्रो. डूला उस परीक्षा में इनविजिलेटर थे, जिसमें साहिल के पास मोबाइल फोन में चैट जीपीटी के जरिए प्रश्नों का जवाब खोलने की कोशिश कर रहा था. बाद में उसी दिन साहिल की मौत हो गई.
बाद में दर्ज हुई FIR
बता दें कि साहिल के परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रो. डूला पर FIR दर्ज की गई थी. मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच मामले की पड़ताल कर रही है. हालांकि, इससे पहले भी कई IITs उनके समर्थन में सामने आए हैं. इनमें IIT बॉम्बे, दिल्ली और मद्रास का नाम शामिल है.
सिमर चावला