डायरेक्टर के कार्यकाल में 4 खुदकुशी? इस्तीफे पर अड़े IIT बॉम्बे के छात्र, क्राइम ब्रांच कर रही जांच

क्या आईआईटी बॉम्बे के कैंपस में मौत एक आदत बन चुकी है? 20 साल के साहिल वाकोड़े की संदिग्ध मौत के बाद छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है. 'चार खुदकुशी के बाद भी कब तक चुप रहेगा प्रशासन?' डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग और हॉस्टल के गेट पर लगे पोस्टर ने खोली सुरक्षा के दावों की पोल. जानिए क्यों क्राइम ब्रांच को सौंपनी पड़ी इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच!

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हॉस्टल के गेट पर लगे पोस्टर ने खोले IIT बॉम्बे के राज! जानिए क्यों डायरेक्टर के इस्तीफे पर अड़े हैं छात्र? हॉस्टल के गेट पर लगे पोस्टर ने खोले IIT बॉम्बे के राज! जानिए क्यों डायरेक्टर के इस्तीफे पर अड़े हैं छात्र?

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • मुंबई,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:44 PM IST

साहिल रवींद्र वाकोड़े (20 वर्ष) की संदिग्ध हालात में हुई मौत के बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थान, IIT बॉम्बे में आक्रोश का ज्वालामुखी फूट पड़ा है. एक तरफ कैंपस की सड़कों पर न्याय की मांग को लेकर छात्र दिन-रात धरने पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच (DCB CID) को सौंप दिया है.

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पोवई पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के बाद अब इस पूरे मामले की जांच क्राइम ब्रांच के एसीपी (ACP) स्तर के अधिकारी कर रहे हैं, जिसकी सीधी निगरानी डीसीपी (Detection-I) द्वारा की जा रही है. पुलिस प्रशासन ने अफवाहों से दूर रहने और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर वो कौन से घाव हैं, जो आईआईटी बॉम्बे के छात्रों को इस कदर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रहे हैं?

हम प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?- हॉस्टल गेट पर लगे बैनर ने खोले प्रशासन के दावे

कैंपस के मुख्य द्वार पर लगे विरोध-प्रदर्शन के बड़े-बड़े बैनरों पर दर्ज मांगें यह बताने के लिए काफी हैं कि छात्रों और संस्थान प्रशासन के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी हो चुकी है:

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छात्र मांग कर रहे हैं कि डायरेक्टर द्वारा 20 सितंबर 2026 को किए गए वादे के मुताबिक प्रो. डूल्ला को न सिर्फ डीन पद से, बल्कि संस्थान की सभी जिम्मेदारियों और भूमिकाओं से तुरंत निलंबित किया जाए.

इसके अलावा साहिल वाकोड़े की मौत से जुड़ी जांच पूरी पारदर्शिता के साथ स्वतंत्र और बाहरी एजेंसी द्वारा कराई जाए. डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी (DAC) की बैठकों के मिनट्स और रिपोर्ट संस्थान के फोरम पर (गुमनाम रूप से) सार्वजनिक किए जाएं. साथ ही, छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई के रूप में 'हॉस्टल से निष्कासन' को पूरी तरह से बंद किया जाए.

स्टूडेंट वेलफेयर काउंसिल (SWC) को एक स्वतंत्र निकाय बनाया जाए और डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर (DoSW) का पद किसी मेडीकली क्वालिफाइड प्रोफेशनल को सौंपा जाए. छात्रो की मांग है ये भी है कि डायरेक्टर सार्वजनिक बयान जारी कर यह स्पष्ट करें कि प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी भी तरह की चीटिंग (धोखाधड़ी) का समर्थन नहीं कर रहे हैं और विरोध दर्ज करा रहे किसी भी छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

छात्र जिस मांग पर अभी भी कायम है वो ये है क‍ि अपने कार्यकाल में चार छात्रों की खुदकुशी का गवाह बनने वाले आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर केदारे अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें.

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यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन और हाई-लेवल कमेटी

साहिल वाकोड़े की मौत के बाद मामला केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहा. मुख्य द्वार पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी जोरदार प्रदर्शन किया. बढ़ते जनआक्रोश और छात्रों के लगातार जारी धरने को देखते हुए आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने साहिल की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है.

हालांकि, प्रदर्शन पर डटे छात्रों का साफ कहना है कि आंतरिक कमेटियों के आश्वासन अब खोखले साबित हो चुके हैं. जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त एक्शन और पारदर्शी निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं.

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