सत्य निकेतन में जर्जर इमारत ढहने की खौफनाक घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है. साउथ कैंपस के दर्जनों कॉलेजों के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं. हाथों में तख्तियां लिए, सड़क पर धरने पर बैठे छात्रों का सीधा आरोप है कि यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही से हुई 'हत्या' है.
छात्रों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि यूनिवर्सिटी में दूर-दराज से आने वाले युवाओं के लिए पर्याप्त हॉस्टल ही नहीं हैं. आंकड़ों की कड़वी सच्चाई यह है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के सिर्फ 20 कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा है. ऐसे में बिहार, यूपी और देश के कोने-कोने से आने वाले हजारों छात्रों के लिए सत्य निकेतन जैसी पतली गलियों, जर्जर इमारतों और लटकते तारों के बीच महंगे PG में रहना एक मजबूरी बन जाता है.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगें
हादसे के जिम्मेदार मकान मालिकों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.
हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को तुरंत उचित मुआवजा दिया जाए.
सत्य निकेतन और कैंपस के आसपास चल रहे सभी प्राइवेट PG और किराए के मकानों की सुरक्षा जांच (Structural Safety Audit) अनिवार्य की जाए.
बाहर से आने वाले छात्रों के लिए DU प्रशासन नए हॉस्टलों का निर्माण तुरंत शुरू करे.
सत्य निकेतन हादसे से आक्रोशित छात्रों का एक ही सवाल है कि क्या DU में पढ़ने वाले छात्रों की जिंदगी की यही कीमत है? परिजनों ने अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य की उम्मीद में दिल्ली भेजा था, लेकिन आज वही छात्र हर रात खौफ के साए में बिताने को मजबूर हैं. प्रदर्शनकारी छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सुरक्षा और आवास की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, उनका यह आंदोलन जारी रहेगा.
अमित भारद्वाज