विक्रमदेव मोहपात्रा ने 14 साल तक सॉफ्टवेयर क्षेत्र में काम करने के बाद और कई टेक कंपनियों में नौकरी की. उन्होंने एक ऐसा करियर बनाया, जिसका सपना कई इंजीनियरिंग ग्रेजुएट देखते हैं. लेकिन इसके बाद उन्होंने आईटी सेक्टर छोड़ने का फैसला किया और ओडिशा के नबरंगपुर स्थित अपने घर लौट आए. अब उनका काम किसी ऑफिस या कॉन्फ्रेंस कॉल के बीच नहीं, बल्कि एक मशरूम उत्पादन यूनिट में होता है. आज उनके द्वारा शुरू किया गया मशरूम खेती और प्रोसेसिंग कारोबार 500-600 किलो मशरूम का उत्पादन करता है यानी हर महीने करीब 15-18 टन मशरूम तैयार होता है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का मासिक राजस्व 16-19 लाख रुपये है. इस कारोबार से स्थानीय समुदाय के 24 लोगों को रोजगार भी मिला है.
बीटेक, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और अब मशरूम की खेती
विक्रमदेव ने साल 2012 में ओडिशा के बीजू पटनायक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने आईटी उद्योग में प्रवेश किया और डिस्कवरचर सॉल्यूशंस, माइंडट्री, सेरोल टेक्नोलॉजीज और एलटीआईमाइंडट्री जैसी कंपनियों के साथ काम किया. इस दौरान उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मॉड्यूल लीड, टेक्निकल लीड और पैकेज इम्प्लीमेंटेशन में सीनियर स्पेशलिस्ट सहित कई भूमिकाएं निभाईं. उनका काम सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, प्रोडक्ट इंप्लीमेंटेशन, SAP सॉल्यूशन, टीम मैनेजमेंट और क्लाइंट कोऑर्डिनेशन से जुड़ा था. यह उनके मौजूदा कृषि कारोबार से बिल्कुल अलग क्षेत्र था. कॉर्पोरेट सेक्टर में 14 साल काम करने के बाद विक्रमदेव नबरंगपुर लौट आए. उन्होंने गंगा भूमि मशरूम की शुरुआत की और व्यावसायिक स्तर पर मशरूम की खेती और प्रोसेसिंग पर ध्यान देना शुरू किया.
कितना होता है उत्पादन
यह कोई छोटा कृषि फार्म नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह इकाई प्रतिदिन लगभग 500-600 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन करती है यानी हर महीने 15-18 टन. उनके यहां तैयार होने वाले मशरूम की सप्लाई ब्रह्मपुर और भुवनेश्वर के बाजारों में की जाती है, जिससे उनका कारोबार पूरे साल चलता रहता है.
नौकरी छोड़ने के बाद क्या?
विक्रमदेव के करियर में बदलाव का सबसे खास पहलू यह है कि आईटी की नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने सिर्फ अपना कारोबार शुरू नहीं किया बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के मौके बनाए. उनकी कंपनी में अब 24 लोग काम करते हैं, जिनमें 18 महिलाएं और 6 पुरुष हैं. इस तरह, पूर्व सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल अब खुद कमाई करने के साथ अपने ही इलाके के लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. उनकी कहानी सिर्फ आईटी की नौकरी छोड़कर खेती शुरू करने की नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कॉर्पोरेट नौकरी से सीखे स्किल किसी नए और अलग कारोबार में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क