सरकारी नौकरी की वैकेंसी देखते समय सबसे पहले नजर सैलरी पर जाती है. नोटिफिकेशन में कई बार बेसिक पे हजारों रुपये में लिखी होती है, जबकि नौकरी लगने के बाद खाते में आने वाली रकम इससे काफी अलग होती है. ऐसे में बेसिक पे और इन-हैंड सैलरी में आखिर कितना फर्क होता है और सरकारी कर्मचारी को वास्तव में कितने पैसे मिलते हैं, इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं.
क्या होती है बेसिक पे?
बेसिक पे का मतलब होता है कर्मचारी की मूल सैलरी का वह हिस्सा, जो उसके पद और पे लेवल के हिसाब से तय होता है. केंद्र सरकार की 7वें वेतन आयोग की व्यवस्था में अलग-अलग पदों के लिए Pay Matrix में बेसिक पे तय की जाती है. इसके ऊपर नियमों के अनुसार अलग-अलग भत्ते मिल सकते हैं. इसे ऐसे समझते हैं कि अगर किसी सरकारी पद के लिए बेसिक सैलरी पे लेवल-10 में ₹56,100 होती है, तो ₹56,100 को कर्मचारी की पूरी मासिक सैलरी नहीं माना जाएगा. इसके अलावा महंगाई भत्ता यानी DA, मकान किराया भत्ता यानी HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस आदि मिल सकते हैं. हालांकि, इन चीजों के लिए भी सरकार के अलग-अलग नियम हैं.
फिर इन-हैंड सैलरी क्या होती है?
वहीं, दूसरी ओर इन-हैंड सैलरी की बात करें, तो वह रकम है जो सभी लागू भत्ते जोड़ने और कर्मचारी की सैलरी से होने वाली जरूरी कटौतियों के बाद हाथ में आती है.
बेसिक पे + लागू भत्ते = कुल सैलरी /ग्रॉस सैलरी
इसके बाद NPS, टैक्स और अन्य लागू कटौतियां घटने के बाद जो रकम कर्मचारी को मिलती है, वही उसकी इन हैंड सैलरी होती है.
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी सरकारी कर्मचारी की:
बेसिक पे -₹56,100 रुपये है. इसके अलावा उसे नियमों के अनुसार DA, HRA और अन्य भत्ते मिलते हैं. इन सभी को जोड़ने के बाद उसकी कुल मासिक कमाई बेसिक पे से ज्यादा हो जाएगी. इसके बाद नियमों के मुताबिक जरूरी कटौतियां की जाती हैं. इन कटौतियों के बाद जो रकम कर्मचारी के बैंक खाते में आती है, उसे इन-हैंड सैलरी कहा जाता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क