कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती. किसी ने कम उम्र में पढ़ाई छोड़ दी, तो किसी ने परिवार और जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पीछे छोड़ दिया लेकिन जब उन्हें दोबारा मौका मिलता है, तो वह किताबें उठाते हैं और अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने निकल पड़ते हैं. आपने भी ऐसे लोगों के बारे में सुना होगा, जो उम्र के उस पड़ाव पर डिग्री हासिल कर रहे हैं, जहां आमतौर पर लोग रिटायरमेंट की सोचते हैं.
लेकिन इस बीच जो सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि क्या भारत में पढ़ाई की कोई उम्र निर्धारित की गई है? क्या कॉलेज में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन या PhD में एडमिशन के लिए अधिकतम उम्र सीमा तय है? या फिर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा और योग्यता के आधार पर किसी भी उम्र में पढ़ाई जारी रख सकता है? तो चलिए जानते हैं इस नियम को.
क्या ग्रेजुएशन करने की तय है सीमा?
12वीं पूरी करने के बाद कई बार घर की स्थिति, परिवार की जिम्मेदारी या अन्य वजहों से युवा पढ़ाई छोड़ देते हैं. लेकिन जब वह अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होते हैं, तो फिर वह अपनी आगे की पढ़ाई करने का सपना देखते हैं. वैसे तो ग्रेजुएशन करने के लिए कोई अधिकतम एज लीमिट नहीं है लेकिन हर जगह पर ऐसा नहीं है. कई विश्वविद्यालय या कॉलेज में एज लीमिट होती है, तो कई में नहीं होती है. इससे 50 से लेकर किसी भी उम्र के लोग पढ़ाई कर सकते हैं. हालांकि, कॉलेजों के अलग नियमों को देखकर एडमिशन ले सकते हैं.
ओपन यूनिवर्सिटी के क्या है नियम?
बढ़ती उम्र और जिम्मेदारी वाले लोगों के लिए ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग यानी ओडीएल एक अहम विकल्प हो सकता है. ओपन लर्निंग से यह फायदा रहेगा कि जो नौकरी, परिवार की जिम्मेदारी या दूसरी व्यस्तताओं के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं. इसके लिए इग्नू के कई प्रोग्राम में एज बार नहीं है. विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी में कई यूजी और पीजी प्रोग्राम के लिए उम्र की पाबंदी नहीं होने की जानकारी दी गई है.
पोस्ट ग्रेजुएशन के नियम?
वहीं, अगर पोस्ट ग्रेजुएशन की बात करें, तो इसके लिए भी कोई खास नियम नहीं होते हैं. कई विश्वविद्यालय और कॉलेज कोई अधिकतम एज नहीं रखते हैं. हालांकि, अलग-अलग कॉलेज के नियम बदल सकते हैं. वहीं, phd को लेकर नियम भी ऐसे ही हैं. UGC नेट के मौजूदा नियम में phd एडमिशन के लिए यूजीसी-नेट में आवेदन करने की कोई अपर एज लिमिट नहीं है लेकिन वहीं, जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी जेआरएफ के लिए अलग एज लिमिट होती है. हालांकि, पीएचडी में केवल उम्र ही नहीं बल्कि संबंधित विश्वविद्यालय की एलिजिबिलिटी, सब्जेक्ट रिक्वायरमेंट्स, एंट्रेंस टेस्ट, इंटरव्यू, रिसर्च प्रपोजल और उपलब्ध सुपरवाइजर जैसी शर्तें को भी बहुत अहम माना जाता है.
आजतक एजुकेशन डेस्क