'सैनिकों को खाना ही नहीं मिल रहा...' अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन को ईरान ने दी ऐसी गहरी चोट

ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बहरीन में अमेरिकी नौसेना का लॉजिस्टिक्स हब क्षतिग्रस्त होने के बाद सप्लाई लाइन डिएगो गार्सिया शिफ्ट हुई है. यूएसएस अब्राहम लिंकन पर लंबे सप्लाई रूट से ताजा खाना खराब हो रहा है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता यूएसएस अब्राहम लिंकन. (File Photo: Getty) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता यूएसएस अब्राहम लिंकन. (File Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:35 PM IST

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में गंभीर आपूर्ति चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने युद्ध के पहले दिन ही बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. 

इससे नौसेना को अपना क्षेत्रीय आपूर्ति केंद्र दूर डिएगो गार्सिया द्वीप पर शिफ्ट करना पड़ा, जो लगभग 2200 मील यानी करीब 3550 किलोमीटर दूर है. इस लंबे सप्लाई रूट के कारण ताजा खाद्य सामग्री अक्सर खराब हो जाती है और नाविकों को फ्रोजन फूड पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

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बहरीन में स्थित नेवल सपोर्ट एक्टिविटी अमेरिकी पांचवें बेड़े का मुख्य अड्डा था और दशकों से खाड़ी क्षेत्र में एयरक्राफ्ट कैरियरों की आपूर्ति का केंद्र रहा है. संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह पोर्ट के साथ यह जगह पारंपरिक रूप से अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के लिए आराम और रीसप्लाई का मुख्य पड़ाव थी. लेकिन दोनों जगहें ईरानी मिसाइलों की रेंज में आती हैं. हमले के बाद इन सुविधाओं का इस्तेमाल जोखिम भरा हो गया.

डिएगो गार्सिया शिफ्ट और अब नई चुनौतियां

नौसेना ने ब्रिटिश नियंत्रण वाले डिएगो गार्सिया द्वीप को नया मुख्य लॉजिस्टिक्स हब बनाया. यह जगह ईरान से करीब 4000 किलोमीटर दूर है, इसलिए अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी गई. फिर भी ईरान ने मार्च में यहां भी बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. एक मिसाइल लक्ष्य से पहले गिर गई जबकि दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत ने इंटरसेप्ट कर लिया. इससे साफ हो गया कि दूर होने के बावजूद यह जगह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है.

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लंबी दूरी का सप्लाई चेन पोत पर खाने-पीने और जरूरी सामान पहुंचाने में देरी पैदा कर रहा है. ताजा फल-सब्जियां और अन्य सामग्री रास्ते में खराब हो जाती है. नतीजतन नाविक ज्यादातर फ्रोजन फूड पर निर्भर हैं. पोत करीब नौ महीने से समुद्र में है और बिना लिबर्टी कॉल के लगातार ऑपरेशन चला रहा है. यह ईरानी पोर्ट्स की नाकाबंदी और युद्ध संचालन का समर्थन कर रहा है. सांसदों ने बुनियादी आपूर्ति की कमी और चालक दल के मनोबल गिरने की चिंता जताई है.

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लंबी तैनाती और चालक दल पर असर

यूएसएस अब्राहम लिंकन की यह तैनाती असामान्य रूप से लंबी और तनावपूर्ण रही है. लगभग 5000 नाविक और मरीन लगातार मिशन में लगे हुए हैं. रिपोर्ट्स में आपूर्ति की कमी के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का भी जिक्र है. नौसेना ने माना है कि संघर्ष के कारण पारंपरिक आपूर्ति केंद्र बाधित हुए,जिससे कमी आई. 

अब मिशन-क्रिटिकल सामान को प्राथमिकता दी जा रही है पहले खाना,फिर स्वच्छता सामग्री और फिर मेल. नौसेना अब थके हुए लिंकन को राहत देने के लिए यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को भेज रही है,जो मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. क्षेत्र में यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश भी कई महीनों से ऑपरेट कर रहा है. यह बदलाव अमेरिकी नौसेना की क्षमता और लंबे संघर्ष में लॉजिस्टिक्स सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है.

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लॉजिस्टिक्स की कमजोरी और रणनीतिक सबक

यह घटना दिखाती है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ लड़ाकू पोतों पर हमला करना जरूरी नहीं. आपूर्ति केंद्रों को निशाना बनाकर दुश्मन की युद्ध क्षमता को धीरे-धीरे कमजोर किया जा सकता है. बहरीन हब के नुकसान ने अमेरिकी कैरियर ऑपरेशंस को बनाए रखने के लिए लंबी और जोखिम भरी सप्लाई लाइन थोप दी. इससे न सिर्फ भौतिक आपूर्ति प्रभावित हुई बल्कि चालक दल के मनोबल और थकान पर भी असर पड़ा.

अमेरिकी नौसेना के लिए यह सबक है कि क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स को अधिक सुरक्षित और विविध बनाना होगा. डिएगो गार्सिया जैसे दूर के ठिकाने अस्थायी समाधान तो दे सकते हैं लेकिन लंबे संघर्ष में चुनौतियां बढ़ाते हैं. जॉर्ज वाशिंगटन के आने से लिंकन को राहत मिलेगी, लेकिन कुल मिलाकर यह स्थिति दिखाती है कि समुद्री युद्ध में लॉजिस्टिक्स सिस्टम कितनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील होती है.

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