नए युद्ध की स्क्रिप्ट तैयार! नेतन्याहू के किस ऐलान पर ईरान ने दे दी जंगी धमकी

लेबनान में नई जंग की आशंका बढ़ गई है. इजरायल कह रहा है कि हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ेगा तो हम लेबनान से नहीं हटेंगे. ईरान का कहना है कि इजरायल पहले हटे और लड़ाई बंद करे.

Advertisement
इजरायल की लेबनान पर धमकी से ईरान भी भड़का हुआ है. (Photo: ITG) इजरायल की लेबनान पर धमकी से ईरान भी भड़का हुआ है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

लेबनान दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व का एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण देश है. यहां इजरायल की सीमा से लगा दक्षिणी इलाका लंबे समय से तनाव का केंद्र रहा है. हिज्बुल्लाह ईरान समर्थित एक मजबूत संगठन है, यहां सक्रिय है. हाल के वर्षों में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच कई बार झड़पें हुई हैं. 

2026  में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. इजरायल ने साफ कहा है कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता, उसके सैनिक लेबनान के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटेंगे. वहीं ईरान का रुख है कि इजरायल को पहले पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. यह जिद दोनों तरफ से नई जंग की स्क्रिप्ट लिख रही है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर में जंग का नक्शा बनाने वाले जहाज को मिली अंतिम ऑपरेशनल मंजूरी

विश्लेषकों के अनुसार, यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं है. यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, हथियार नियंत्रण और बड़े देशों की रणनीति से जुड़ा मुद्दा है. लेबनान की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है, लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और अगर नई जंग छिड़ी तो मानवीय संकट और बढ़ जाएगा.

इजरायल का रुख: सुरक्षा पहले, हथियार छोड़ो

इजरायल बार-बार कह रहा है कि उसकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. हिज्बुल्लाह के पास हजारों रॉकेट और हथियार हैं जो इजरायल के शहरों को निशाना बना सकते हैं. इजरायली प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दक्षिणी लेबनान में एक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखना जरूरी है. अगर हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ता तो इजरायली सेना वहां बनी रहेगी.

Advertisement

इजरायल का तर्क है कि पिछले समझौतों में हिज्बुल्लाह ने हथियार छोड़ने का वादा किया लेकिन पूरा नहीं किया. इसलिए अब वे भरोसा नहीं कर रहे. इजरायल के अनुसार, हिज्बुल्लाह का हथियार रखना न सिर्फ इजरायल के लिए खतरा है बल्कि लेबनान की संप्रभुता को भी कमजोर करता है. इजरायल ने कई बार हवाई हमले किए हैं ताकि हिज्बुल्लाह की क्षमता कम हो. लेकिन इससे तनाव और बढ़ा है. अगर हिज्बुल्लाह फिर से हमला करता है तो इजरायल बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर सकता है.

हिज्बुल्लाह और लेबनान की स्थिति 

हिज्बुल्लाह खुद को लेबनान का रक्षक बताता है. उसके नेता कहते हैं कि इजरायल की मौजूदगी के खिलाफ वे हथियार नहीं छोड़ेंगे. हिज्बुल्लाह का मानना है कि इजरायल पहले लेबनान की जमीन छोड़े, तब बात हो सकती है. उन्होंने कुछ हथियार लेबनानी सेना को सौंपे लेकिन पूरी तरह से हथियार छोड़ने की बात नहीं मानी. 

यह भी पढ़ें: गिरती दीवारें, "गिरती दीवारें, सड़कों पर दरारें, चीखते लोग... वेनेजुएला भूकंप की दहला देने वाली Photos

लेबनान सरकार कमजोर है. देश में आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और विभिन्न गुटों के बीच मतभेद हैं. हिज्बुल्लाह लेबनान की राजनीति में भी मजबूत है. अगर इजरायल नहीं हटता तो हिज्बुल्लाह समर्थकों में गुस्सा बढ़ेगा और नई लड़ाई शुरू हो सकती है. लेबनानी सेना दक्षिण में तैनात है लेकिन हिज्बुल्लाह की ताकत के आगे उसकी भूमिका सीमित लगती है.

Advertisement

ईरान का रणनीतिक खेल: इजरायल पहले हटे

ईरान हिज्बुल्लाह का मुख्य समर्थक है. वह हथियार, पैसा और प्रशिक्षण देता है. ईरान का कहना है कि इजरायल को लेबनान से पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल हमले जारी रखता है तो वह जवाब देगा. ईरान-इजरायल के बीच अप्रत्यक्ष युद्ध लंबे समय से चल रहा है.

ईरान के लिए लेबनान सिर्फ एक मोर्चा है. वह पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है. अगर इजरायल लेबनान में बना रहा तो ईरान दूसरे मोर्चों पर भी दबाव डाल सकता है. हाल के बयानों में ईरान ने कहा कि कोई भी समझौता लेबनान को कवर करे. इससे अमेरिका और इजरायल के बीच भी तनाव बढ़ा है.

नई जंग की संभावित स्क्रिप्ट: क्या हो सकता है?

विश्लेषक मानते हैं कि अगर बात नहीं बनी तो नई जंग की स्क्रिप्ट इस तरह हो सकती है. पहले छोटी-छोटी झड़पें बढ़ेंगी. हिज्बुल्लाह रॉकेट दागेगा, इजरायल हवाई हमले करेगा. इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में और अंदर घुस सकती है. ईरान हिज्बुल्लाह को और मदद भेजेगा या दूसरे इलाकों से दबाव डालेगा.

यह भी पढ़ें: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में चीन के जिस फाइटर जेट को गिराया, उसे खरीदेगा बांग्लादेश

Advertisement

इससे लेबनान में बड़े पैमाने पर तबाही होगी। हजारों लोग मारे जा सकते हैं, लाखों विस्थापित होंगे. बुनियादी ढांचा बर्बाद होगा. इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा क्योंकि सैनिकों की तैनाती महंगी है. अमेरिका, जो शांति चाहता है, बीच में फंस सकता है.

संयुक्त राष्ट्र और अन्य देश सीजफायर की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दोनों पक्षों की जिद इसे मुश्किल बना रही है. अगर इजरायल हटने से इनकार करता रहा और हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ा तो युद्ध टलना मुश्किल होगा.

लेबनान की जंग सिर्फ दो देशों की नहीं है. यह पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित करेगी. सऊदी अरब, तुर्की जैसे देश प्रभावित होंगे. तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा. मानवीय संकट गहराएगा. लेबनान में पहले से लाखों शरणार्थी हैं. नई जंग से भूख, बीमारी और बेघर होने की समस्या बढ़ेगी. बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे, अस्पताल नष्ट हो जाएंगे.

क्या है समाधान?

समाधान मुश्किल लेकिन नामुमकिन नहीं. दोनों पक्षों को समझौता करना होगा. इजरायल को सुरक्षा गारंटी मिले और हिज्बुल्लाह हथियारों का कुछ हिस्सा लेबनानी सेना को सौंप दे. ईरान को भी आश्वासन चाहिए कि उसके हित सुरक्षित हैं. अमेरिका और अन्य शक्तियां मध्यस्थता कर सकती हैं. लेबनान की सरकार को मजबूत होना चाहिए ताकि वह अपने पूरे इलाके पर नियंत्रण रख सके. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आर्थिक मदद देकर लेबनान को स्थिर करना चाहिए. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »