रूस की सरकारी डिफेंस कंपनी रोस्टेक (Rostec) ने AK सीरीज की राइफलों के लिए नया 'म्नोगोटोचिये' (Mnogotochie) कारतूस विकसित किया है. कंपनी का दावा है कि यह कारतूस छोटे ड्रोन (UAV) को निशाना बनाने की क्षमता को पहले के मुकाबले 2.5 गुना तक बढ़ा सकता है. यह नई गोली मौजूदा AK राइफलों में इस्तेमाल की जा सकेगी और करीब 300 मीटर तक छोटे ड्रोन के खिलाफ प्रभावी बताई जा रही है.
रोस्टेक के मुताबिक, 'म्नोगोटोचिये' कारतूस की सबसे बड़ी खासियत इसकी डिजाइन है. यह गोली राइफल के बैरल से बाहर निकलने के बाद तीन अलग-अलग प्रोजेक्टाइल में बंट जाती है. इससे गोली का फैलाव बढ़ जाता है और तेजी से उड़ रहे छोटे ड्रोन को निशाना बनाने की संभावना भी बढ़ जाती है. कंपनी का दावा है कि यह तकनीक छोटे UAV के खिलाफ करीब 2.5 गुना बेहतर असर दिखा सकती है.
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इस कारतूस को इस तरह तैयार किया गया है कि इसके लिए नई राइफल खरीदने की जरूरत नहीं पड़े. यह 5.45×39 मिमी और 7.62×54 मिमी कारतूस केस का इस्तेमाल करता है, जो पहले से रूसी हथियारों में उपयोग किए जाते हैं. इससे सेना अपनी मौजूदा AK सीरीज की राइफलों के साथ भी इस नए कारतूस का इस्तेमाल कर सकेगी.
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रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई संघर्षों में छोटे ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. निगरानी, हमला और विस्फोटक पहुंचाने जैसे मिशनों में इनका बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है. इसी वजह से दुनिया के कई देश महंगे एयर डिफेंस सिस्टम के साथ ऐसे हथियार भी विकसित कर रहे हैं, जिनसे सामान्य सैनिक भी ड्रोन का मुकाबला कर सकें.
फिलहाल रोस्टेक ने इस कारतूस की क्षमता को लेकर दावा किया है. हालांकि, अभी तक किसी दूसरी एजेंसी ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है. इसके बावजूद यह साफ है कि बढ़ते ड्रोन खतरे को देखते हुए पारंपरिक हथियारों को नई तकनीक के साथ अपग्रेड करने की कोशिशें तेज हो रही हैं.
ऋचीक मिश्रा