पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक का जवाब तालिबान क्या गोरिल्ला युद्ध से देगा? युद्ध छिड़ने के करीब

पाकिस्तान की हालिया एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान गोरिल्ला युद्ध से जवाब दे सकता है. दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है. विशेषज्ञों का मानना है कि जंग छिड़ने की आशंका बढ़ गई है.

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तालिबान के हथियार पुराने जरूर हैं लेकिन छापामार युद्ध में वे पारंगत है. (File Photo: Reuters) तालिबान के हथियार पुराने जरूर हैं लेकिन छापामार युद्ध में वे पारंगत है. (File Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:44 AM IST

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पकतिका प्रांतों में एयरस्ट्राइक की. तालिबान के अनुसार इन हमलों में 13 आम नागरिक मारे गए, जिनमें 11 बच्चे शामिल हैं. पाकिस्तान का दावा है कि उसने 26 तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों को मारा. यह घटना दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को और भड़का रही है.

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सवाल उठ रहा है कि तालिबान इस हमले का जवाब किस तरह देगा – क्या वह गोरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाएगा? और क्या जंग छिड़ने वाली है?

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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच दुश्मनी नई नहीं है. दोनों देशों की सीमा (डूरंड लाइन) पर विवाद है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान में TTP जैसे समूह छिपकर पाकिस्तान में हमले करते हैं. TTP पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है. जब तालिबान 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता में आया तो पाकिस्तान को उम्मीद थी कि संबंध सुधरेंगे, लेकिन उल्टा हुआ. TTP की गतिविधियां बढ़ गईं हैं. 

2025-2026 में कई बार पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की. तालिबान ने भी जवाब दिया. फरवरी 2026 में ओपन वॉर की स्थिति बन गई थी. जून 2026 की ताजा एयरस्ट्राइक ने फिर से आग भड़का दी है. पाकिस्तान कहता है कि उसके हमले सटीक थे. सिर्फ आतंकियों को निशाना बनाया. लेकिन तालिबान नागरिकों की मौत का आरोप लगा रहा है.

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तालिबान गोरिल्ला युद्ध में माहिर क्यों है?

तालिबान 20 साल तक अमेरिका और नाटो से लड़ चुका है. उस समय उसने गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) की रणनीति अपनाई थी. इसमें छोटे-छोटे हमले, IED ब्लास्ट, घात लगाकर हमला और फिर छिप जाना शामिल होता है. तालिबान के पास जेट या टैंक कम हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों, सुरंगों और लोकल सपोर्ट का फायदा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की सेना मजबूत है – उसके पास परमाणु हथियार, एयर फोर्स और आधुनिक हथियार हैं. लेकिन तालिबान अगर गोरिल्ला युद्ध लड़े तो पाकिस्तान के लिए लंबा और महंगा युद्ध हो सकता है. अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति (पहाड़, घाटियां) गोरिल्ला युद्ध के लिए आदर्श है.

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क्या युद्ध छिड़ने के करीब है?

फिलहाल जंग की स्थिति नहीं है, लेकिन तनाव बहुत है. दोनों तरफ से हमले हो रहे हैं. अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान के अंदर कुछ जगहों पर हमले किए हैं. अगर तालिबान बड़े स्तर पर जवाब देता है तो स्थिति बिगड़ सकती है. 

पाकिस्तान को आर्थिक और राजनीतिक समस्याएं हैं. लंबा युद्ध उसकी अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर सकता है. तालिबान को भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता और मदद चाहिए, इसलिए वह पूरी जंग नहीं चाहता. लेकिन घरेलू दबाव में उसे जवाब देना पड़ेगा.

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दोनों तरफ के फायदे-नुकसान

  • पाकिस्तान की ताकत: बेहतर हथियार, एयरस्ट्राइक क्षमता, प्रशिक्षित सेना.
  • तालिबान की ताकत: अनुभव, लोकल जान-पहचान, गोरिल्ला रणनीति, लंबे समय तक लड़ने की क्षमता.

अगर युद्ध बढ़ा तो आम नागरिकों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा. पहले ही सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं. सीमा पर व्यापार बंद हो सकता है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य

चीन, रूस, अमेरिका और अन्य देश चिंतित हैं. वे चाहते हैं कि दोनों पक्ष बातचीत करें. लेकिन अब तक कोई स्थाई समाधान नहीं निकला. TTP समस्या का मूल है. अगर तालिबान TTP पर अंकुश लगाए तो शांति संभव है.

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो यह क्षेत्रीय अस्थिरता का बड़ा कारण बन सकता है. गोरिल्ला युद्ध की शुरुआत हो चुकी है - छोटे हमले, ड्रोन हमले और सीमा पर झड़पें बढ़ रही हैं. पूर्ण युद्ध अभी टल सकता है, लेकिन खतरा बना हुआ है. 

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