समुद्र सुरक्षित तो देश सुरक्षित, नौसेना प्रमुख ने बताया अर्थव्यवस्था में समुद्री ताकत का महत्व

चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने बताया कि बदलते वैश्विक हालात में भारतीय नौसेना किस तरह संभावित हॉटस्पॉट्स पर पहले से तैनाती कर रही है और हिंद महासागर में भारत की मैरीटाइम पावर क्यों लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है.

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समुद्र पर टिकी है भारत की जिंदगी, नौसेना प्रमुख ने समझाया महत्व (Photo-ITG) समुद्र पर टिकी है भारत की जिंदगी, नौसेना प्रमुख ने समझाया महत्व (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 07 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

आजतक के कार्यक्रम ‘सुरक्षा सभा’ के सेशन ‘लहरों के सिकंदर’ में चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने भारतीय नौसेना की ताकत, देश की समुद्री सुरक्षा, मैरीटाइम पावर और बदलती वैश्विक परिस्थितियों पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की शक्ति सिर्फ उसके जहाजों, पनडुब्बियों और विमानों में नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी ताकत देश का उस पर भरोसा है.

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उन्होंने कहा कि भारत को अक्सर एक लैंड पावर के तौर पर देखा जाता है, लेकिन भारत का इतिहास, अर्थव्यवस्था और सभ्यता समुद्र से भी गहराई से जुड़ी रही है. एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि भारत के पूर्वजों ने समुद्र को कभी बाधा नहीं माना, बल्कि उसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा. भारत के पास करीब 11,100 किलोमीटर लंबी तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) है. उन्होंने कहा कि ये आंकड़े केवल डेटा नहीं हैं, बल्कि भारत के अवसरों और जिम्मेदारियों को दर्शाते हैं. यह शायद संयोग नहीं है कि दुनिया का एकमात्र महासागर जिसका नाम किसी देश के नाम पर है, वह हिंद महासागर यानी इंडियन ओशन है.

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एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि समुद्र की अहमियत सिर्फ इतिहास और भूगोल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के दैनिक जीवन से जुड़ा है. भारत के करीब 95 प्रतिशत व्यापार का वॉल्यूम समुद्री मार्गों से आता-जाता है. उन्होंने कहा कि गाड़ियों का ईंधन, घरों में इस्तेमाल होने वाली कुकिंग गैस, किसानों के लिए फर्टिलाइजर और उद्योगों के लिए कच्चा माल इन सभी की सप्लाई चेन समुद्र से जुड़ी हुई है.

इतना ही नहीं, भारत की डिजिटल दुनिया भी समुद्र के नीचे से गुजरती है, करीब 99 प्रतिशत इंटरनेशनल डेटा सबमरीन फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए आता है. वीडियो कॉल, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और भारत का सर्विस एक्सपोर्ट, सबके पीछे समुद्र के नीचे फैला एक विशाल नेटवर्क काम करता है.

समुद्री सुरक्षा यानी हर भारतीय की सुरक्षा

एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि इसी वजह से समुद्र की सुरक्षा हर भारतीय की सुरक्षा और देश की समृद्धि से सीधे जुड़ी हुई है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जिस देश की समुद्री शक्ति जितनी मजबूत होगी, उसका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव उतना ही सशक्त होगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आज समुद्र पहले से कहीं अधिक कंटेस्टेड हो चुका है. दुनिया की अर्थव्यवस्था समुद्र पर निर्भर है और इसलिए समुद्र में पैदा होने वाला संकट सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहता. रेड सी और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने यह साफ तौर पर दिखाया है कि समुद्री संकट कितनी तेजी से सप्लाई चेन, एनर्जी सिक्योरिटी और आम भारतीय के जीवन को प्रभावित कर सकता है.

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भारत किसी संघर्ष से दूर रह सकता है, लेकिन ग्लोबल इकोनॉमी के इंटरकनेक्टेड होने के कारण संघर्ष के परिणामों से पूरी तरह दूर नहीं रह सकता.

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एक LPG जहाज से लाखों परिवारों की जरूरत पूरी

समुद्र की अहमियत समझाते हुए एडमिरल स्वामीनाथन ने LPG कैरियर का उदाहरण दिया, उन्होंने कहा कि एक LPG कैरियर करीब 45 से 50 हजार टन LPG लेकर भारत आ सकता है. यह लगभग 32 से 35 लाख घरेलू LPG सिलेंडर के बराबर है. यानी समुद्र के रास्ते आने वाला एक जहाज करीब 5 लाख भारतीय परिवारों की एक साल की कुकिंग गैस की जरूरत पूरी कर सकता है. उन्होंने कहा कि जब हम कहते हैं कि नौसेना समुद्र की सुरक्षा करती है, तो इसका अर्थ सिर्फ किसी एक जहाज की रक्षा करना नहीं है. यह भारत की अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और करोड़ों भारतीयों के जीवन की निरंतरता की रक्षा करना है.

विकसित भारत 2047 में मैरीटाइम पावर की अहम भूमिका

स्वामीनाथन ने कहा कि विकसित भारत 2047 की चर्चा में मैरीटाइम पावर को केंद्र में रखना जरूरी है. भारत का भविष्य सिर्फ उसकी सड़कों, शहरों और आसमान में नहीं लिखा जाएगा, बल्कि उसका एक बड़ा हिस्सा समुद्र पर भी लिखा जाएगा. इस भविष्य को सुरक्षित रखने में भारतीय नौसेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना भारत की मैरीटाइम एम्पायर का अहम मैनिफेस्टेशन है. भारत के मैरीटाइम इंटरेस्ट बढ़ रहे हैं और इसके साथ देश की जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं.

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एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारतीय नौसेना की दो बड़ी जिम्मेदारियां हैं, पहली, समुद्र से आने वाले किसी भी खतरे से भारत की रक्षा करना और दूसरी, समुद्र में भारत के हितों की रक्षा करना. उन्होंने कहा कि भारत के हित वहां खत्म नहीं होते, जहां उसकी कोस्टलाइन समाप्त होती है. भारत का व्यापार, एनर्जी सिक्योरिटी, जहाज, नागरिक, डायस्पोरा और राष्ट्रीय हित, इनकी सुरक्षा का दायरा समुद्र में बहुत दूर तक जाता है.

उन्होंने कहा कि दुनिया में संघर्ष बढ़ रहे हैं, संयम घट रहा है और संकट सीमाओं के पार फैल रहे हैं, ऐसे माहौल में नौसेना की जिम्मेदारी है कि उसकी क्षमता और तैयारी ऐसी हो कि किसी भी प्रतिद्वंद्वी को भारत के खिलाफ कदम उठाने से पहले उसकी कीमत का एहसास हो, और अगर चुनौती सामने आती है तो नौसेना तेज और निर्णायक कार्रवाई के लिए तैयार रहे. 

'जब देश सोता है, समुद्र में तैनात रहते हैं नौसैनिक'

एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि नौसेना की तैयारी का बड़ा हिस्सा सुर्खियों में नहीं आता, जब देशवासी सो रहे होते हैं, तब नौसेना के जहाज समुद्र में तैनात रहते हैं, जब लोग अपने घरों में होते हैं, तब नौसेना की पनडुब्बियां अपने मिशन पर होती हैं. त्योहारों के दौरान जब लोग अपने परिवारों के साथ होते हैं, तब नौसैनिक और अधिकारी समुद्र में ट्रेनिंग और ऑपरेशन में जुटे होते हैं, उन्होंने कहा कि जब भी देश को नौसेना की जरूरत हो, तब नौसेना को पहले से तैयार होना चाहिए. यही उनके लिए कॉम्बैट रेडी होने का मतलब है.  नौसेना की क्रेडिबिलिटी सिर्फ उसके हथियारों या प्लेटफॉर्म से नहीं आती, क्रेडिबिलिटी उस भरोसे का नाम है कि जरूरत के समय नौसेना वहां मौजूद होगी.

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उन्होंने पश्चिम एशिया में हालिया संकट के दौरान ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि जब समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ा, तब भारतीय नौसेना ने जरूरी सामान लेकर भारत आ रहे 32 मर्चेंट वेसल्स को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया. इन जहाजों पर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक का जरूरी कार्गो था. यह केवल जहाजों को एस्कॉर्ट करना नहीं था, बल्कि भारत की आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना था, जब भी राष्ट्रीय हित इसकी मांग करेंगे, भारतीय नौसेना अपनी पूरी क्षमता के साथ सामने होगी.

संकट में फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनी नौसेना

उन्होंने कहा कि क्रेडिबल नेवी का मतलब सिर्फ सिक्योरिटी ऑपरेशन नहीं है, इसका एक दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका भी है. उन्होंने म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा, श्रीलंका में ऑपरेशन सागर बंधु और यमन तथा सूडान में चलाए गए इवैक्युएशन ऑपरेशंस का उदाहरण दिया, उन्होंने कहा कि जब भी संकट आया, भारतीय नौसेना ने सहायता पहुंचाई. कई बार सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि दूसरे देशों के नागरिकों के लिए भी. एक मजबूत नौसेना केवल अपनी शक्ति दिखाने के लिए नहीं होती, बल्कि जरूरत के समय अपनी शक्ति का इस्तेमाल जीवन बचाने के लिए भी करती है. यही वह क्रेडिबल नेवी है, जिस पर देश भरोसा करता है और जो संकट के समय सबसे पहले दिखाई देती है.

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टेक्नोलॉजी से बड़ी ताकत नौसेना के लोग

एकजुट नौसेना की बात करते हुए एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि आज टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है. भारतीय नौसेना के युद्धपोत आधुनिक सेंसर, हथियार, कम्युनिकेशन और कॉम्बैट सिस्टम से लैस हैं, लेकिन एक बात कभी नहीं बदलतीएक युद्धपोत अपने आप नहीं लड़ता, उसके पीछे लोग होते हैं. भारतीय नौसेना के पुरुष और महिला अधिकारी और सेलर्स ही उस तकनीक को समझते हैं, फैसले लेते हैं और कठिन परिस्थितियों में अपने साथियों पर भरोसा करते हुए मिशन को पूरा करते हैं, उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की असली ताकत केवल उसके प्लेटफॉर्म नहीं हैं, उसकी असली ताकत उसके लोग हैं ऑफिसर्स, सेलर्स, अग्निवीर और डिफेंस सिविलियन्स, उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी हमें कैपेबिलिटी देती है, लेकिन उस कैपेबिलिटी को कॉम्बैट पावर में बदलने का काम हमारे सैनिक करते हैं.

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उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना वैश्विक जियोपॉलिटिकल और सिक्योरिटी ट्रेंड्स पर लगातार नजर रखते हुए संभावित हॉटस्पॉट्स पर पहले से अपने जहाजों और प्लेटफॉर्म्स की तैनाती करती है, ताकि किसी संकट की स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम कम किया जा सके. मौजूदा संघर्षों से सबसे बड़ी सीख यह है कि जियोग्राफी रणनीति और सुरक्षा की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

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