पहाड़ हो या मैदान... पाकिस्तान के टैंक पर कहीं से भी होगा अटैक, भारत खरीदेगा ये खतरनाक वेपन

भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी में है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसकी पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के रक्षा सहयोग में बड़ा कदम बताया है.

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जैवलीन एंटी-टैंक सिस्टम (Photo- lockheedmartin.com) जैवलीन एंटी-टैंक सिस्टम (Photo- lockheedmartin.com)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारत अमेरिका से जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी. उन्होंने इसे भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिए बड़ा कदम बताया. साथ ही दोनों देशों के बीच जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम की साथ मिलकर प्रोडक्शन करने की संभावना भी जताई है.

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जैवलिन एक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है. इसे सैनिक कंधे से लॉन्च कर सकते हैं. इसकी खासियत यह है कि इसे अलग-अलग इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सकता है.

(फोटो- lockheedmartin)

 

पहाड़ी इलाकों से लेकर खुले मैदान तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. यह सिस्टम टैंकों और दूसरे बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है.

अमेरिकी राजदूत ने अपने बयान में क्या कहा?

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत का जैवलिन खरीदने का फैसला दोनों देशों के रक्षा रिश्तों को और मजबूत करेगा. उन्होंने मई 2026 में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री की ओर से कही गई बातों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस सौदे से भारत में जैवलिन के सह-उत्पादन का रास्ता भी खुल सकता है.

(फोटो- lockheedmartin)

 

भारत लंबे समय से अपनी सेना की एंटी-टैंक क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है. ऐसे में जैवलिन सिस्टम की संभावित खरीद को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. खासकर सीमावर्ती इलाकों में टैंक और बख्तरबंद वाहनों से निपटने के लिए ऐसे हथियार अहम माने जाते हैं.

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भारतीय सेना ने साइन किया लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस

अमेरिका ने कहा है कि भारतीय सेना ने अमेरिकी फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रक्रिया के तहत जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इसके साथ ही भारत जैवलिन सिस्टम का ग्राहक बन गया है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि यह समझौता भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और गहरा करता है और भारतीय सेना के लिए अमेरिकी समर्थन को दिखाता है. जैवलिन एक एडवांस्ड, मीडियम-रेंज, फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल बख्तरबंद वाहनों और मजबूत ठिकानों के खिलाफ किया जा सकता है.

अमेरिकी दूतावास के मुताबिक, जैवलिन सिस्टम का निर्माण आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन की ज्वाइंट वेंचर कंपनी करती है. यह सिस्टम अमेरिकी सेना और मरीन कॉर्प्स के अलावा कई दूसरे देशों की सेनाएं भी इस्तेमाल करती हैं. अमेरिका का कहना है कि इस सौदे से दोनों देशों की डिफेंस इंडस्ट्री के बीच आगे सह-उत्पादन की संभावनाएं खुलेंगी. इससे भारत और अमेरिका के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मजबूत करने के लिए नए सहयोग का रास्ता भी तैयार होगा.

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