3640 मौतें, 90 हजार घर गिरे, जानिए 40 दिन की जंग में किसे कितना नुकसान

28 फरवरी से शुरू हुई अमेरिका, इजरायल और ईरान की 40 दिन की जंग में 3640 लोग मारे गए. ईरान में 2076, लेबनान में 1497, इजरायल में 26 और अमेरिका में 13 मौतें हुईं. 90 हजार घर, 760 स्कूल और 307 अस्पताल तबाह हो गए. खाड़ी देशों में भी भारी नुकसान हुआ.

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तेहरान में अमेरिका और इजरायल के हमले के बर्बाद हुई इमारत को देखती युवती. (File Photo: AP) तेहरान में अमेरिका और इजरायल के हमले के बर्बाद हुई इमारत को देखती युवती. (File Photo: AP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:43 PM IST

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए. यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं पर था. इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले किए. इस जंग में लेबनान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यूएई, ओमान जैसे देश भी शामिल हो गए.

लगभग 40 दिन तक मिसाइलें, ड्रोन और बमबारी चलती रही. अब तक की रिपोर्ट के अनुसार कुल मौतें करीब 3640 बताई जा रही हैं. हजारों लोग घायल हुए हैं. बहुत बड़ी संपत्ति का नुकसान हुआ है.

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जंग कब शुरू हुई और फैली?

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए. इन हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने, परमाणु सुविधाएं और सरकार से जुड़े स्थान निशाने पर थे. ईरान ने इसे जवाब दिया और इजरायल पर मिसाइल व ड्रोन दागे. साथ ही उसने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए. 

ईरान ने खाड़ी देशों पर भी हमले किए क्योंकि वहां अमेरिकी ठिकाने हैं. लेबनान में हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर रॉकेट दागे. यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल को निशाना बनाया. इस तरह एक छोटा सा संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल गया. कई देशों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं और तेल-गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं.

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इस 40 दिन की जंग में सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वहां 2076 लोग मारे गए. 26500 से ज्यादा घायल हुए. इनमें आम नागरिक भी शामिल हैं. लेबनान में 1497 मौतें हुईं और हजारों लोग घायल हुए. इजरायल में 26 लोग मारे गए जबकि 7183 घायल हुए. अमेरिकी सैनिकों में 13 मौतें हुईं और 200 से ज्यादा घायल हुए.

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खाड़ी देशों में कुल 28 मौतें बताई गई हैं. इनमें कुवैत में 7, बहरीन में 3, सऊदी अरब में 2, यूएई में 12, ओमान में 3 और कतर में कुछ घायल हुए. इराक में 109 मौतें और दर्जनों घायल. जॉर्डन में 29 घायल, सीरिया में 4 मौतें और साइप्रस में भी कुछ नुकसान हुआ. 

कुल मिलाकर मौतों की संख्या 3640 के आसपास पहुंच गई है. घायलों की संख्या बहुत ज्यादा है – ईरान अकेले में 26,500 से ऊपर. असली आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि स्थिति तेजी से बदल रही है.

इमारतों और संपत्ति का भारी नुकसान

जंग ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि शहरों और गांवों को भी तबाह कर दिया. कुल 90 हजार घर पूरी तरह बर्बाद हो गए. स्कूलों पर भी बहुत असर पड़ा – 760 स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए. अस्पतालों की संख्या 307 बताई गई है जो या तो बमबारी में टूट गए या इस्तेमाल नहीं हो पा रहे. हजारों व्यावसायिक इमारतें, दुकानें, बाजार और फैक्टरियां भी नष्ट हुईं.

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ईरान में कई शहरों में आवासीय इलाके, स्कूल और अस्पताल प्रभावित हुए. लेबनान में भी बड़े पैमाने पर घर और इमारतें गिर गईं. इजरायल में कुछ इलाकों में क्षति हुई लेकिन वहां की एयर डिफेंस ने कई हमलों को रोक लिया. खाड़ी देशों में तेल और गैस के प्लांट, बंदरगाह और एयरपोर्ट पर हमले हुए जिससे ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हुआ. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन बाधित होने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ गईं.

ईरान इस जंग का मुख्य केंद्र रहा. वहां सबसे ज्यादा मौतें और घायल हुए. उसके परमाणु और सैन्य कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा. लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े इलाकों में भारी बमबारी हुई जिससे आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. इजरायल ने अपनी मजबूत रक्षा व्यवस्था से कई हमलों को रोका लेकिन कुछ मौतें और चोटें हुईं.

खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन आदि ने ईरानी हमलों का सामना किया. इन देशों में ज्यादातर हमले ऊर्जा सुविधाओं पर थे. हालांकि इन देशों की एयर डिफेंस ने ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, फिर भी कुछ मौतें और संपत्ति का नुकसान हुआ.  

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जंग का बड़े पैमाने पर असर

इस 40 दिन की जंग ने पूरे मिडिल ईस्ट को हिला दिया. लाखों लोग अपने घर छोड़कर भागे. तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से एशिया और यूरोप में ईंधन की कमी महसूस होने लगी. कई देशों में स्कूल बंद रहे, अस्पतालों पर बोझ बढ़ गया और अर्थव्यवस्था को झटका लगा.

अब 7 अप्रैल 2026 के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हो गया है. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की शर्त भी शामिल है. इजरायल का कहना है कि लेबनान में उसकी कार्रवाई इस सीजफायर से अलग है. पाकिस्तान में बातचीत शुरू होने वाली है लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक है.

यह जंग दिखाती है कि एक छोटा संघर्ष कितनी जल्दी बड़े क्षेत्र में फैल सकता है. मौतों, घायलों और तबाही के आंकड़े दुखद हैं. 90 हजार घर, 760 स्कूल और 307 अस्पतालों का नुकसान आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करेगा.   

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