अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल को अगस्त 2026 में तीन और एफ404-आईएन20 इंजन भेज दिए हैं. ये इंजन तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एमके1ए प्रोग्राम के लिए हैं. कंपनी ने खुद इसकी पुष्टि की है. इस खेप के साथ कुल 10 इंजन एचएएल तक पहुंच चुके हैं.
इससे पहले जुलाई में सातवां इंजन पहुंचा था. छठे इंजन में छोटी तकनीकी समस्या आई थी लेकिन जीई ने उसे ठीक कर दिया. एचएएल ने इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी. जीई ने कहा कि वह एचएएल और भारतीय वायुसेना के साथ साझेदारी पर गर्व करता है. स्वदेशी फाइटर जेट्स को पावर देने में सहयोग कर रहा है.
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तेजस एमके1ए प्रोजेक्ट इंजन सप्लाई की कमी की वजह से काफी पीछे चल रहा था. रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था. इसमें 83 विमान शामिल हैं जिनमें 73 फाइटर और 10 ट्रेनर हैं. योजना के अनुसार आठ साल में डिलीवरी पूरी होनी थी.
तीसरे साल में पहले तीन विमान और फिर पांच साल तक सालाना 16 विमान देने का लक्ष्य था. लेकिन इंजनों की धीमी सप्लाई ने उत्पादन को धीमा कर दिया. अब नए इंजन आने से राहत मिली है. एचएएल ने कहा है कि आने वाले महीनों में और इंजन मिलेंगे. दिसंबर तक कुल 22 इंजन पाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि उत्पादन तेज हो और वायुसेना को विमान मिलने शुरू हों.
डील और भविष्य की जरूरत
जीई एयरोस्पेस को पहले ऑर्डर के लिए कुल 99 एफ404-आईएन20 इंजन सप्लाई करने का ठेका मिला है. यह सिंगल-इंजन फाइटर का मुख्य पावर प्लांट है और प्रोडक्शन शेड्यूल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इंजनों की नियमित और तेज सप्लाई से ही एचएएल उत्पादन रफ्तार बढ़ा पाएगा.
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वायुसेना की जरूरतें पूरी करने के लिए निरंतर इंजन डिलीवरी जरूरी है. अगर सप्लाई का सिलसिला बना रहा तो प्रोजेक्ट फिर पटरी पर आ सकता है. तेजस एमके1ए भारत का महत्वपूर्ण स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम है. इंजन की कमी लंबे समय से बाधा बनी हुई थी.
जीई की नई खेप इस बाधा को दूर करने की दिशा में सकारात्मक कदम है. एचएएल अब उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा. इससे भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी. भविष्य में और तेज सप्लाई की जरूरत बनी हुई है ताकि मूल समयसीमा के करीब पहुंचा जा सके.
शिवानी शर्मा