होर्मुज पर ईरान का खेल खराब करने की तैयारी, पोर्ट से पाइपलाइन तक इन विकल्पों पर काम कर रहे खाड़ी देश

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खतरे के बाद सऊदी अरब, यूएई, इराक और ओमान जैसे अरब देश पोर्ट से पाइपलाइन तक का रास्ता बना रहे हैं. सऊदी की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, यूएई की हबशान-फुजैरा पाइपलाइन और इराक की किर्कुक-सेयहान पाइपलाइन को फुल स्पीड पर चलाया जा रहा है. ताकि तेल एक्सपोर्ट आराम से हो सके.

Advertisement
ये है इराक की किर्कुक-सेयहान पाइपलाइन जो इराक से तुर्की तक जाती है. उसी की चेकिंग करता सरकारी कर्मचारी. (Photo: Reuters) ये है इराक की किर्कुक-सेयहान पाइपलाइन जो इराक से तुर्की तक जाती है. उसी की चेकिंग करता सरकारी कर्मचारी. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है. यहां से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा है. लेकिन फरवरी 2026 में ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बाद जब होर्मुज बंद हो गया, तो खाड़ी के अरब देशों ने तुरंत अपनी रणनीति बदल दी. 

अब वे पोर्ट से पाइपलाइन तक का रास्ता बना रहे हैं ताकि तेल एक्सपोर्ट बिना होर्मुज के भी होता रहे. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इराक जैसे अरब देश पहले से बनी पाइपलाइनों को तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं और नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं. ये विकल्प न सिर्फ तेल निर्यात बचाने के लिए हैं, बल्कि भविष्य में किसी भी संकट से निपटने के लिए भी तैयार किए जा रहे हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक साल में भारत ने अपने वेपन सिस्टम में कितने हथियार जोड़े, कितने मॉडिफाई किए? पूरी लिस्ट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है. यहां से सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर और इराक का ज्यादातर तेल गुजरता है. अगर कोई युद्ध या तनाव हो तो ईरान आसानी से इसे बंद कर सकता है. मार्च 2026 में जब ऐसा हुआ, तो दुनिया के तेल बाजार में हड़कंप मच गया. कीमतें आसमान छूने लगीं. 

इसलिए अरब देशों ने फैसला किया कि अब पोर्ट से पाइपलाइन का रास्ता अपनाना जरूरी है. सऊदी अरब, यूएई और इराक ने मिलकर पुरानी पाइपलाइनों को फुल स्पीड पर चला दिया. नई पाइपलाइनों की योजना तेज कर दी है. ये कदम सिर्फ तुरंत राहत के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक तेल निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए हैं.

Advertisement

सऊदी अरब: ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (पेट्रोलाइन) का कमाल

सऊदी अरब इस समय सबसे बड़ा विकल्प चला रहा है. उसकी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन भी कहते हैं, 1200 किलोमीटर लंबी है. यह अबकाइक (पूर्वी तेल क्षेत्र) से यंबू (लाल सागर पर पोर्ट) तक जाती है. इसकी क्षमता 7 मिलियन बैरल प्रति दिन है. मार्च 2026 में जब होर्मुज बंद हुआ, तो सऊदी अरब ने इस पाइपलाइन को फुल कैपेसिटी पर चला दिया.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों के लिए एडवाइजरी जारी, लारक द्वीप से दूर रहें 

पहले यह सिर्फ 17 लाख बैरल रोज भेजता था, लेकिन अब 59 लाख बैरल तक पहुंच गया. यंबू पोर्ट से तेल अब सीधे लाल सागर और फिर यूरोप-एशिया भेजा जा रहा है. सऊदी सरकार ने पाइपलाइन को हमलों से बचाने के बाद भी पूरी क्षमता बहाल कर दी. यह अरब देशों में सबसे बड़ा और सबसे सफल विकल्प साबित हो रहा है.

इस नक्शे में हरी लाइन है सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और नीली लाइन है यूएई की हबशान-फुजैरा पाइपलाइन. (Photo: Getty)

यूएई: हबशान-फुजैरा पाइपलाइन (ADCOP) का रोल

संयुक्त अरब अमीरात- यूएई दूसरा बड़ा खिलाड़ी है. उसकी अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन (ADCOP या हबशान-फुजैरा पाइपलाइन) 380 किलोमीटर लंबी है. यह हबशान तेल क्षेत्र से फुजैरा पोर्ट (ओमान की खाड़ी के बाहर, अरब सागर पर) तक जाती है. क्षमता 1.8 मिलियन बैरल प्रति दिन है. 

Advertisement

होर्मुज बंद होने के बाद यूएई ने इसे पूरी क्षमता पर चला दिया है. फुजैरा पोर्ट से तेल अब सीधे भारतीय महासागर में जाता है. यूएई सरकार नई पाइपलाइन बनाने की भी योजना बना रही है ताकि और ज्यादा तेल बाहर जा सके. साथ ही फुजैरा में बड़ा तेल स्टोरेज भी बनाया गया है. यूएई का यह रास्ता छोटा लेकिन बहुत तेजी से काम कर रहा है.

यह भी पढ़ें: वो समझौता जिसके तहत भारत और रूस एक-दूसरे की जमीन पर रखेंगे 3000 सैनिक, जेट-युद्धपोत?

इराक: किर्कुक-सेयहान पाइपलाइन और नई योजनाएं

इराक भी अरब देशों में शामिल है और अपना विकल्प चला रहा है. उसकी किर्कुक-सेयहान पाइपलाइन (इराक - तुर्की पाइपलाइन) 1.6 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता रखती है. यह इराक से तुर्की के भूमध्य सागर पोर्ट सेयहान तक जाती है. होर्मुज संकट के दौरान इराक ने इसे बढ़ावा दिया. 

पुरानी आईपीएसए पाइपलाइन (इराक से सऊदी अरब होते हुए लाल सागर) को फिर से चालू करने की बात चल रही है. इराक बसरा-अकाबा पाइपलाइन (जॉर्डन होते हुए) और ओमान के दुकम पोर्ट तक नई पाइपलाइन की भी योजना बना रहा है. ये योजनाएं महंगी हैं, लेकिन इराक इन्हें जल्दी पूरा करने की कोशिश कर रहा है. 

ओमान और अन्य अरब देशों की भूमिका

Advertisement

ओमान होर्मुज से बाहर है, इसलिए उसका दुकम पोर्ट पहले से ही वैकल्पिक पोर्ट बन चुका है. यूएई और सऊदी अरब दुकम तक नई पाइपलाइन बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं, जिसकी लागत करीब 10 अरब डॉलर बताई जा रही है. 

यह भी पढ़ें: समंदर में शिकार... एक मिनट में 20 गोले दागती है वो 'सुपर गन' जिससे अमेरिका ने ईरानी जहाज को भेद डाला

कतर और कुवैत अभी मुख्य रूप से पुरानी पाइपलाइनों पर निर्भर हैं, लेकिन वे भी सऊदी और यूएई के साथ मिलकर बड़े प्रोजेक्ट्स पर चर्चा कर रहे हैं. कुल मिलाकर सऊदी अरब, यूएई, इराक और ओमान जैसे अरब देश मिलकर पोर्ट से पाइपलाइन का नेटवर्क बना रहे हैं.

ये पाइपलाइन विकल्प अभी 20-30 प्रतिशत तेल को ही बचा पा रहे हैं, लेकिन भविष्य में और मजबूत होंगे. सऊदी अरब और यूएई पहले से ही एक्सपेंशन पर काम कर रहे हैं. ये कदम न सिर्फ तेल की सप्लाई सुरक्षित रखेंगे, बल्कि दुनिया के तेल बाजार को भी स्थिर रखेंगे. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement