झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा कभी आतंक का दूसरा नाम माना जाता था. लोग उसके नाम से कांपते थे. लेकिन एक हफ्ते पहले वो जेल से शिफ्ट करते वक्त पुलिस की गोलियों का शिकार हो गया. यह पूरा मामला अब कानपुर के कुख्यात हिस्ट्रशीटर विकास दुबे के एनकाउंटर से जोड़ कर देखा जा रहा है. क्योंकि दोनों ही मामलों में मारे गए कैदी कुख्यात अपराधी थे. दोनों ही मामलों में पुलिस की गाड़ी ही एनकाउंटर का सबब बनी. चलिए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं पूरी कहानी.
2 अगस्त 2026, जामताड़ा
रात के करीब 8 से 9 बजे के बीच का वक्त था. झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को पुलिस की वैन से साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था. जब रात में कैदी वाहन साहिबगंज-गोविंदपुर मुख्य मार्ग पर सुपायडीह और केंदबोना के बीच पहुंचा. ठीक उसी दौरान सुरक्षा काफिले की एक गाड़ी का अगला टायर पंचर हो गया और सुजीत को दूसरे वाहन में शिफ्ट किया जा रहा था. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान सुजीत ने एक जवान का हथियार छीन लिया और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने लगा.
पुलिस के अनुसार, भागते समय सुजीत सिन्हा ने पुलिस टीम पर फायरिंग भी की. इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया और पकड़ा गया. उसे फौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर जा पहुंचे. फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और घटनाक्रम से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच शुरू की. पुलिस के दावे के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान सुजीत ने भागने की कोशिश की थी.
मेदिनीनगर यानी पलामू का रहने वाला सुजीत सिन्हा झारखंड की संगठित अपराध की दुनिया में लंबे समय से सक्रिय था. उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण, आर्म्स एक्ट और अवैध वसूली जैसे गंभीर अपराधों के 75 से ज्यादा मामले दर्ज बताए जाते हैं. वह पहले हजारीबाग के कुख्यात अपराधी सुशील श्रीवास्तव के शूटर के तौर पर अपराध की दुनिया में आया था.
बाद में उसने अपना अलग गैंग खड़ा कर लिया. इसके बाद सुजीत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उसने अपने गैंग का नेटवर्क धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, पलामू, लातेहार, चतरा और कोयलांचल के दूसरे इलाकों तक फैलाया. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसका गैंग कोयला कारोबारियों, रेलवे ठेकेदारों, बिल्डरों और कारोबारियों से लेवी वसूलने के लिए कुख्यात था.
हाल में सुजीत सिन्हा पलामू के चर्चित दोहरे हत्याकांड में उम्रकैद की सजा भी काट रहा था. इसके बावजूद जांच एजेंसियों का आरोप था कि जेल में रहने के दौरान भी वह मोबाइल फोन और अपने गुर्गों के जरिए गैंग की गतिविधियां संचालित करता रहा है. इसी वजह से उसे साहिबगंज जेल से धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था.
लेकिन रास्ते में हुई घटना ने पूरे मामले को एक बड़े सवाल में बदल दिया. आखिर सुरक्षा घेरे में चल रहे एक कैदी ने पुलिस का हथियार कैसे छीन लिया? पुलिस की गाड़ी का टायर पंचर होने के बाद क्या हुआ? और क्या इसी दौरान उसे भागने का मौका मिला? इन सवालों के जवाब अब जांच का हिस्सा हैं.
परिवार ने बताया फर्जी एनकाउंटर
इस मामले में नया मोड उस वक्त आया, जब एनकाउंटर के बाद सुजीत सिन्हा के परिवार ने पुलिस की कहानी को खारिज कर दिया. सुजीत की सास उषा देवी ने आरोप लगाया कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी. उन्होंने कहा कि रविवार रात करीब 11 बजे एक परिचित के वाट्सऐप कॉल से परिवार को सुजीत के एनकाउंटर की जानकारी मिली. उषा देवी का सवाल है कि जो व्यक्ति जेल से बाहर निकलने की स्थिति में नहीं था, वह पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश क्यों करेगा. उनका दावा है कि सुजीत ने करीब चार महीने पहले अपने वकीलों के सामने पुलिस से अपनी जान को खतरा बताया था और इसी आशंका को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर की गई थी.
परिवार का आरोप है कि याचिका में जेल ट्रांसफर के दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने की मांग भी की गई थी. उषा देवी ने यह भी दावा किया कि सुजीत के हाथों में हथकड़ी लगी हुई थी और मौत के बाद उसका शव करीब आठ घंटे तक जंगल में पड़ा रहा. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस का पक्ष इससे अलग है. घटना के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से घटनास्थल की जांच कराई है. पोस्टमार्टम डॉक्टरों के बोर्ड से कराने और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी किए जाने की बात भी पुलिस अधिकारियों ने कही है, जबकि मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच भी शुरू कर दी गई है.
क्यों याद आया कानपुर का विकास दुबे?
यही वह बिंदु है जहां सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर 2020 के विकास दुबे एनकाउंटर की याद दिलाता है. दोनों मामलों में घटनाक्रम का एक अहम हिस्सा पुलिस की गाड़ी से जुड़ा है. विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था, तभी 10 जुलाई 2020 को कानपुर के भौती इलाके के पास पुलिस वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की बात सामने आई. पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान विकास दुबे ने एक पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश की थी. पुलिस का दावा था कि इसके बाद मुठभेड़ हुई और गोली लगने से विकास दुबे घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
अब करीब छह साल बाद सुजीत सिन्हा के मामले में भी कहानी का एक हिस्सा कुछ इसी तरह जुड़ता दिखाई दे रहा है. यहां पुलिस की गाड़ी का टायर पंचर हुआ, जिसके बाद सुजीत को दूसरे वाहन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू हुई. पुलिस के अनुसार, इसी दौरान उसने हथियार छीना, भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर गोली चलाई. जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई. यानी एक मामले में गाड़ी पलटने के बाद भागने और मुठभेड़ की पुलिस कहानी सामने आई थी, जबकि दूसरे में गाड़ी का टायर पंचर होने के बाद हथियार छीनकर भागने और मुठभेड़ का दावा किया गया है.
अमन साहू से दुश्मनी का कनेक्शन
सुजीत सिन्हा की कहानी सिर्फ उसके एनकाउंटर तक सीमित नहीं है. झारखंड के अपराध जगत में उसका नाम कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू के साथ भी जुड़ा रहा है. कभी दोनों के एक साथ काम करने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में दोनों के बीच दुश्मनी हो गई. अमन साहू का भी छत्तीसगढ़ के रायपुर से रांची लाए जाने के दौरान पलामू में पुलिस एनकाउंटर हुआ था. इसके बाद अब सुजीत सिन्हा की मौत ने झारखंड के संगठित अपराध की दुनिया में एक और बड़े नाम का अंत कर दिया है. हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों ही घटनाओं ने पुलिस कस्टडी और एनकाउंटर की प्रक्रिया को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है.
फिलहाल सुजीत सिन्हा एनकाउंटर की जांच कई स्तरों पर चल रही है. घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक साक्ष्य, पुलिसकर्मियों के बयान, हथियारों की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट जांच से घटनाक्रम की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है. दूसरी तरफ परिवार लगातार इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए स्वतंत्र या न्यायिक जांच की मांग कर रहा है.
इसलिए इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि सुपायडीह के पास उस रात वास्तव में क्या हुआ था? क्या सच में पंचर हुई गाड़ी और उसके बाद भागने की कोशिश ने मुठभेड़ का रास्ता बनाया, या फिर परिवार के आरोपों के मुताबिक कहानी कुछ और थी? यही सवाल सुजीत सिन्हा एनकाउंटर को विकास दुबे केस की याद दिलाने वाला सबसे बड़ा कनेक्शन बना रहा है.
परवेज़ सागर