सावधान: सूरत में बच्चों की दवा के नाम पर खिलवाड़, घोड़े-गाय का लिवर टॉनिक शीशी में भरकर बेचा, आरोपी साजिद मुल्ला गिरफ्तार

गुजरात के सूरत में SOG ने मेडिकल स्टोर संचालक को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह पशुओं का लिवर टॉनिक बच्चों की दवा Liv.52 Drops के नाम पर बेच रहा था. पुलिस मामले की जांच कर रही है. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG) इस मामले की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • सूरत,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:19 PM IST

गुजरात के सूरत शहर में दवा के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है. यहां एक मेडिकल स्टोर संचालक पर घोड़े, गाय, भैंस और बैल जैसे पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले लिवर टॉनिक को बच्चों की दवा बताकर बेचने का आरोप लगा है.

मामले की जानकारी मिलने के बाद सूरत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फूड एंड ड्रग्स विभाग की टीम के साथ मिलकर कार्रवाई की. टीम ने गोपीपुरा मोमनावाड रोड स्थित शांतिनाथ मेडिकल स्टोर पर छापा मारा. पुलिस ने दुकान के संचालक मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला को गिरफ्तार कर लिया.

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पुलिस के मुताबिक, आरोपी पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले हिमालय कंपनी के ‘Liv.52 Protec Liquid Animal Feed Supplement’ को छोटी बोतलों में भरकर बेचता था. यह उत्पाद एक लीटर और पांच लीटर के बड़े पैक में उपलब्ध था. आरोप है कि साजिद मुल्ला इन पैक से तरल निकालकर उसे 60 मिलीलीटर और 100 मिलीलीटर की छोटी बोतलों में भर देता था.

इसके बाद बोतलों पर बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘Himalaya Liv.52 Drops 60 ml’ का स्टिकर लगा दिया जाता था. इस तरह पशुओं के लिए बने उत्पाद को इंसानों, खासकर बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा के रूप में बेचे जाने का आरोप है.

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, आरोपी छोटी बोतलों पर ऐसा स्टिकर लगाता था, जिससे ग्राहक उसे बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाला असली Liv.52 Drops समझें. पुलिस के अनुसार, दोनों उत्पादों का इस्तेमाल लिवर से जुड़ी जरूरतों के लिए होने के कारण ग्राहकों को कथित धोखाधड़ी का पता नहीं चलता था.

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आरोपी इसी समानता का फायदा उठाकर पशुओं के लिए बने लिक्विड को इंसानों की दवा बताकर बेचता था. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन बोतलों पर इस्तेमाल किए गए स्टिकर कहां से छपवाए गए थे. साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कथित फर्जीवाड़े में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं.

पुलिस की पूछताछ में इस कथित कारोबार से होने वाले मुनाफे का भी खुलासा हुआ है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले एक लीटर के पैक की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) 330 रुपये थी. वहीं, इंसानों के उपयोग वाले 60 मिलीलीटर Liv.52 Drops की MRP 160 रुपये बताई गई है.

आरोप है कि आरोपी बड़े पैक से छोटी बोतलें भरकर उन्हें बच्चों के ड्रॉप्स के नाम पर बेचता था. इस तरह एक लीटर के पैक से तैयार बोतलों को बेचकर वह करीब 660 रुपये या उससे अधिक की रकम वसूलता था. हालांकि, अलग-अलग बोतलों की वास्तविक बिक्री कीमत और कुल कमाई की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

पुलिस के मुताबिक, साजिद मुल्ला पिछले करीब एक साल से इस कथित अवैध कारोबार को चला रहा था. पूछताछ के दौरान उसके लगभग 1,000 बोतलें बेचने की बात सामने आने का दावा किया गया है. यदि यह आंकड़ा जांच में सही पाया जाता है, तो बड़ी संख्या में ग्राहक इस कथित धोखाधड़ी के दायरे में आए हो सकते हैं.

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हालांकि, इन बोतलों को खरीदने वाले लोगों की पहचान और उनकी संख्या की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन उत्पादों को खरीदने के बाद किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हुई थी या नहीं.

जानकारी के मुताबिक, शांतिनाथ मेडिकल स्टोर करीब 20 साल पुराना है. पुलिस की जांच में दुकान के संचालन से जुड़े लाइसेंस का पहलू भी सामने आया है. बताया गया है कि साजिद मुल्ला की बेटी ने हाल ही में बी.फार्मा (Bachelor of Pharmacy) की पढ़ाई पूरी की थी. आरोप है कि बेटी की डिग्री और फार्मासिस्ट लाइसेंस के आधार पर मेडिकल स्टोर चलाया जा रहा था.

अब जांच की जा रही है कि दुकान के संचालन में लाइसेंस से जुड़ी सभी शर्तों का पालन किया जा रहा था या नहीं. साथ ही, कथित रूप से पशुओं के लिए बने लिवर टॉनिक को रीफिल करके बेचने में दुकान से जुड़े अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है.

इस मामले में सूरत के अठवा पुलिस स्टेशन में मोहम्मद साजिद मुल्ला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 123, 125, 336(2), 336(3), 336(4) और 278 के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है. इसके अलावा, मेडिकल प्रैक्टिशनर एक्ट और फूड एंड ड्रग्स एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की गई है.

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पुलिस इस पूरे मामले को दवा की कथित धोखाधड़ी और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर आरोपों के तौर पर जांच रही है. आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब कथित कारोबार के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.

सूरत SOG अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी ने कथित तौर पर तैयार की गई इन बोतलों को किसी दूसरे दवा व्यापारी, अस्पताल या क्लिनिक को भी सप्लाई किया था. जांच का एक अहम पहलू उन स्टिकरों का स्रोत भी है, जिनका इस्तेमाल पशुओं के लिवर टॉनिक को बच्चों के ड्रॉप्स के रूप में दिखाने के लिए किए जाने का आरोप है.

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस काम में कोई सप्लायर या अन्य कारोबारी शामिल था या नहीं. मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और बरामद सामग्री के आधार पर की जाएगी.

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