बागपत में डबल मर्डर, हरिद्वार में गंगा स्नान, नेपाल में फरारी, आखिर में कोलकाता से गिरफ्तारी... ये कहानी है यूपी से भागे 'कातिल' महंत नरेशनाथ की. पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद नरेशनाथ ने कबूल किया है कि उसने 25 जुलाई को बागपत के गणेश मंदिर में अंकित और इसरार नाम के दो दोस्तों की हत्या की थी. वारदात के बाद लाशों को मंदिर परिसर में ही दफना दिया और ऊपर से टाइल्स लगाकर जाम करवा दिया. नरेशनाथ का अंकित की बहन से अफेयर था. विरोध पर इस वारदात को अंजाम दिया गया. अंकित के साथ मौजूद होने के कारण इसरार भी मारा गया. आइए जानते हैं पूरा मामला...
बागपत दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
बागपत पुलिस ने चर्चित अंकित-इसरार हत्याकांड के मुख्य आरोपी महंत बाबा नरेशनाथ को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है. वारदात के बाद फरार आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था. उसकी तलाश में पुलिस में लगातार दबिश दे रही थी.
पूरी घटना और खुलासा
ये मामला बागपत के चांदीनगर थाना क्षेत्र स्थित लहचौड़ा गांव के गणेश मंदिर का है. 25 जुलाई 2026 को सिंगौली तगा गांव के रहने वाले अंकित और उसका दोस्त इसरार लापता हो गए थे. परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और शक के आधार पर 13 अगस्त को मंदिर परिसर में खुदाई कराई. जमीन के नीचे से दोनों दोस्तों के शव बरामद हुए, जिन्हें गड्ढे में दफनाकर ऊपर टाइल्स बिछा दी गई थीं.
हत्या की वजह और खौफनाक साजिश
पुलिस पूछताछ में महंत नरेशनाथ ने खुलासा किया कि उसके अंकित की बहन के साथ संबंध थे. अंकित के पास दोनों की तस्वीरें थीं, जिनके जरिए वह महंत पर पैसों के लिए दबाव बना रहा था. बदनामी के डर से नरेशनाथ ने अंकित को हटाने की साजिश रची. उसने अंकित और उसके साथ आए दोस्त इसरार को नींद की गोलियां मिलाकर चाय पिलाई और फिर दोनों की हत्या कर शवों को मंदिर में दफना दिया.
फरारी और गिरफ्तारी
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद नरेशनाथ हरिद्वार गया और गंगा में डुबकी लगाकर फ़रारी काटने नेपाल भाग गया. लेकिन नेपाल में बाढ़ आने के बाद वह कोलकाता (विधाननगर) आ गया. वहां उसने पहचान छिपाने के लिए भिखारी का भेष धारण कर लिया और एक मंदिर के बाहर रहने लगा. बागपत पुलिस ने सर्विलांस और लोकेशन ट्रेस कर उसे धर दबोचा. पुलिस ने कानूनी कार्रवाई पूरी कर आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है.
मनुदेव उपाध्याय