सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ के नकली नोट, NIA के हत्थे चढ़े दो मुख्य आरोपी

सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने के मामले में NIA ने अजय कुमार और हरीश रौंता को गिरफ्तार किया है. ये दोनों ही इस मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे हैं. एजेंसी पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में NIA की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG) इस मामले में NIA की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये की नकली भारतीय करेंसी मिलने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने नकली नोटों की छपाई और सप्लाई की कथित साजिश में शामिल दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. 

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजय कुमार और हरीश रौंता के रूप में हुई है. NIA के मुताबिक, दोनों इस साजिश के प्रमुख किरदार हैं और गिरफ्तार किए जा चुके अन्य आरोपियों के करीबी सहयोगी भी हैं. एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.

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NIA के मुताबिक, अजय कुमार को 16 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के अंबाला से गिरफ्तार किया गया था. वहीं, दूसरे आरोपी हरीश रौंता को 22 अक्टूबर 2026 को हिमाचल प्रदेश के मनाली से पकड़ा गया. अजय कुमार के पिता का नाम रमेश चंद है, जबकि हरीश रौंता के पिता का नाम देवी चंद रौंता बताया गया है. 

जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों बड़ी मात्रा में नकली भारतीय करेंसी की छपाई और सप्लाई की साजिश में शामिल थे. अलग-अलग आरोपियों के जरिए इन नकली नोटों को सहारनपुर स्थित PNB की करेंसी चेस्ट तक पहुंचाया गया था.

इस मामले का खुलासा 29 अगस्त 2026 को हुआ था. सहारनपुर जिले के सदर बाजार थाने को पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये के अंकित मूल्य वाले नकली भारतीय नोट मिलने की विश्वसनीय सूचना मिली थी. इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई. 

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शुरुआती जांच के दौरान बैंक के तीन कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी. बैंक ने इन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था. इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच आगे बढ़ाई गई.

सदर बाजार थाने में इस मामले में 29 अगस्त 2026 को FIR नंबर 0431/2026 दर्ज की गई थी. शुरुआत में तीन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 178 के तहत केस दर्ज हुआ था. बाद में मामले की गंभीरता और नकली भारतीय करेंसी से जुड़ी कथित साजिश को देखते हुए NIA ने जांच अपने हाथ में ले ली. 

एजेंसी ने 3 सितंबर 2026 को केस को दोबारा दर्ज कर अपनी जांच शुरू की. NIA इस मामले की जांच RC-02/2026/NIA/LKW के तहत कर रही है. दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले भी NIA इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. 

एजेंसी ने 7, 15, 20 और 22 सितंबर 2026 को अलग-अलग कार्रवाई के दौरान अमित कुमार, आदेश चौधरी, मुकेश कुमार, राजेंद्र और नीतू को गिरफ्तार किया था. इनमें अमित कुमार का नाम शुरुआती FIR में शामिल था, जबकि आदेश चौधरी समेत अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच के दौरान सामने आई. 

NIA के मुताबिक, अजय कुमार और हरीश रौंता का पहले से गिरफ्तार आदेश चौधरी और इस मामले में पकड़े गए दूसरे आरोपियों से करीबी संबंध है. एजेंसी इन सभी के बीच कथित संपर्क और भूमिका की जांच कर रही है.

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NIA की जांच का मुख्य फोकस नकली भारतीय करेंसी की छपाई, उसकी सप्लाई और बैंक की करेंसी चेस्ट तक नोटों के पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का पता लगाना है. एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग आरोपियों के माध्यम से नकली नोट सहारनपुर की PNB करेंसी चेस्ट तक पहुंचाए गए थे. 

अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनकी क्या भूमिका थी. साथ ही, नकली नोटों की सप्लाई से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है. NIA ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं.

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