रान्या राव पर 102.5 करोड़ का जुर्माना, 127 किलो सोने की तस्करी के मामले में कस्टम्स का बड़ा एक्शन

रान्या राव और तीन अन्य लोगों पर कस्टम्स ने 270.8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. मामला 127 किलो से ज्यादा सोने की कथित तस्करी और हवाला लेन-देन से जुड़ा है. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में रान्या राव मोहलत भी दी गई है (फोटो-ITG) इस मामले में रान्या राव मोहलत भी दी गई है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:01 PM IST

एक्ट्रेस हर्षवर्धिनी रान्या, जिन्हें रान्या राव के नाम से भी जाना जाता है, और तीन अन्य लोगों पर कस्टम्स ने कुल 270.8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई कथित सोना तस्करी के एक बड़े मामले में की गई है. कस्टम्स के मुताबिक, आरोपी एक ऐसे सिंडिकेट का हिस्सा थे, जिसने मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच भारत में 127 किलोग्राम से ज्यादा सोना तस्करी के जरिए पहुंचाया. इस सोने की कुल कीमत करीब 102.5 करोड़ रुपये बताई गई है.

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कस्टम्स के संयुक्त आयुक्त (एयरपोर्ट) संदीप गुंजाल ने 30 सितंबर को इस मामले में आदेश जारी किया. आदेश के मुताबिक, रान्या राव को पूरे कथित तस्करी किए गए सोने के कंसाइनमेंट के लिए जिम्मेदार माना गया और उन पर 102.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया. वहीं, तरुण कोंडुरु राजू पर 62.1 करोड़ रुपये, जबकि साहिल सकरिया जैन और भरत कुमार जैन पर 53.1-53.1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

यह पूरा मामला 3 मार्च 2025 को सामने आया था, जब रान्या राव दुबई से बेंगलुरु पहुंची थीं. कस्टम्स ने उनकी तलाशी के दौरान करीब 14.2 किलोग्राम सोना बरामद किया था, जिसकी कीमत उस समय करीब 12.6 करोड़ रुपये थी. जांच में सामने आया कि सोना उनके शरीर के अलग-अलग हिस्सों में छिपाया गया था. इसे पैरों की पिंडलियों और कमर के आसपास, पैंट की जेबों और जूतों के अंदर छिपाकर लाया गया था.

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कस्टम्स के आदेश में रान्या राव को इस मामले की मुख्य आरोपी बताया गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, तरुण कोंडुरु राजू की भूमिका दुबई में दस्तावेजों से जुड़े काम और सोने की डिलीवरी से जुड़ी थी. वहीं साहिल सकरिया जैन और भरत कुमार जैन पर भारत में तस्करी के सोने को खपाने और उसकी बिक्री से मिले पैसों का इंतजाम करने का आरोप लगाया गया है. कस्टम्स के अनुसार, भुगतान के लिए हवाला नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया गया.

जांच के दौरान रान्या राव के लावेल रोड स्थित घर की भी तलाशी ली गई थी. इस कार्रवाई में करीब 2.7 करोड़ रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई. इसके अलावा करीब 2.1 करोड़ रुपये कीमत के आभूषण और अन्य कीमती सामान भी मिले थे. कस्टम्स ने इन बरामद चीजों को कथित तौर पर तस्करी किए गए सोने की बिक्री से हासिल रकम से जुड़ा बताया है.

कस्टम्स ने जब्त किए गए सोने के साथ-साथ नकदी, आभूषण और अन्य सामान को भी जब्त करने का आदेश दिया है. आदेश में कहा गया कि ये संपत्तियां कथित तौर पर तस्करी के सोने की बिक्री से हासिल रकम से जुड़ी हुई थीं. हालांकि, पूरे मामले में सिर्फ 3 मार्च 2025 को पकड़ा गया सोना ही शामिल नहीं है. कस्टम्स के मुताबिक, इससे पहले भी सोने की तस्करी की 14 खेप भारत लाई गई थीं.

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इन 14 पुरानी खेपों में कुल 113 किलोग्राम से ज्यादा सोना होने की बात कही गई है. हालांकि, इन खेपों को कस्टम्स उस समय बरामद नहीं कर सका था. इसी वजह से जांच में सामने आए दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, लेन-देन और दूसरे सबूतों को महत्वपूर्ण माना गया. कस्टम्स ने इन सभी तथ्यों को जोड़कर पूरे कथित सिंडिकेट की भूमिका तय की.

आदेश जारी करते समय जांच अधिकारियों ने 16 घंटे से ज्यादा की एयरपोर्ट CCTV फुटेज देखी. इसके अलावा 152 दस्तावेजों और कई अन्य डिजिटल और लेन देन से जुड़े सबूतों को भी आधार बनाया गया. इन सबूतों के आधार पर कस्टम्स ने चारों आरोपियों की कथित भूमिका और सोने की तस्करी के नेटवर्क को लेकर नतीजे निकाले.

अब इस आदेश के खिलाफ चारों आरोपी कस्टम्स कमिश्नर (अपील्स) के सामने अपील कर सकते हैं. आदेश की सूचना मिलने की तारीख से 60 दिनों के भीतर अपील दाखिल करने का प्रावधान है. यानी कस्टम्स के इस आदेश के खिलाफ कानूनी चुनौती देने का रास्ता अभी खुला हुआ है.

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